• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

त्रिवेंद्र के इस्तीफे के निहितार्थ

Writer D by Writer D
10/03/2021
in Main Slider, उत्तराखंड, ख़ास खबर, राजनीति, राष्ट्रीय, विचार
0
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

सियाराम पांडे ‘शांत’

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने  अंतत: इस्तीफा दे दिया।  ऐसा उन्होंने क्यों किया, यह तो वही बेहतर बता सकते हैं लेकिन  उनकी  कार्यशैली से परिचित लोगों को पता है कि उनके साथ देर-सवेर ऐसा होना ही था। उनसे न तो राज्य के भाजपा नेता खुश थे और न ही  मतदाता। जिस क्षत्रिय विरादरी से वे संबंधित हैं, उसमें भी गैर रावत राजपूत उनसे नाराज चल रहे थे। सच कहा जाए तो उनकी रीति-नीति से न तो भाजपा खुश थी और न ही संघ  परिवार।  पं. दीनदयाल उपाध्याय के परिजनोंकी नाराजगी भी किसी से छिपी नहीं थी। इस लिहाज से उनका इस्तीफा तो बहुत पहले ही हो जाना था लेकिन अपनी होशियारी के चलते वे हर बार अपना बचाव करने में सफल हो जाते रहे लेकिन इस बार उनका दांव नहीं चल सका।

कहते हैं, न कि कर्म की निर्जरा नहीं होती। उनके अपने ही निर्णय उनके लिए वाटरलू साबित हो गए और उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देने को विवश होना पड़ा। उन्होंने त्यागपत्र देने के बाद जो कुछ भी कहा, वह राजनीतिक शिष्टाचार और औपचारिकता भर है। वर्ना कौन नहीं जानता के मुख्यमंत्री जैसा सम्मानजनक पद कोई भी नेता यूं ही अपने हाथों से जाने नहीं देना चाहता। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक चचार्ओं का बाजार गर्म हो गया है। कई तरह की आवाजें उत्तराखंड की राजनीतिक वादियों में गूंजने लगी हैं। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने तो यहां तक कह दिया है कि अब तो भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी यह मानने लगा है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने राज्य में कोई काम नहीं किया है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि भाजपा अब किसे राज्य का मुख्यमंत्री बनाती है लेकिन 2022 में उसकी सत्ता में वापसी नहीं होने वाली है। यह और बात है कि हरीश रावतका बयान नितांत सियासी है। अन्यथा उन्हें भी विजय बहुगुणा को हटाकर ही मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसमें शक नहीं कि  त्रिवेंद्र सिंह रावत संघ के प्रचारक से मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे थे।

सोपोर में सुरक्षाबलों ने अल-बदर का शीर्ष आतंकी को किया ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

उनसे संघ परिवार और भाजपा दोनोंको बहुत अपेक्षा थी लेकिन वे उन अपेक्षाओं पर खरेनहीं उतर सके। उन पर भ्रष्टाचार के आरोपके एक मामले में अदालत  तक को जांंच काआदेश देना पड़ा। किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इससे असहज स्थिति भला और क्या हो सकती है? 1979 में त्रिवेंद्र सिंह रावत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। 1981 में संघ के प्रचारक के रूप में काम करने का उन्होंने संकल्प लिया। 1985 में वे देहरादून महानगर के प्रचारक बने। 1993 में वह भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री बने। 1997 में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री बने। 2002 में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री बने। 2002 में विधानसभा चुनाव में डोईवाला विधानसभा से विजयी हुए। 2007 में डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए।

भारतीय जनता पार्टी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 में डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए। 17 मार्च 2017 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। अगर वे सबका साथ-सबका विकास और सबका विष्वास की भाजपाकी रीति नीति और सत्य, संवाद और सेवाके संघ के ध्येय वाक्य पर अमल करते तो नारायण दत्त तिवारी की तरह पांचसाल सत्ता संभालने वाले राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री होते लेकिन अपनी मनमानियों और उग्र व्यवहार की बदौलत उन्होंने अपनोंकाभी प्यार खोदिया। उनकी कुर्सी जाने की बड़ी वजह राज्य के 4 जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा और बागेश्वर को मिलाकर नया गैरसैंण मंडल बनाना माना जा रहा है। हालांकि, यह अकेली वजह नहीं है, जिसके कारण रावत को कुर्सी गंवानी पड़ी है। वह इससे पहले भी कई ऐसे फैसले कर चुके थे, जिनकी वजह से भाजपा आलाकमान को उन्हें हटाने का फैसला करना पड़ा। रावत पर करप्शन का कोई आरोप नहीं था, लेकिन एक सर्वे में उन्हें सबसे अलोकप्रिय  मुख्यमंत्री बताया गया था। यह बात भी उनके खिलाफ चली गई। रावत ने गढ़वाल के हिस्से गैरसैंण मंडल में कुमांऊ के दो जिलों अल्मोड़ा और बागेश्वर को शामिल किया तो पूरे कुमाऊं में सियासी तूफान आ गया। इसे कुमांऊ की अस्मिता और पहचान पर हमला माना गया। उनके फैसले के खिलाफ पूरे कुमाऊं के भाजपा नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने मोर्चा खोल दिया। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले त्रिवेंद्र के इस फैसले को उन्होंने आत्मघाती करार दिया। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को सरकार के अधीन करने के उनके निर्णय से ब्राह्मण, तीर्थ पुरोहित और साधु-संत नाराज चल रहे थे।

फडनवीस के बयान पर महाराष्ट्र विस में हंगामा, विधानसभा में गूंजा- ये सरकार खूनी है

ब्राह्मण समाज में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। यही नहीं भाजपा के ही सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी थी। हालांकि हाईकोर्ट में सरकार जीत गई थी, लेकिन स्वामी सुप्रीम कोर्ट चले गए और अभी मामले पर सुनवाई हो रही है। त्रिवेंद्र के इस फैसले से भाजपा आलाकमान भी खुश नहीं था। वैसे वजहें तो कईरहीं, जिसने त्रिवेंद्र सिंह रावत की हालत पतली की लेकिन अभी भी वे अपनी हार की वजह केंद्रीय नेत्तव से पूछनेकी बात जिस तरह कह रहेहैं, वह बहुत  मुऊीद नहीं है और रस्सी जल जाने के बात एैंठन के बरबरार रहने की ही पुष्टि कर रहे हैं।

Tags: National newsTrivendra RawatUttrakhand News
Previous Post

पूर्ववर्ती सरकारों ने बुंदेलखंड का सिर्फ दोहन किया : योगी

Next Post

कृषि व्यवसाय को आधुनिकता देकर अधिक लाभकारी बनाया जाए : आनंदीबेन

Writer D

Writer D

Related Posts

Kuttu Dosa
Main Slider

इस नवरात्रि व्रत में बनाएं कुट्टू का डोसा, पुदीने या नारियल की चटनी के साथ उठाएं लुत्फ

21/03/2026
Gulab Jamun
Main Slider

इस बार मीठे में ट्राई करे गुलाब जामुन कस्टर्ड

21/03/2026
Shardiya Navratri
Main Slider

चैत्र नवरात्र में न खरीदें ये चीजें, वरना घर में छा जाएगी दरिद्रता

21/03/2026
Chaitra Navratri
Main Slider

नवरात्रि में गलती से टूट जाए व्रत तो करें ये काम, शांत हो जाएगा मां दुर्गा का गुस्सा

21/03/2026
maa chandraghanta
Main Slider

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें मंत्र, कथा भोग, व रंग

21/03/2026
Next Post
Governor approves tenancy law

कृषि व्यवसाय को आधुनिकता देकर अधिक लाभकारी बनाया जाए : आनंदीबेन

यह भी पढ़ें

बिहार चुनाव Bihar election

बिहार चुनाव परिणामों से लालू मायूस, लोगों से मिलने से किया इनकार

11/11/2020
Boarding School

उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के बच्चे पढ़ सकेंगे बोर्डिंग स्कूल में

13/08/2022
Gharoni

30 जून तक सभी शेष 91 हजार ग्रामों की तैयार होगी घरौनी

11/03/2023
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version