वास्तु शास्त्र के अनुसार ईशान कोण दिशा को उत्तर-पूर्व दिशा भी कहा जाता है। यह घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। इस दिशा में देवी-देवताओं का वास स्थान माना जाता है। इसलिए इस स्थान को बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है। बता दें, ईशान कोण दिशा में अगर आप देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-पाठ करते हैं, तो व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि हो सकती है। अब ऐसे में इस दिशा में शंख (Shankh) रखने का विशेष महत्व बताया गया है। आइए इस लेख में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं कि इस दिशा में शंख रखने का क्या महत्व है?
ईशान कोण दिशा में शंख (Shankh) रखने का क्या लाभ है?
शंख (Shankh) को ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। शंख को जल से भरकर उसमें कुछ तुलसी के पत्ते डालकर रखें। शंख को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। ईशान कोण में शंख रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इससे घर और कार्यस्थल में शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
ईशान कोण धन और समृद्धि से जुड़ा है। इसलिए इस दिशा में शंख (Shankh) रखने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। ईशान कोण दिशा में शंख बजाने से मानसिक तनाव दूर हो सकती है और मन शांत रहता है।
शंख (Shankh) की पूजा कैसे करें?
सबसे पहले, शंख (Shankh) को जल से अच्छी तरह धो लें। फिर, शंख में थोड़ा सा गंगाजल डालकर उसमें कुछ तुलसी के पत्ते डालें। शंख को ढककर कुछ देर के लिए रख दें। फिर ईशान कोण दिशा में एक चौकी रखें और उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर शंख रखें। शंख के मुख को पूर्व दिशा की ओर रखें। शंख के पास घी का दीपक जलाएं। इससे व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।









