हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) का संबंध आंवले के वृक्ष से माना जाता है। शास्त्रों में आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास बताया गया है। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है
आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) की पूजा विधि
आमलकी एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान को पीले वस्त्र अर्पित करें। चंदन, अक्षत और पीले पुष्प चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। यदि संभव हो तो आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर पूजा करें। शाम के समय भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन चावल और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
व्रत के नियम
एकादशी के दिन सात्विक आहार लें या फलाहार करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करें।
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से आमलकी एकादशी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन से आर्थिक कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में समृद्धि आती है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
आमलकी एकादशी (Amalaki Ekadashi) का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य मिलता है। कथा के अनुसार एक राजा और उसकी प्रजा ने आमलकी एकादशी का व्रत कर भगवान की कृपा प्राप्त की थी। तभी से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।









