• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

श्याम रजक ने नीतीश पर लगाये आरोप, मांझी ने महागठबंधन को कहा अलविदा

Desk by Desk
24/08/2020
in Main Slider, ख़ास खबर, बिहार, राजनीति, राष्ट्रीय
0
Manjhi bids farewell to grand alliance

मांझी ने महागठबंधन को कहा अलविदा

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

पटना: बिहार की सियासी फिजाओं में इन दिनों ‘दलित पॉलिटिक्स’ की काफी चर्चा है। चर्चा इसलिए है कि, क्योंकि राज्य में कोरोना  काल के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं। इस चुनावी साल में राजनीतिक दलों द्वारा कई मुद्दे बनाए जा रहे हैं। इन्हीं मुद्दों में एक मुद्दा जो हाल के दिनों में हावी हुआ है, वह ‘दलित कार्ड’ का।

दलित कार्ड की राजनीति बिहार में कोई अभी नहीं शुरू हुई है, बल्कि इसकी शुरुआत 60 के दशक के अंत में ही शुरू हो गई थी, जब बिहार के मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री बनें थे। लेकिन हाल के दिनों में बिहार की नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रहे श्याम रजक ने जब जेडीयू को छोड़ते हुए, आरजेडी की ‘लालटेन’ संभाली तो, यह मुद्दा एक बार फिर सियासी फिजाओं में तैरने लगा।

चीन से बातचीत हुई नाकाम तो सैन्य विकल्प है तैयार, विपिन रावत ने दिया बड़ा बयान

इसकी शुरुआत, खुद श्याम रजक ने नीतीश कुमार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाकर किया। फिर क्या था, इसके बाद मानों, बिहार में इस मुद्दों को लेकर सियासत गर्मा गई। आरजेडी ने अपनी दलित नेताओं की फौज उतारकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा, तो सत्तापक्ष भी पलटवार करने में पीछे नहीं रही। सरकार के चार मंत्रियों ने भी रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके नीतीश कुमार की दलित हितैषी छवि को पेश किया।

CWC की बैठक शुरू होने से पहले हुआ हंगामा, ये दो नेता बने बवाल का कारण

इन सबके के बीच, एक और नाम है, जो बिहार की सियासत में बीते कुछ दिनों से मौजूं है, वह है पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतनराम मांझी का। जीतन राम मांझी ने बीते दिनों महागठबंधन को अलविदा कह दिया और दलील दी कि, उनकी मांग को महागठबंधन द्वारा बार-बार नजरअंदाज किया जा रहा था।

मांझी की मानें तो, वह लगातार समन्वय समिति बनाने की मांग महागठबंधन में कर रहे थे। लेकिन समय देने के बावजदू, उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया। हालांकि, मांझी का यह कदम राजनीति के जानकारों के लिए चौंकाने वाला नहीं है। क्योंकि जो राजनीति समझते हैं, वह बहुत पहले ही भांप गए थे कि, मांझी जल्द ही महागठबंधन को ‘बाय-बाय’ बोल देंगे।

दिल्ली मेट्रो को लॉकडाउन की वजह से अब तक हुआ 1300 करोड़ का घाटा

जीतन राम मांझी का अब अगला कदम क्या होगा और वह अपनी मौजूदगी बिहार की सियासत में किस तरह बरकरार रखेंगे, इसका जवाब तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा। क्योंकि मांझी ने महागठबंधन को अलविदा कहने के बाद, अपने पत्ते नहीं खोलें है। लेकिन उनकी पार्टी की तरफ से बस इतना ही कहा गया है कि, 2-3 दिन में मांझी कुछ बड़ा ऐलान कर सकते हैं।ऐसे में कयासों का बाजार गर्म है और एक कयास यह भी है कि, मांझी जेडीयू में अपनी पार्टी का विलय कर सकते हैं या फिर एनडीए  गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक ऐसी को पुख्ता सूचना नहीं मिली है, लेकिन एनडीए नेताओं द्वारा मांझी का गठबंधन में स्वागत करने की बात हमेशा कही जाती रही है।

मस्जिद निर्माण के लिए ट्रस्ट ने जारी किया LOGO, जानिए क्या है इसकी खासियत

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि, मांझी पहले जेडीयू में थे और नीतीश कुमार की कैबिनेट में 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले मंत्री थे। इसके बाद, जब 2014 में एनडीए द्वारा नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने की घोषणा हुई, तो जेडीयू गठबंधन से बाहर हो गई और नीतीश कुमार ने सीएम की कुर्सी छोड़ते हुए जीतन राम मांझी को सीएम बना दिया। लेकिन, 2014 के चुनाव के बाद, नीतीश से अनबन के बाद जेडीयू ने मांझी को सीएम पद से हटा दिया और दोबारा नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन गए। जबकि, मांझी ने अलग होकर हिंदुस्तान आवाम मोर्चा का गठन किया और 2015 विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ लड़े। हालांकि, पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और सिर्फ मांझी ही विधानसभा पहुंचने में सफल हो पाए।

इसके बाद, मांझी एनडीए से भी अलग हो गए और बाद में महागठबंधन का हिस्सा बन गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में मांझी की पार्टी को तीन सीटें मिली, लेकिन स्वयं मांझी भी चुनाव हार गए। इसके बाद, बिहार विधानसभा चुनाव  आते ही, मांझी की तरफ से महागठबंधन में समन्वय समिति की मांग लगातार होने लगी। लेकिन, आरजेडी-कांग्रेस की तरफ से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा।

Tags: जीतन राम मांझीनीतीश कुमारबिहार विधानसभा चुनाव 2020राम विलास पासवान
Previous Post

जौनपुर खूनी संघर्ष : लापरवाही बरतने के आरोप में थानेदार समेत चार निलंबित

Next Post

केरल : राज्यसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी

Desk

Desk

Related Posts

Major cyber attack on CBSE re-evaluation website
Main Slider

CBSE पोर्टल पर बड़ा साइबर अटैक, री-इवैल्यूएशन वेबसाइट पर एक मिनट में आए 15 लाख हिट

02/06/2026
Twisha Case: Samarth and Giribala sent to 14-day judicial custody
Main Slider

Twisha Case: समर्थ और गिरिबाला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा, 10 सेकंड का झूठ पड़ा भारी

02/06/2026
Prateek Yadav's daughter got her father's tattoo made on her hand.
Main Slider

प्रतीक यादव की बेटी ने हाथ पर बनवाया खास टैटू! बोलीं— पापा हमेशा मेरे साथ

02/06/2026
Gyanesh Kumar
उत्तर प्रदेश

आगरा में सीईसी ज्ञानेश कुमार ने किए महादेव के दर्शन, बोले- शुद्ध मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की नींव

02/06/2026
CM Yogi
Main Slider

फाजिलनगर का नाम होगा पावागढ़, कुशीनगर में मुख्यमंत्री योगी का ऐलान

02/06/2026
Next Post
राज्यसभा उपचुनाव की अधिसूचना जारी

केरल : राज्यसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी

यह भी पढ़ें

drugs

घर में चल रही ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश, 90 करोड़ से अधिक का मादक पदार्थ बरामद

02/09/2021
JP Nadda

हरिद्वार पहुंचे नड्डा, संतों ने त्रिशुल भेंटकर दिया विजयश्री का आशीर्वाद

05/04/2024
IIM Mumbai

देश को मिला एक और IIM, जानें कब से शुरू होगा एडमिशन

14/08/2023
Facebook Twitter Youtube

© 2022 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    • हरियाणा
    • राजस्थान
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2022 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version