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पीएम मोदी बोले- मार्कशीट से न हो छात्रों का मूल्यांकन, दिया ये मंत्र

Desk by Desk
11/09/2020
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय, शिक्षा
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पीएम मोदी PM Modi

2.5 लाख पंचायतों तक फाइबर पहुंचाने के लक्ष्य को गांव-गांव तक पहुंचाना हैजरूरी

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नई दिल्ली। देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद अब पूरा जोर इसके अमल को लेकर है। इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21वीं सदी में स्कूली शिक्षा के विषय पर देशभर के शिक्षकों को वर्चुअल संबोधित किया।

छात्रों के लिए मार्कशीट ‘प्रेशर शीट’ और परिवारों के लिए ‘प्रेस्टीज शीट’ बन गई

इस दौरान पीएम ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति नए भारत की, नई उम्मीदों की, नई आवश्यकताओं की पूर्ति का माध्यम है। इसके पीछे पिछले 4-5 वर्षों की कड़ी मेहनत है। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए मार्कशीट ‘प्रेशर शीट’ और परिवारों के लिए ‘प्रेस्टीज शीट’ बन गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य इस दबाव को दूर करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल और सभी जिम्मेदार लोगों तक इसे पहुंचाने के लिए ‘शिक्षा पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह पर्व आठ से 25 सितंबर तक चलेगा।

प्रधानमंत्री ने दिया 5C और 5 E का मंत्र 

पीएम ने इस दौरान पांच सी और पांच ई का मंत्र दिया। पांच C का मंत्र देते हुए पीएम ने कहा कि हमें अपने छात्रों को 21वीं सदी की स्किल्स के साथ आगे बढ़ाना है। 21वीं सदी के स्किल्स में Critical Thinking (गुण दोष में अंतर करने वाली सोच), Creativity (रचनात्मकता), Collaboration (सहयोग), Curiosity (जिज्ञासा) और Communication (संचार) शामिल है।

वहीं पांच ई का मंत्र देते हुए पीएम ने कहा कि हमें आसान और नए-नए तौर-तरीकों को बढ़ाना होगा। हमारे ये प्रयोग नये समय की शिक्षा का मूलमंत्र होने चाहिए। पीएम ने कहा कि 5 e में Engage, (प्रण करना), Explore, (खोज करना), Experience, (अनुभव करना), Express (प्रकट करना ) और Excel (श्रेष्ठ होना) शामिल है।

पीएम मोदी ने कहा कि 2022 में जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे। तब भारत का हर छात्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों में पढ़े ये हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। मैं सभी शिक्षकों, प्रशासकों, स्वयंसेवी संगठनों और अभिभावकों से आहृवान करता हूं कि वे इस मिशन में अपना सहयोग दें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस यात्रा के पथ-प्रदर्शक देश के शिक्षक हैं। पीएम मोदी ने कहा कि चाहे नए तरीके से लर्निंग हो, विद्यार्थी को इस नई यात्रा पर लेकर शिक्षक को ही जाना है। हवाई जहाज कितना ही एडवांस हो, उड़ाता पायलट ही है। इसलिए सभी शिक्षकों को भी कुछ नया सीखना है और कुछ पुराना भूलना भी है।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि पढ़ाई से मिल रहे इस तनाव से अपने बच्चों को बाहर निकालना राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य है। परीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि छात्रों पर इसका बेवजह दबाव न पड़े। कोशिश ये होनी चाहिए कि केवल एक परीक्षा से विद्यार्थियों को मूल्यांकन न किया जाए।

उन्होंने कहा कि सीख तो बच्चे तब भी रहे होते हैं। जब वह खेलते हैं, जब वह परिवार में बात कर रहे होते हैं। जब वह बाहर आपके साथ घूमने जाते हैं, लेकिन अक्सर माता-पिता भी बच्चों से ये नहीं पूछते कि क्या सीखा? वो भी यही पूछते हैं कि मार्क्स कितने आए? हर चीज यहीं आकर अटक जाती है।

पीएम ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों को कोई भी विषय चुनने की आजादी दी गई है। ये सबसे बड़े सुधार में से एक है। अब हमारे युवा को साइंस, आर्ट्स या कॉमर्स के किसी एक ब्रेकैट में ही फिट होने की जरूरत नहीं है। देश के छात्रों की प्रतिभा को अब पूरा मौका मिलेगा।

हमारी पहले की जो शिक्षा नीति रही है, उसने छात्रों को बहुत बांध कर रखा था। जो विद्यार्थी साइंस लेता है वो आर्ट्स या कॉमर्स नहीं पढ़ सकता था। आर्ट्स और कॉमर्स वालों के लिए मान लिया गया कि ये हिस्ट्री ज्योग्राफी और अकाउंट्स इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि ये साइंस नहीं पढ़ सकते।

उन्होंने कहा कि कितने ही प्रोफेशन हैं जिनके लिए गहन कौशल की जरूरत होती है, लेकिन हम उन्हें महत्व ही नहीं देते। अगर छात्र इन्हें देखेंगे तो एक तरह का भावनात्मक जुड़ाव होगा, उनका सम्मान करेंगे। हो सकता है बड़े होकर इनमें से कई बच्चे ऐसे ही उद्योगों से जुड़ें।

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पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के बारे में देश भर के शिक्षकों से सुझाव मांगे थे। एक सप्ताह के भीतर ही 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं। ये सुझाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति को और ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद करेंगे।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में हर क्षेत्र, हर विधा, हर भाषा के लोगों ने इस पर दिन रात काम किया है। लेकिन ये काम अभी पूरा नहीं हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ऐलान होने के बाद बहुत से लोगों के मन में कई सवाल आ रहे हैं। ये शिक्षा नीति क्या है? ये कैसे अलग है। इससे स्कूल और कॉलेजों में क्या बदलाव आएगा। हम सभी इस कार्यक्रम में इकट्ठा हुए हैं ताकि चर्चा कर सकें और आगे का रास्ता बना सकें।

पीएम मोदी ने कहा कि मुझे खुशी है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के इस अभियान में हमारे प्रधानाचार्य और शिक्षक पूरे उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। कुछ दिन पहले शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के शिक्षकों से उनके सुझाव मांगे थे। एक सप्ताह के भीतर ही 15 लाख से ज्यादा सुझाव मिले हैं।

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पिछले तीन दशकों में दुनिया का हर क्षेत्र बदल गया, हर व्यवस्था बदल गई। इन 3 दशकों में हमारे जीवन का शायद ही कोई पक्ष हो जो पहले जैसा हो। लेकिन वो मार्ग, जिस पर चलते हुए समाज भविष्य की तरफ बढ़ता है, हमारी शिक्षा व्यवस्था, वो अब भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही थी। आज हम सभी एक ऐसे क्षण का हिस्सा बन रहे हैं, जो हमारे देश के भविष्य निर्माण की नींव डाल रहा है, जिसमें नए युग के निर्माण के बीज पड़े हैं। नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत को नई दिशा देने वाली है।

बता दें कि पीएम मोदी इससे पहले सात सितंबर को भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्यपालों और राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित कर चुके हैं। इसमें उन्होंने शिक्षा नीति के अमल का पूरा रोडमैप दिया था। साथ ही कहा था कि इसे लागू करने को लेकर ज्यादा लचीला रुख अपनाया जाए। मोदी इससे पहले भी कई मौकों पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर अपनी बात रख चुके हैं। हालांकि, अब तक के आयोजनों में यह इसलिए भी अलग है, क्योंकि इनमें नीति लागू कराने वाली जमीनी टीम शामिल है।

 

 

 

 

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