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जन, जल और जमीन के जीवन के लिए प्राकृतिक खेती पर जोर

Writer D by Writer D
21/04/2025
in उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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Natural Farming

Natural Farming

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लखनऊ । मिट्टी में भारी धातुओं की लगातार बढ़ती मात्रा कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट है। एक वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 15 फीसदी खेती लायक जमीन भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुकी है। इसका सीधा प्रभाव करीब 1.4 अरब उन लोगों पर पड़ रहा है जिनका ऐसे क्षेत्रों में अधिक एक्पोजर है। स्ट्डी के मुताबिक ऐसे कई क्षेत्रों की मिट्टी में आर्सेनिक, कैडियम, कोबाल्ट, क्रोमियम, कॉपर, निकल, लेड जैसी खतरनाक धातुओं की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। यूनिवर्सिटी ऑफ यार्क के जीव वैज्ञानिकों के मुताबिक ये धातुएं भोजन, पानी और हवा के जरिए इंसानों, जानवरों और जलीय जीवों में भी पहुंच रही हैं। इससे लंबे समय में इनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

उल्लेखनीय है कि जमीन में भारी धातुओं के पहुंचने के सोर्सेज खनन, औद्योगिक उत्सर्जन,कचरे का अनियोजित निस्तारण के अलावा खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग भी है। खासकर फास्फेटिक उर्वरकों का। इसका एक मात्र हल है जैविक या प्राकृतिक खेती (Natural Farming) । ऐसी खेती जो विष रहित हो। पर्यावरण के अनुकूल हो। साथ ही अप्रत्याशित मौसम अधिक गर्मी, सूखा और जलजमाव और पानी के प्रति भी सहनशील। यही वजह है कि डबल इंजन की मोदी और योगी सरकार लगातार इस जैविक एवं प्राकृतिक खेती और मोटे अनाजों की खेती को प्रोत्साहन दे रही है। यह जन, जमीन और जल के अनुकूल है।

प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के लिए किसान सखियां करेंगी किसानों को जागरूक

बुंदेलखंड और गंगा के तटवर्ती इलाकों के बाद गंगा की सहयोगी नदियों के दोनों किनारों पर भी ऐसी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा। इस खेती के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए प्रति माह 5000 रूपये के मानदेय पर कृषि सखियों की नियुक्ति की जाएगी। इनको संबंधित जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के एक्सपर्ट प्रशिक्षण देंगे। प्राकृतिक खेती (Natural Farming) के लिए हर जिले में दो बायो इनपुट रिसर्च सेंटर (बी आरसी) भी खुलेंगे। सरकार की मंशा 282 ब्लाकों, 2144 ग्राम पंचायतों की करीब 2.5 लाख किसानों को इससे जोड़ने की है। खेती क्लस्टर में होगी। हर क्लस्टर 50 हेक्टेयर का होगा। सरकार इस योजना पर अगले दो वर्ष में करीब 2.50अरब रुपए खर्च करेगी।

बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती मिशन (Natural Farming Mission) को और गति देगी योगी सरकार

इसी तरह योगी सरकार बुंदेलखंड (झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट) में गो आधारित प्राकृतिक खेती (Natural Farming) मिशन चला रही है। किसान गोबर व गोमूत्र से ही खाद और कीटनाशक (जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत) जैसे मिश्रण बनाने के तरीके सिखा रहे हैं। किसान इसे बनाकर उनका खेत और फसल में प्रयोग करें, इसके लिए उनको प्रशिक्षित किया गया है। यह कार्यक्रम अभी जारी है। प्राकृतिक खेती मिशन के पहले और दूसरे चरण के लिए सरकार ने 13.16 करोड़ रुपए जारी भी किए हैं। अब तक 470 क्लस्टर गठित कर 21934 किसानों को इससे जोड़ा गया है। हर ग्राम पंचायत में 50 हेक्टेयर का एक क्लस्टर बनाया जा रहा है। किसानों को दो हेक्टेयर तक के लिए वित्तीय सहायता भी दी जा रही है। फार्मर्स फील्ड स्कूल के 2535 सत्र आयोजित किए गए हैं।

निराश्रित गोवंशों का सहारा बनेगी प्राकृतिक खेती (Natural Farming) 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गोवंश के प्रति जगजाहिर है। इसी नाते उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में ही गोतस्करी और अवैध बूचड़खानों पर पूरी सख्ती से रोक लगाई। साथ ही निराश्रित गोवंशों के लिए गो आश्रयों का भी बड़ी संख्या में निर्माण कराया। अब उनकी मंशा बतौर मॉडल इन्हीं गो आश्रयों के जरिए लोगों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने की है।

प्रदेश के 7700 गो आश्रयों में संरक्षित हैं 12.5 लाख गोवंश

इसी पहल के तहत अब तक प्रदेश में योगी सरकार 7700 से अधिक गो आश्रय बना चुकी है। इनमें करीब 12.5 लाख निराश्रित गोवंश रखे गए हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत करीब 1 लाख लाभार्थियों को 1.62 लाख निराश्रित गोवंश दिए गए हैं। योजना के तहत हर लाभार्थी को प्रति माह 1500 रुपये भी दिए जाते हैं। सीएम योगी की मंशा के अनुसार गो आश्रय केंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संबंधित विभाग कृषि विभाग से मिलकर सभी जगहों पर वहां की क्षमता के अनुसार वर्मी कंपोस्ट इकाई लगाएगा। गोबर और गोमूत्र को प्रसंस्कृत करने के लिए उचित तकनीक की जानकारी देने के बाबत इन केंद्रों और अन्य लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसमें चारे की उन्नत प्रजातियों के बेहतर उत्पादन उनको फोर्टीफाइड कर लंबे समय तक संरक्षित करने के बाबत भी प्रशिक्षत किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय चारा अनुसंधान केंद्र झांसी की मदद ली जाएगी।

पशुपालकों को गोवंश पालन के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही सरकार

पशुपालक गोवंश का पालन करें, इसके लिए सरकार उनको लगातार प्रोत्साहन दे रही है। 25 प्रजाति की देशी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने नायाब पहल की है। इसके लिए शुरू की जाने वाली “नंदनी कृषक समृद्धि योजना” के तहत बैंकों के लोन पर सरकार पशुपालकों को 50% सब्सिडी देगी। इसी क्रम में सरकार ने अमृत धारा योजना भी लागू की है। इसके तहत दो से 10 गाय पालने पर सरकार बैंकों के जरिये 10 लाख रुपये तक अनुदानित ऋण आसान शर्तों पर मुहैया कराएगी। योजना के तहत तीन लाख रुपये तक अनुदान के लिए किसी गारंटर की भी जरूरत नहीं होगी।

बजट में 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान

हाल ही प्रस्तुत बजट में सरकार ने छुट्टा गोवंश के संरक्षण के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। इसके पहले अनुपूरक बजट में भी इस बाबत 1001 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यही नहीं बड़े गो आश्रय केंद्र के निर्माण की लागत को बढ़ाकर 1.60 करोड़ रुपये कर दिया है। ऐसे 543 गो आश्रय केंद्रों के निर्माण की भी मंजूरी योगी सरकार ने दी है। मनरेगा के तहत भी पशुपालकों को सस्ते में कैटल शेड और गोबर गैस लगाने की सहूलियत दी जा रही।

स्वावलंबी बनने के साथ प्राकृतिक खेती के संबल बनेंगे गो आश्रय केंद्र

सरकार की मंशा है कि सभी गोआश्रय केंद्र अपने सह उत्पाद (गोबर, गोमूत्र) के जरिये स्वावलंबी बनें। साथ ही जन, जमीनकी सेहत के अनुकूल इकोफ्रेंडली प्राकृतिक खेती का आधार भी।

प्राकृतिक खेती (Natural Farming) की संभावनाएं

मालूम हो कि वैश्विक महामारी कोरोना के बाद पूरी दुनिया स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुई है। हर जगह स्थानीय और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) से पैदा ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ी है। ऐसे उत्पादों का निर्यात बढ़ने से अन्नदाता किसान खुशहाल होंगे। खास बात यह है कि प्राकृतिक खेती से जो भी सुधार होगा वह टिकाऊ (सस्टेनेबल), ठोस और स्थायी होगा। इन्हीं वजहों के नाते योगी सरकार छुट्टा गोवंश के संरक्षण का हर संभव प्रयास कर रही है। हाल ही में महाकुंभ के दौरान इस विषय पर पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय ने भी गहन चर्चा की। साथ ही इस बाबत रणनीति भी बनाईं।

Tags: natural farming
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