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माघ मेला कब है, जानें मुख्य स्नान तिथियां

Writer D by Writer D
18/12/2025
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
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magh mela

magh mela

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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हर साल आयोजित होने वाला ‘माघ मेला’ (Magh Mela 2026) धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है. इस साल भी, गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पावन संगम तट पर माघ मेला 2026 का आयोजन होने जा रहा है. इस पूरे महीने को ‘कल्पवास’ का महीना माना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु संगम किनारे झोपड़ियां बनाकर रहते हैं और कठोर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं.

यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इस दिन संगम में आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं. पंचांग के अनुसार, माघ मास के प्रमुख स्नान पर्वों में से एक है माघ पूर्णिमा, जिसे ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार ‘अक्षय योग’ का विशेष पुण्यकाल प्राप्त होने वाला है. आइए जानते हैं माघ पूर्णिमा की तिथियां और स्नान का महत्व.

माघ पूर्णिमा 2026: कब है स्नान का ‘अक्षय योग’?

माघ मास की पूर्णिमा तिथि को बहुत ही पवित्र माना गया है. मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, यानी वह पुण्य कभी नष्ट नहीं होता. पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान 1 फरवरी, 2026 को होगा. इस दिन दान, स्नान और ध्यान का श्रेष्ठ संयोग बनता है. धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा के दिन देवतागण पृथ्वी पर आते हैं और संगम में स्नान करते हैं. इस दिन गंगाजल से भरा पात्र दान करना भी बेहद शुभ फलदायी माना गया है.

माघ मेला (Magh Mela) 2026, कब से कब तक?

माघ मेला (Magh Mela) 2026 की शुरुआत पौष पूर्णिमा के पवित्र स्नान के साथ होगी और इसका समापन महाशिवरात्रि के दिन होता है. यह पूरा समय कल्पवास के लिए समर्पित है.

माघ मेला 2026 की शुरुआत: 3 जनवरी, 2026 से.
समापन: 15 फरवरी, 2026 को महाशिवरात्रि के साथ.
पहला पवित्र स्नान: पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी की शाम 6.54 बजे शुरू होकर 3 जनवरी की दोपहर 3.32 बजे तक रहेगी. मेला का पहला पवित्र स्नान 3 जनवरी, रविवार को होगा. इसी दिन हजारों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर माघ मेला की धार्मिक शुरुआत करेंगे.

माघ मेला (Magh Mela) की मुख्य स्नान तिथियां (2026)

यह मेला इस दौरान प्रयागराज को पूरी तरह से आध्यात्मिक रंग में रंग देता है और संगम तट पर हर दिन धार्मिक आयोजन होते हैं, जिससे महाकुंभ वाली छंटा देखने को मिलती है. इन तिथियों पर डुबकी लगाना विशेष फलदायी माना गया है.

3 जनवरी पौष पूर्णिमा इस दिन डुबकी लगाने के साथ ही एक महीने के कल्पवास और माघ मेला का शुभारंभ होता है.
15 जनवरी मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने पर इस दिन डुबकी का विशेष महत्व है. इसे देवताओं का दिन भी कहते हैं.
18 जनवरी मौनी अमावस्या इसे सबसे महत्वपूर्ण स्नान तिथि माना जाता है. यह पापों के नाश और मौन साधना का दिन होता है.
23 जनवरी बसंत पंचमी इस दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. यह कला, संगीत और ज्ञान का आरंभिक दिन है.
1 फरवरी माघी पूर्णिमा दान और स्नान का श्रेष्ठ दिन, जो बहुत ही पवित्र माना जाता है. इसी दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है.
15 फरवरी महाशिवरात्रि शिव आराधना और पवित्र स्नान के साथ इस भव्य मेला का विधिवत समापन होता है.

कल्पवास का महत्व

माघ मेला को ‘कल्पवास’ के नाम से भी जाना जाता है. जो श्रद्धालु इस पूरे एक महीने तक संगम तट पर रहते हैं, उन्हें कल्पवासी कहा जाता है. कल्पवास करने वाले लोग एक माह तक जमीन पर सोते हैं, एक समय भोजन करते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहते हैं. ऐसी मान्यता है कि कल्पवास करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल सकती है और वह मोक्ष को प्राप्त करता है.

Tags: Magh Mela
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