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यूसीसी की घोषणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक गौरव की अनुभूति – सीएम धामी

Writer D by Writer D
27/01/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राजनीति, राष्ट्रीय
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CM Dhami

CM Dhami

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने समान नागरिक संहिता को तैयार करने वाले कमेटी के सदस्यों, कुशल क्रियान्वयन करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा, इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित हो सकी। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। भगवान कृष्ण ने भी गीता में “समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रियः” का उपदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूँ, न किसी का शत्रु हूँ और न ही किसी के प्रति पक्षपात करता हूँ। सनातन संस्कृति की यही महानता है, जिसने सदियों से दुनिया को समानता, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाया है।

सच किया संविधान निर्माताओं का संकल्प

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने ‘‘समान नागरिक संहिता’’ को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में सम्मिलित किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का संकल्प लिया। देवभूमि की जनता ने भी इस “देवकार्य” के लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद प्रदान किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने दुबारा सत्ता संभालते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने के लिए कार्य प्रारंभ किया। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता विधेयक को राज्य विधानसभा में पारित कर राष्ट्रपति महोदया को भेजा गया, जिसे 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। इसके बाद सभी आवश्यक नियमावली एवं प्रक्रियाओं को पूर्ण करते हुए, राज्य सरकार ने 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को विधिवत रूप से लागू कर दिया।

महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत

मुख्यमंत्री धामी (CM Dhami) ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई थी। यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं बल्कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया, जबकि दुनिया के सभी विकसित और सभ्य देशों सहित प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।

समानता से समरसता का प्रयास

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है बल्कि समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में “समानता से समरसता’’ स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। साथ ही संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं। संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की संपत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों एवं माता-पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, यह जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्मे बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।

सिर्फ घोषणा नहीं, सफल क्रियान्वयन भी किया

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि यह उनके लिए निजी तौर पर अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में राज्य सरकार ने यूसीसी के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं की पहुँच को और अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया है। जहां यूसीसी लागू होने से पहले राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण हुआ करते थे, वह संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण किया जा चुका है। राज्य में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था तथा 7,500 से अधिक सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से शासन को वास्तव में सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा दिया गया है।

विवाह में धोखाधड़ी पर सख्ती का प्रावधान

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित विधेयक पारित किया था, जिसे एक दिन पहले ही राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके अंतर्गत विवाह के समय अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही विवाह एवं लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

देश को जोड़ते हैं मजबूत फैसले

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने जनसंघ की स्थापना के समय से ही कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया था, जो अब सिद्धि बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह सिद्ध हुआ है कि मजबूत फैसले देश को तोड़ते नहीं, बल्कि जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर यूसीसी को लेकर भ्रांतियाँ फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर कभी मूल निवासी तो कभी लिव-इन पंजीकरण को लेकर भ्रम फैलाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति राज्य का ‘मूल निवासी’ नहीं बन सकता। इसी प्रकार लिव-इन पंजीकरण का प्रावधान बहनों-बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार मां गंगा देवभूमि उत्तराखंड से निकलकर पूरे भारत को अभिसिंचित करती है, उसी प्रकार उत्तराखंड से निकलने वाली “समान नागरिक संहिता” की धारा भी देश के अन्य राज्यों को प्रेरित करेगी।

बहुविवाह पर होगी सख्ती

मुख्यमंत्री (CM Dhami) ने कहा कि हाल के दिनों में बहुविवाह और विवाह विच्छेद से संबंधित कुछ मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों में अलग से प्रावधान करते हुए सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका के एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच का जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन यदि धर्मांतरण और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ बोलना हेट स्पीच है, तो फिर यह उन्हें स्वीकार है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, बृज भूषण गैरोला, सचिव गृह शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, यूसीसी समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, मनु गौड़, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

Tags: cm dhami
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