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कोई भी शोध विकास के लिए किया जाता है, उसके पीछे लोक कल्याण की भावना निहित : योगी आदित्यनाथ

Writer D by Writer D
13/06/2026
in उत्तर प्रदेश, राजनीति, वाराणसी
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने कहा कि कोई भी शोध विकास के लिए किया जाता है। उसके पीछे लोक कल्याण की भावना निहित होती है। अंततः उसका उद्देश्य राष्ट्र को मजबूत और सशक्त बनाने का होता है। दो दिवसीय वाराणसी दौरे के अन्तिम दिन शनिवार को मुख्यमंत्री यहां काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और वैदिक विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री याेगी (CM Yogi) ने अधिवेशन का दीप प्रज्ज्वलन कर उद्घाटन के बाद विज्ञान भारती की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह काशी हिंदू विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना के पीछे का उद्देश्य ही ज्ञान- विज्ञान के ऐसी धारा के रूप में काशी को उसकी पहचान दिलाना है, जिसके लिए हमारी काशी जानी जाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम विज्ञान की बात करते हैं, तो उसके परिणामों और प्रभावों की भी जानकारी होनी चाहिए। आधुनिक विज्ञान का इतिहास करीब 400-500 साल पुराना है। जिन देशों ने विज्ञान और तकनीक पर अपना प्रभुत्व स्थापित किया, दुनिया में उनका वर्चस्व भी कायम हो गया।

उन्होंने (CM Yogi) कहा कि ज्ञान जहां से भी मिले, उसका स्वागत होना चाहिए। लेकिन केवल उसे अपनाना ही पर्याप्त नहीं है। उसके मूल भाव और उद्देश्य को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया में प्रतिस्पर्धा और संघर्ष इसी बात को लेकर है। जब हम भारत की चर्चा करते हैं, तो उसकी प्रगति और विकास की बात भी सामने आती है। यदि हम 2000 साल पहले से लेकर 15वीं-16वीं शताब्दी तक के भारत के वैभव को देखें, तो पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी थी। करीब 400 साल पहले, जब देश विदेशी आक्रांताओं के कठिन दौर से गुजर रहा था, तब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 24-25 फीसदी थी। 1947 में आजादी के समय यह घटकर महज 1.5 से 2 फीसदी रह गई थी।

दो हजार साल पहले भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी हिस्सेदारी क्यों थी ? इसका कारण यह था कि भारत नवाचार करता था। किसान अपने खेतों में नए प्रयोग करते थे। प्राकृतिक तरीकों से भूमि की उर्वरता बनाए रखने पर काम करते थे। कृषि हमारे लिए केवल आजीविका का साधन नहीं थी, बल्कि आरोग्यता का माध्यम भी थी। यह देश और समाज को जोड़ने का काम भी करती थी। आज हमने अन्नदाता किसान को उर्वरकों पर निर्भर होने के लिए मजबूर कर दिया है। उसे यह विश्वास दिला दिया गया कि रासायनिक खाद के बिना खेती संभव नहीं है। हम यह भूल गए कि हमारी कृषि व्यवस्था में पशुपालन भी अभिन्न हिस्सा था।

इसके पहले मुख्यमंत्री (CM Yogi) का स्वागत बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी ने अंगवस्त्र पहनाकर किया। उल्लेखनीय है कि अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं राष्ट्रीय विकास पर विचार-विमर्श होगा। दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश से लगभग 1200 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें विज्ञान भारती के सदस्य, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं। अधिवेशन में देश के प्रमुख संस्थानों एवं सरकारी संगठनों से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ता एवं विचारक अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। वन हेल्थ विषयक सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. बी. एन. गंगाधर करेंगे, जिसमें शिक्षण, स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थानों से जुड़े विशिष्ट विशेषज्ञ भाग लेंगे।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा के अनुसार अधिवेशन का उद्देश्य समसामयिक वैज्ञानिक एवं सामाजिक चुनौतियों पर सार्थक विमर्श करते हुए वैज्ञानिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए एक कार्ययोजना तैयार करना है। इस वर्ष के अधिवेशन में वन हेल्थ, विकसित भारत हेतु नेट ज़ीरो तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता जैसे राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विशेष चर्चा की जाएगी। विकसित भारत के लिए नेट ज़ीरो विषयक सत्र का नेतृत्व मध्य प्रदेश शासन के ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव करेंगे। इस सत्र में सतत विकास एवं ऊर्जा संक्रमण से जुड़े विभिन्न आयामों पर चर्चा होगी। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर व अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

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