देहरादून। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उत्तराखंड सरकार ने बुनकरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान एवं सामाजिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने घोषणा की कि 60 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों, जो शारीरिक रूप से कार्य करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए पेंशन योजना शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस संबंध में शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद (UHHDC) तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, बुनकरों और हस्तशिल्पियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हथकरघा उद्योग उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प के संरक्षण, बुनकरों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। साथ ही युवाओं से इस क्षेत्र में जुड़कर स्वरोजगार के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान भी किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड का हथकरघा उद्योग राज्य की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक, बेहतर डिज़ाइन, कौशल विकास प्रशिक्षण और विपणन सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
भरत सिंह चौधरी ने कहा कि प्रदेश के अनेक वरिष्ठ हस्तशिल्पियों और बुनकरों ने जीवनभर अपनी कला और मेहनत से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा है। ऐसे कारीगरों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हजारों बुनकर एवं हस्तशिल्पी परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने परिषद की ओर से आयोजित हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों से स्वयं खादी के वस्त्र खरीदकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा दिया और प्रदेशवासियों से खादी एवं स्थानीय उत्पादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से बुनकरों और कारीगरों की आय बढ़ेगी तथा उत्तराखंड की पारंपरिक कला और शिल्प को नई पहचान मिलेगी।
कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, राज्य मंत्री वीरेंद्र दत्त सेमवाल, राज्य मंत्री गोविंद सिंह, सचिव विनय शंकर पांडे, उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के अधिकारी, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी, बुनकर, हस्तशिल्पी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।








