IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने छात्रों को नई जिम्मेदारियों और बदलती दुनिया के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में तकनीक और वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदलेंगी, ऐसे में छात्रों के लिए लगातार सीखते रहना सबसे बड़ी ताकत होगी।
‘मैं बाबा बागेश्वर नहीं, लेकिन कुछ तो चलता होगा’
पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत छात्रों से हल्के-फुल्के संवाद के साथ की। उन्होंने कहा कि आज सभी छात्र दीक्षांत समारोह में मौजूद हैं, लेकिन उनके मन में भविष्य को लेकर कुछ न कुछ जरूर चल रहा होगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा।”
उन्होंने कहा कि किसी के मन में पहली नौकरी और पहली सैलरी का सपना होगा, कोई स्टार्टअप शुरू करना चाहता होगा और कुछ छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में सोच रहे होंगे। हर व्यक्ति की मंजिल अलग है, लेकिन आज सभी एक जैसी खुशी और उत्साह महसूस कर रहे हैं।
एक नए अध्याय की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने छात्रों को उनके IIT दिल्ली के पहले दिन की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता होगा जैसे कल ही ओरिएंटेशन हुआ था, लेकिन देखते ही देखते दीक्षांत समारोह आ गया।
पीएम मोदी ने कहा कि आज से छात्रों के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। उन्होंने उन्हें कॉलेज से मिली सीख, अनुभव और रिश्तों को आगे भी साथ लेकर चलने की सलाह दी।
20-30 साल बाद कैसी होगी दुनिया?
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और टेक्नोलॉजी इस बदलाव की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। आज यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि अगले 20-30 वर्षों में दुनिया किस रूप में होगी।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि भविष्य में नई तकनीकें आएंगी, रोजगार के स्वरूप बदलेंगे और नए अवसर पैदा होंगे। ऐसे में खुद को लगातार अपडेट करना जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा कि बदलती दुनिया में वही आगे बढ़ेगा, जो सीखना नहीं छोड़ेगा।
छात्राओं की उपलब्धियों पर भी पीएम ने उठाया सवाल
पीएम मोदी ने मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने कहा कि मेडल पाने वाले छात्रों में अगर कुछ और लड़कियां होतीं तो उन्हें और खुशी होती। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक या दो छात्राएं क्यों, उपलब्धि हासिल करने वाली छात्राओं की संख्या और अधिक होनी चाहिए।
‘आपके अगले 30-35 साल देश की दिशा तय करेंगे’
पीएम मोदी ने आजादी के दौर की पीढ़ी के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि हर पीढ़ी की अपनी जिम्मेदारी होती है। स्वतंत्रता से पहले लोगों के सामने देश को आजाद कराने का लक्ष्य था और उन्होंने त्याग तथा बलिदान के साथ उस जिम्मेदारी को निभाया।
उन्होंने छात्रों से कहा कि अब विकसित भारत के निर्माण की जिम्मेदारी उनकी पीढ़ी के कंधों पर है। अगले 30-35 वर्षों में वे जो भी काम करेंगे, उसका असर देश की विकास यात्रा पर पड़ेगा।
पीएम मोदी ने छात्रों से अपील की कि वे अपने हर बड़े फैसले में यह जरूर सोचें कि उससे देश को क्या फायदा होगा और भारत की कौन सी जरूरत पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी को जोड़ना ही उनकी पीढ़ी की सबसे बड़ी भूमिका होगी।









