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उत्तराखंड में सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती को मिलेगा बढ़ावा, क्लस्टर आधारित उत्पादन पर जोर

Writer D by Writer D
11/08/2026
in उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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Anand Bardhan

Anand Bardhan

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देहरादून। उत्तराखंड में सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट समेत अन्य फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए फलोत्पादन का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट आदि के उत्पादन से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में सभी जिलों के जिलाधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारी जुड़े।

किसानों से फीडबैक लेकर योजनाओं में सुधार के निर्देश

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से उनके जिलों में वर्तमान में उगाई जा रही फसलों और उत्पादन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों से नियमित फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं और सुझावों को शासन के साथ साझा किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी स्तर पर सुधार की आवश्यकता है तो जिलाधिकारी इसके संबंध में लिखित सुझाव उपलब्ध करा सकते हैं, ताकि योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को मिशन की निर्धारित अवधि के लिए उत्पादन क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने के स्पष्ट लक्ष्य तय करने का सुझाव दिया, ताकि योजनाओं को अधिक केंद्रित तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका और उपयोग को भी बढ़ाने पर जोर दिया।

फलोत्पादन के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर

आनंद बर्द्धन ने कहा कि प्रदेश में फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करना होगा। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज चेन, परिवहन, रोपवे सुविधा, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

उन्होंने जिलाधिकारियों को फलोत्पादन से संबंधित परियोजनाओं में परिवहन, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी शामिल करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को उत्पादन के बाद बाजार तक पहुंचने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में सुविधा हो।

सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट के लिए क्लस्टर आधारित खेती

मुख्य सचिव ने सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने सेब और कीवी की सघन खेती के लिए नई एवं गुणवत्तापूर्ण किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जनपद विशेष की परिस्थितियों और संभावनाओं के अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएं। नए क्षेत्रों को फलोत्पादन से जोड़ा जाए और क्षेत्र विस्तार पर ध्यान दिया जाए। इसके लिए हाई डेंसिटी वैरायटी की अत्याधुनिक नर्सरियों को विकसित करने की दिशा में भी काम करने को कहा गया।

पुराने कम उत्पादक क्षेत्रों में नई हाई डेंसिटी फसलें

मुख्य सचिव ने कम उत्पादकता वाले पुराने फलोत्पादन क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से हाई डेंसिटी की नई फसलों से रिप्लेस करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नए विकसित क्षेत्रों में फलोत्पादन शुरू होने तक किसानों की आय प्रभावित न हो, इसके लिए इंटरक्रॉपिंग को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

पॉलीहाउस योजना में किसानों की हैंड होल्डिंग के निर्देश

बैठक में पॉलीहाउस स्थापना की योजना की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने बताया कि प्रत्येक जनपद के लिए तीन-तीन वेंडर्स को एंपैनल्ड किया गया है। उन्होंने किसानों को योजना का अधिक से अधिक लाभ दिलाने के लिए उनकी प्रभावी हैंड होल्डिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों को तकनीकी जानकारी, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने पर वास्तविक परिणाम हासिल किए जाएं।

उन्होंने जिलाधिकारियों से स्थानीय परिस्थितियों, किसानों के फीडबैक और जिले की कृषि क्षमता के आधार पर योजनाओं को लागू करने तथा नए क्षेत्रों में फलोत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन. पांडेय, राजेंद्र कुमार, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत सहित जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

Tags: Uttarakhand News
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