प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने गुरुवार को भारत के ओलंपिक अभियान को लेकर बड़ा विजन सामने रखा। ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में खिलाड़ियों, छात्रों और स्वयंसेवकों को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर भारत को ओलंपिक में अपना पदक प्रदर्शन बेहतर करना है तो उन खेलों में भी भागीदारी बढ़ानी होगी, जिनमें देश अभी तक हिस्सा नहीं लेता रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों को केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं किया जा सकता। खेल देश की युवा शक्ति को दिशा देने और विकसित भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
‘कड़वी सच्चाई’ पर पीएम मोदी ने दिलाया ध्यान
मोदी ने कहा कि ओलंपिक में कई ऐसे खेल हैं, जिनमें भारतीय खिलाड़ी और टीमें हिस्सा ही नहीं लेते। उन्होंने इसे देश के खेल प्रदर्शन की एक बड़ी कमजोरी और ‘कड़वी सच्चाई’ बताया।
2024 पेरिस ओलंपिक का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 32 खेलों में से केवल 16 में हिस्सा लिया था। ऐसे में जिन खेलों में भारत मैदान में ही नहीं उतरता, उनमें पदक जीतने की संभावना भी नहीं बनती।
कम उम्र में प्रतिभाओं की तलाश पर जोर
प्रधानमंत्री ने बताया कि 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी टैलेंट हंट का ऐलान किया था। इसका उद्देश्य कम उम्र में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अवसर देना है।
उन्होंने कहा कि सरकार की खेल नीति सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य भारत की खेल शक्ति और युवा शक्ति को साथ लेकर विकसित भारत की नींव मजबूत करना है।







