देहरादून। उत्तराखंड में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और प्रदेश को दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने प्रयास तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में भारत सरकार की दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से संबंधित परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में दलहन उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश में उत्पादित दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नैफेड और एनसीडीसी के माध्यम से खरीद किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा जाए और इसके लिए आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ ही सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
एफपीओ को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सेल बनाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सेल गठित करने और इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि संगठित किसान समूहों के माध्यम से दलहन के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने दलहन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता को बढ़ाकर 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा। इसके लिए उन्नत बीज, बेहतर कृषि तकनीक, फसल प्रदर्शन और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगी परियोजना
बैठक में कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार की यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित की जाएगी। परियोजना के तहत उत्तराखंड के लिए कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। इसमें उड़द, अरहर और मसूर को प्रमुख फसलों के रूप में चयनित किया गया है।
परियोजना के अंतर्गत दलहन की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार के साथ बीज उत्पादन तथा फसल प्रदर्शन आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज और उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश में दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर विकसित हो सकें।
मुख्य सचिव ने कहा कि दलहन उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि से प्रदेश में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को भारत सरकार की परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और इसके लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी संभावित प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान आनंद श्रीवास्तव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।









