लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 10 और उत्तराखंड में एक राज्यसभा सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका है। सभी 11 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा। उत्तर प्रदेश में चुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य विधानसभा चुनाव भी नजदीक हैं, ऐसे में राज्यसभा की इन सीटों पर होने वाली चुनावी प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
चुनावी कार्यक्रम के अनुसार, 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
कई बड़े नामों का कार्यकाल खत्म
यूपी से जिन 10 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा हो रहा है, उनमें हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, सीमा, रामजी गौतम और रामगोपाल यादव शामिल हैं।
उत्तराखंड से भाजपा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। ऐसे में दोनों राज्यों में नए उम्मीदवारों के चयन को लेकर दलों के भीतर मंथन शुरू होना स्वाभाविक है।
करीब 37 वोट पर एक सीट का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय 397 विधायक हैं। मौजूदा संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 वोट की जरूरत होगी। भाजपा के पास विधानसभा में बड़ा बहुमत है, इसलिए उसके पास कई सीटों पर दावा पेश करने के लिए पर्याप्त संख्या बल है।
हालांकि, सीटों का वास्तविक बंटवारा उम्मीदवारों के नाम, सहयोगी दलों के समर्थन और मतदान के समय उपलब्ध संख्या बल पर निर्भर करेगा।
बसपा के लिए राज्यसभा में मुश्किल दौर
बसपा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही पार्टी के राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़ा होगा। विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं होने के कारण मौजूदा संख्या बल के आधार पर पार्टी के लिए इस चुनाव में सीट हासिल करना कठिन होगा।
राज्यसभा चुनाव के बाद उच्च सदन में उत्तर प्रदेश से दलों की संख्या में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसलिए अक्टूबर में होने वाली वोटिंग से पहले उम्मीदवारों के चयन और राजनीतिक समीकरण पर सबकी नजर रहेगी।









