गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म भारत की मूल पहचान का हिस्सा है और भारत को समझने के लिए उसकी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। मुख्यमंत्री मंगलवार को श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ के सप्तम दिवस श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। संबोधन के बाद उन्होंने पूजन और आरती भी की।
‘भारत के पास थी सुसभ्य, सुसंस्कृत और समृद्ध परंपरा’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीयों की एक कमी यह रही कि उन्होंने स्वयं को विस्मृत कर दिया। उनके अनुसार, जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अंधकार में था, उस समय भारत के पास सुसभ्य, सुसंस्कृत और समृद्ध परंपरा मौजूद थी। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी दीर्घकालिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी रही है और इसे समझे बिना देश की व्यापक पहचान को समझना कठिन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कई राज्यों में भीषण आपदा के कारण जनजीवन प्रभावित होने के बावजूद गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन लगातार जारी रहा। श्रद्धालुओं का आगमन भी नहीं रुका। उन्होंने इसे भारत की आस्था और परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भागीदारी बनी रही।
सात दिनों तक कथा के साथ समसामयिक विषयों पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कथा व्यास मलूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र देवाचार्य का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सात दिनों तक कथा के साथ-साथ समसामयिक और ज्वलंत विषयों पर आयोजित गोष्ठियों में भी स्वामी राजेंद्र देवाचार्य ने मार्गदर्शन दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन संदेशों का महत्व व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के संदर्भ में भी है।
यह आयोजन ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पावन स्मृति में गोरखनाथ पीठ पर आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े यजमानों, श्रद्धालुओं और अन्य लोगों को बधाई दी।
गौ संरक्षण में समाज की भागीदारी पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में गौ संरक्षण को लेकर समाज की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में गौ माता का विशेष स्थान है। उन्होंने भारतीय परंपरा में भोजन से पहले गौ माता के लिए ग्रास निकालने और अंतिम ग्रास श्वान के लिए निकालने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परंपराओं का पालन होने पर निराश्रित गोवंश और आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्याएं कम हो सकती थीं।
मुख्यमंत्री ने भारतीय नस्ल के गोवंश के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गोआश्रय स्थलों में 16 लाख से अधिक गोवंश का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपने घर पर निराश्रित गोवंश का पालन करता है तो सरकार की ओर से प्रति गोवंश 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि चार गोवंश रखने पर यह सहायता राशि 6,000 रुपये प्रतिमाह हो सकती है। इसी तरह, हालिया सार्वजनिक बयानों में भी मुख्यमंत्री की ओर से 7,700 से अधिक गोआश्रय स्थलों और 16 लाख से अधिक गोवंश के संरक्षण का आंकड़ा बताया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कुपोषित बच्चे वाले परिवार को गोआश्रय स्थल से ब्याही गाय उपलब्ध कराने के साथ उसके पालन के लिए भी प्रतिमाह 1,500 रुपये देने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर में गाय रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है, वे गोशाला में गाय गोद लेकर उसके संरक्षण में सहयोग कर सकते हैं।
प्राकृतिक और गौ आधारित खेती अपनाने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को प्राकृतिक और गौ आधारित खेती से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने रासायनिक खाद, केमिकल और पेस्टिसाइड के अत्यधिक इस्तेमाल को खाद्यान्न के प्रदूषण से जोड़ते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने भारतीय गोवंश के गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गोवंश संरक्षण के लिए सख्त कानून बनाया है, लेकिन केवल सरकारी व्यवस्था से यह जिम्मेदारी पूरी नहीं हो सकती। दूध लेने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने वाले लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी है। उनके मुताबिक, गोवंश संरक्षण को केवल सरकारी योजना या व्यवस्था के रूप में देखने के बजाय सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी लिया जाना चाहिए।
गरीबों के इलाज पर खर्च का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य से जुड़े खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि रासायनिक खाद और अन्य रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण खाद्यान्न के प्रदूषण की समस्या पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष से एक वर्ष में गरीबों के उपचार के लिए 1,400 करोड़ रुपये देने पड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि आयुष्मान कार्ड पर खर्च होने वाली राशि से अलग है।
मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और भारतीय गोवंश आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।
महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में आयोजित हुई कथा
गोरखनाथ मंदिर में आयोजित यह श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति को समर्पित रहा। सात दिनों तक चले आयोजन के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया और इसके बाद विधिवत पूजन एवं आरती की।
कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानंदाचार्य डॉ. रामकमल देवाचार्य, बाबा मस्तनाथ पीठ रोहतक के महंत बालकनाथ समेत अन्य संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।








