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करवा चौथ में चांद का इतना महत्व क्यों? जानें सूर्यदेव की पूजा न करने का कारण

Desk by Desk
27/10/2026
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
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करवा चौथ के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाएं रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस व्रत में सूर्यदेव की बजाय सिर्फ चंद्रमा की ही पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे जुड़ी पौराणिक मान्यता क्या है।

पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है निर्जला व्रत

कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ मनाया जाता है। इस वर्ष 29 अक्टूबर, गुरुवार को यह पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। चंद्र देव के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता और गणेशजी की विशेष पूजा की जाती है।

चंद्रमा को माना जाता है मन और शीतलता का कारक

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा मन, शांति, शीतलता और प्रेम का कारक है। इसलिए करवा चौथ पर महिलाएं चंद्र देव को अर्घ्य देकर वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और स्थिरता की कामना करती हैं। चंद्रमा को शाश्वत चक्र और पुनर्जन्म से भी जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे ‘अखंड सौभाग्य’ का प्रतीक माना जाता है।

रोहिणी नक्षत्र से भी जुड़ा है चंद्रमा का महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में रोहिणी को सबसे अधिक प्रेम करते थे। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बनने की मान्यता है, जिससे इस दिन चंद्र पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं में चंद्र देव की पूजा से पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

सूर्य की जगह चंद्रमा की पूजा क्यों?

परंपराओं में सूर्य देव को तेजस्वी और उग्र स्वरूप वाला माना जाता है, जबकि चंद्रमा शीतल और शांत प्रकृति के प्रतीक हैं। मान्यता है कि चंद्रमा की शीतल किरणें दांपत्य जीवन से तनाव और कलह दूर करने, प्रेम बढ़ाने और जीवन में स्थिरता लाने का प्रतीक हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में योगेश्वर श्रीकृष्ण के रहने पर द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
इसलिए पड़ा पर्व का नाम करवा चौथ

‘करवा’ का अर्थ मिट्टी का छोटा पात्र और ‘चौथ’ का अर्थ चतुर्थी तिथि होता है। इस दिन करवे में जल भरकर चंद्र देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसी वजह से इस पर्व को करवा चौथ कहा जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 2026 में करवा चौथ की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं गणेशजी, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करेंगी। पूजा के समय करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की परंपरा है।

सूर्योदय से पहले करें सरगी

29 अक्टूबर को सूर्योदय लगभग सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होने की संभावना है। ऐसे में सरगी सूर्योदय से पहले खाने की परंपरा है। कई परिवारों में इसे सुबह 3:30 से 5:30 बजे के बीच खाया जाता है। हालांकि, सरगी का समय और उसमें शामिल खाद्य सामग्री परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

रात 8:17 बजे चंद्रोदय का अनुमान

पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को चंद्रोदय का अनुमानित समय रात 8 बजकर 17 मिनट बताया गया है। हालांकि, वास्तविक चंद्रोदय का समय शहर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। चंद्रमा के दर्शन के बाद महिलाएं उन्हें अर्घ्य देती हैं और पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है।

Tags: Karwa ChauthKarwa Chauth 2026
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