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‘पारिवारिक एकता दिवस’ के रूप में मनाएं ‘वैलेन्टाइन दिवस’

Desk by Desk
05/02/2021
in Main Slider, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
0
वैलेन्टाइन दिवस Valentine's Day

वैलेन्टाइन दिवस

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डॉ. जगदीश गांधी

 

 ‘वैलेन्टाइन दिवस’ के वास्तविक, पवित्र एवं शुद्ध भावना को समझने की आवश्यकता

संसार को ‘परिवार बसाने’ एवं ‘पारिवारिक एकता’ का संदेश देने वाले महान संत वैलेन्टाइन के ‘मृत्यु दिवस’ को आज जिस ‘आधुनिक स्वरूप’ में भारतीय समाज में स्वागत किया जा रहा है, उससे हमारी भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता प्रभावित हो रही है। संत वैलेन्टाइन ने तो युवा सैनिकों को विवाह करके परिवार बसाने एवं पारिवारिक एकता की प्रेरणा दी थी। इस कारण अविवाहित युवा पीढ़ी का अपने प्रेम का इजहार करने का ‘वैलेन्टाइन डे’ से कोई लेना-देना ही नहीं है। आज वैलेन्टाइन डे के नाम पर समाज पर बढ़ती हुई अनैतिकता ने हमारे समक्ष काफी असमंज्स्य तथा सामाजिक पतन की स्थिति पैदा कर रखी है। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण आज लड़कियों तथा महिलाओं के विरूद्ध अपराध, छेड़छाड़, अश्लीलता, बलात्कार, हत्या आदि जैसी जघन्य घटनायें लगातार बढ़ती ही जा रहीं हैं।

विवाह के पवित्र बन्धन को ‘वैलेन्टाइन दिवस’ पूरी तरह से स्वीकारता  व देता है मान्यता

‘वैलेन्टाइन डे’ का दिन हमें सन्देश देता है कि अविवाहित स्त्री-पुरूष के बीच किसी प्रकार का अनैतिक संबंध नहीं होना चाहिए। विवाह के पवित्र बन्धन को ‘वैलेन्टाइन डे’ पूरी तरह से स्वीकारता एवं मान्यता देता है। आज महान संत वैलेन्टाइन की मूल, पवित्र एवं शुद्ध भावना को भुला दिए जाने के कारण यह महान दिवस मात्र युवक-युवतियों के बीच रोमांस के विकृत स्वरूप में देखने को मिल रहा है। वैलेन्टाइन डे को मनाने के पीछे की जो कहानी प्रचलित है उसके अनुसार रोमन शासक क्लाडियस (द्वितीय) किसी भी तरह अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए वह संसार की सबसे ताकतवर सेना को बनाने के लिए जी-जान से जुटा था। राजा के मन में स्वार्थपूर्ण विचार आया कि विवाहित व्यक्ति अच्छे सैनिक नहीं बन सकते हैं। इस स्वार्थपूर्ण विचार के आधार पर राजा ने तुरन्त राजाज्ञा जारी करके अपने राज्य के सैनिकों के शादी करने पर पाबंदी लगा दी।

महान संत वैलेन्टाइन के प्रति सच्ची श्रद्धा प्रकट करने के लिए मनाया जाता था ‘वैलेन्टाइन दिवस’

रोम के एक चर्च के पादरी महान संत वैलेन्टाइन को सैनिकों के शादी करने पर पाबंदी लगाने संबंधी राजा का यह कानून ईश्वरीय इच्छा के विरुद्ध प्रतीत हुआ। कुछ समय बाद उन्होंने महसूस किया कि युवा सैनिक विवाह के अभाव में अपनी शारीरिक इच्छा की पूर्ति गलत ढंग से कर रहे हैं। सैनिकों को गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिए पादरी वैलेन्टाइन ने रात्रि में चर्च खोलकर सैनिकों को विवाह करने के लिए प्रेरित किया। सम्राट को जब यह पता चला तो उसने पादरी वैलेन्टाइन को गिरफ्तार कर माफी मांगने के लिए कहा अन्यथा राजाज्ञा का उल्लघंन करने के लिए मृत्यु दण्ड देने की धमकी दी। सम्राट की धमकी के आगे संत वैलेन्टाइन नहीं झुके और उन्होंने प्रभु निर्मित समाज को बचाने के लिए मृत्यु दण्ड को स्वीकार कर लिया। संत वैलेन्टाइन की मृत्यु के बाद लोगों ने उनके त्याग एवं बलिदान को महसूस करते हुए प्रतिवर्ष 14 फरवरी को उनके ‘शहीद दिवस’ पर उनकी दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थनायें आयोजित करना प्रारम्भ कर दिया। इसलिए ऐसे महान संत के ‘शहीद दिवस’ पर खुशियां मनाकर उनकी भावनाओं का निरादर करना सही नहीं है।

हमारी स्वतंत्रता पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादा का है अंकुश

वैलेन्टाइन डे को ‘आधुनिक’ तरीके से मनाना भावी पीढ़ी के प्रति अपराध

 

‘वैलेन्टाइन डे’ मनाने को तेजी से प्रोत्साहित करने के पीछे छिपी एकमात्र भावना धन कमाना अर्थात ‘वैलेन्टाइन डे’ कार्डो की ब्रिकी का एक बड़ा बाजार विकसित करना, फुहड़ डान्सों तथा मंहगे होटलों में डिनर के आयोजनों की प्रवृत्तियों को बढ़ाकर अनैतिक ढंग से अधिक से अधिक लाभ कमाने वाली शक्तियां इसके पीछे सक्रिय हैं। विज्ञापन के आज के युग में वैलेन्टाइन बाजार को भुनाने का अच्छा साधन माना जाता है। मल्टीनेशनल कंपनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए अपना बाजार बढ़ाना चाहती हैं और इसके लिए उन्हें युवाओं से बेहतर ग्राहक कहीं नहीं मिल सकता। अतः ‘वैलेन्टाइन डे’ आधुनिक तरीकांे से मनाने को प्रोत्साहित करना भावी पीढ़ी एवं मानवता के प्रति अपराध है। अन्तिम विश्लेषण यह साफ संकेत देते हैं कि ‘वैलेन्टाइन डे’ के आधुनिक स्वरूप का भारतीय समाज एवं छात्रों में किसी प्रकार का स्वागत नहीं होना चाहिए क्योंकि यह मात्र सस्ती प्रेम भावनाओं को प्रदर्शित करने की छूट कम उम्र में छात्रों को देकर उनकी अनैतिक वृत्ति को बढ़ावा देता है।

परिवार, स्कूल एवं समाज को ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित करें

हम संत वैलेन्टाइन के इन विचारों का पूरी तरह से समर्थन करते हैं कि विवाह के बिना किसी स्त्री-पुरूष में अनैतिक संबंध होने से समाज में नैतिक मूल्यों में गिरावट आ जाएगी और समाज ही भ्रष्ट हो जाएगा। इस समस्या के समाधान का एक मात्र उपाय है, बच्चों को बचपन से ही भौतिक, सामाजिक, मानवीय तथा आध्यात्मिक सभी प्रकार की संतुलित शिक्षा देकर उनका सर्वागीण विकास किया जाए। किसी भी बच्चे के लिए उसका परिवार, स्कूल तथा समाज ये तीन ऐसी पाठशालायें हैं जिनसे ही बालक अपने सम्पूर्ण जीवन को जीने की कला सीखता है। इसलिए यह जरूरी है कि परिवार, स्कूल तथा समाज को ईश्वरीय प्रकाश से प्रकाशित किया जाये। एक स्वच्छ व स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए हमारा कर्तव्य है कि हम विश्व के बच्चों की सुरक्षा व शांति के लिए आवाज उठायें और पूरे विश्व के बच्चों तक संत वैलेन्टाइन के सही विचारों को पहुँचायें जिससे प्रत्येक बालक के हृदय में ईश्वर के प्रति, अपने माता-पिता के प्रति, भाई-बहनों के प्रति और समाज के प्रति भी पवित्र प्रेम की भावना बनी रहे।

 

परिवार, विद्यालय तथा समाज से मिली शिक्षा ही मनुष्य के चरित्र का निर्माण करती है

 

सारे विश्व में गैंगरेप कांड, हिंसा जैसी बढ़ती घटनायें चारित्रिकता, नैतिकता, कानून व जीवन मूल्यों की शिक्षा के अभाव में राह भटक गये लोगों के कारण ही हो रहीं हैं। वास्तव में किसी भी मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन को तीन प्रकार के चरित्र निर्धारित करते हैं। पहला प्रभु प्रदत्त चरित्र, दूसरा माता-पिता के माध्यम से प्राप्त वांशिक चरित्र तथा तीसरा परिवार, स्कूल तथा समाज से मिले वातावरण से विकसित या अर्जित चरित्र। इसमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण चरित्र तीसरा अर्थात् ‘अर्जित चरित्र’ होता है। बालक को जिस प्रकार की शिक्षा परिवार, विद्यालय तथा समाज से मिलती है वैसा ही उसका चरित्र निर्मित हो जाता है। इसलिए आज संसार में बढ़ते अमानवीय कृत्य जैसे हत्या, बलात्कार, चोरी, भ्रष्टाचार, अन्याय आदि शैतानी सभ्यता इन्ही तीनों क्लासरूमों से मिल रही उद्देश्यविहीन शिक्षा के कारण ही है।

 ‘वैलेन्टाइन डे’ को ‘पारिवारिक एकता दिवस’ के रूप में मनाने की प्रतिज्ञा लें

 

वैलेन्टाइन डे पर हम सभी लोग यह प्रतिज्ञा ले कि हम अपने मस्तिष्क से भेदभाव हटाकर सारी मानवजाति से प्रेम करेंगे व समानता की भावना पैदा करेंगे। भारत की संस्कृति व सभ्यता ही आज की जरूरत है। प्रेम तो ईश्वर से होना चाहिए क्योंकि यही जीवन का शाश्वत सत्य है। अगर ईश्वर से हमारा तार कट गया तो कोई अन्य प्रेम हमें नहीं बचा पाएगा। इसलिए हमें वैलेन्टाइन डे पर भाई-बहन का प्रेम, दादा-दादी का प्रेम, माता-पिता का प्रेम, गुरूजनों का प्रेम भी शामिल करना चाहिए तभी हम इस त्योहार का सही मूल्यांकन कर सकेंगे। संत वैलेन्टाइन के प्रति सच्ची श्रद्धा यही होगी कि हम 14 फरवरी ‘वैलेन्टाइन डे’ को पवित्र भावना से ‘पारिवारिक एकता दिवस’ के रूप में मनायें और संसार के सभी बच्चों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को यह संदेश भेजें कि सभी लोग एक-दूसरे से विश्व कुटुम्ब की तरह समान रूप से प्रेम करें, आदर करें। पारिवारिक एकता ही विश्व एकता की आधारशिला है। पारिवारिक एकता के द्वारा ही भारतीय संस्कृति के आदर्श वसुधैव कुटुम्बकम् – जय जगत के महान विचार के अनुरूप एक वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था का गठन होगा। साथ ही दूसरे चरण में मानव सभ्यता का अंतिम लक्ष्य धरती पर आध्यात्मिक सभ्यता का साम्राज्य स्थापित होगा।

 

Tags: Celebrate Valentine’s DayDr. Jagdish GandhiValentine's dayपारिवारिक एकता दिवसवैलेन्टाइन दिवस
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