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पूर्व सिविल सेवक एक न्यूज चैनल के खिलाफ हुए लामबंद, मोदी सरकार करे कानूनी कार्रवाई

Desk by Desk
02/09/2020
in Main Slider, नई दिल्ली, राष्ट्रीय
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नई दिल्ली: विवाद का रूप ले चुके ‘यूपीएससी जिहाद’ को लेकर 91 पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह ने गृहमंत्री अमित शाह को और सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखकर सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल के खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों के साजिशन घुसपैठ या यूपीएससी जिहाद और सिविल सर्विसेज जिहाद जैसे बयान विकृत विचारधारा का उदाहरण और दंडनीय अपराध है। पत्र में हस्ताक्षरकतार्ओं ने कहा, “ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयानों से नफरत फैलती है और पूरे समुदाय की बदनामी होती है।

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पत्र में गृहमंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण, दिल्ली के उपराज्यपाल व दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिव, गृह मंत्रालय सचिव, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और पुलिस आयुक्त दिल्ली को संबोधित किया गया है। पूर्व सिविल सेवकों ने कहा, “हम इस पत्र के माध्यम से सुदर्शन न्यूज टीवी चैनल द्वारा एक सांप्रदायिक आरोप, विभाजनकारी और सनसनीखेज सीरीज के प्रसारण को लेकर एक जरूरी मुद्दा उठा रहे हैं। यह सीरीज देश के दो सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं आईएएस और आईपीएस में मुस्लिम अधिकारियों की संख्या में अचानक वृद्धि होने को लेकर भर्ती प्रक्रिया में साजिश का पदार्फाश करने का दावा करती है।

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उन्होंने समाचार चैनल के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए आगे कहा, “इस संबंध में जामिया मिलिया इस्लामिया को चुना गया है। हम जानते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट ने सीरीज के टेलीकास्ट पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि, हमें लगता है कि इसे लेकर मजबूत कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है.” पत्र में कहा गया, “यह आरोप लगाना कि सिविल सेवाओं में मुस्लिम अधिकारियों की साजिशन घुसपैठ करने, या इस संबंध में यूपीएससी जिहाद या सिविल सेवा जिहाद जैसे शब्दों का प्रयोग अत्यंत अनुचित है ऐसे सांप्रदायिक और गैरजिम्मेदाराना बयान और भाषण से घृणा फैलने के साथ पूरे समुदाय की बदनामी होती है।

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हस्ताक्षरकतार्ओं ने पत्र में कहा, “यदि इस कार्यक्रम के प्रसारण की अनुमति दी जाती है तो यह देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिमों के प्रति बिना किसी ठोस आधार के घृणा उत्पन्न करेगा। देश में मुस्लिमों के खिलाफ कोरोना जिहाद और लव जिहाद के आरोप सहित कई घृणित भाषण के मुद्दे पहले ही सुलग रहे हैं, जिसे विभिन्न अदालतों ने भी गलत माना है। यह टेलीकास्ट उसी आग को बढ़ाने में ईंधन का काम करेगा।

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उन्होंने यह भी दावा किया कि यह सिविल सेवा भर्ती के लिए प्रमुख संगठन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की त्रुटिहीन प्रतिष्ठा को, इसके भर्ती प्रकिया के पक्षपाती होने का दावा करते हुए धूमिल करेगा. पत्र में आगे कहा गया है, “यह सरकारी सेवाओं में खासकर आईएएस और आईपीएस सेवाओं के लिए चुने जाने वाले मुसलमानों की संख्या में वृद्धि के बारे में गलत धारणा फैलाएगा.”

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उन्होंने कहा, ” ‘यूपीएससी जिहाद’ और ‘सिविल सेवा जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल देश के नागरिक प्रशासन को धर्म के आधार पर बांटने का एक प्रयास है और पूरे भारत के विकास के लिए प्रशासकों द्वारा किए गए उत्कृष्ट योगदान को नजरअंदाज करने वाला है। हाल ही में इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कार्यक्रम के प्रसारण पर कोई रोक न लगाते हुए कहा, “हम ध्यान दें कि सक्षम प्राधिकरण, वैधानिक प्रावधानों के तहत कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए शक्तियों के साथ निहित है, जिसमें सामाजिक सौहार्द और सभी समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए आपराधिक कानून के प्रावधान भी शामिल हैं

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उन्होंने मांग करते हुए कहा, “इसलिए हम केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने का आग्रह करते हैं। हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्डस अथॉरिटी ऑफ इंडिया से यह भी जांच करने का अनुरोध करते हैं कि वे जांच करे कि यह शो केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994, केबल टेलीविजन नेटवर्क्‍स (रेगुलेशन) अधिनियम के तहत चलना चाहिए या नहीं और उसके बाद कोड ऑफ एथिक्स और ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड के अनुसार उन पर कार्रवाई करें।

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इस पत्र पर दिल्ली के पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग, आईएफएस (सेवानिवृत्त) व पूर्व विदेश सचिव और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष राहुल खुल्लर, मध्य प्रदेश सरकार में काम कर चुके हर्ष मंदर, सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग में पूर्व सचिव अनीता अग्निहोत्री और सीबीआई में पूर्व स्पेशल डायरेक्टर के. सलीम अली ने हस्ताक्षर किए हैं।

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वहीं पत्र पर सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी व पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई कुरैशी, संस्कृति मंत्रालय के पूर्व सचिव और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जौहर सिरकार, इंटर स्टेट काउंसिल के पूर्व सचिव अमिताभ पांडेय, गुजरात सरकार में पूर्व पुलिस महानिदेशक पी. जी. जे नामपूथिरी, पूर्व विदेश सचिव व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी के पूर्व चेयरमैन श्याम सरन और वित्त मंत्रालय में पूर्व सचिव नरेंद्र सिसोदिया ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

Tags: अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्षगृह मंत्रालय सचिवदिल्ली के उपराज्यपाल व दिल्ली के मुख्यमंत्री सचिवसंघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्षसमाचार प्रसारण मानक प्राधिकरणसूचना और प्रसारण मंत्रालय
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