श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी (Nag Panchami) का पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी पर नाग देवताओं की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति आती है और कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने की मान्यता है।
नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शिव को जल, दूध, फूल और अनाज अर्पित किए जाते हैं। खास बात यह है कि इस दिन आठ प्रमुख नागों की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं कौन हैं ये आठ नाग और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं।
1. शेषनाग यानी आदिशेष
शेषनाग को आदिशेष और अनंत के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उन्हें नागों का राजा बताया गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर विराजमान रहते हैं।
2. वासुकी नाग
वासुकी को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव उन्हें अपने गले में धारण करते हैं। समुद्र मंथन के दौरान मंदार पर्वत को मथने के लिए वासुकी नाग को रस्सी के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
3. पद्म और महापद्म नाग
पद्म नाग को धार्मिक मान्यताओं में शांति और समृद्धि से जोड़ा जाता है। महापद्म नाग का भी पुराणों में विशेष उल्लेख मिलता है। नाग पंचमी पर इनकी पूजा को शुभ माना जाता है।
4. तक्षक नाग
महाभारत में तक्षक नाग का विशेष उल्लेख मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार तक्षक प्रमुख नाग वंशों में शामिल हैं। राजा परीक्षित से जुड़ी कथा में भी तक्षक नाग का महत्वपूर्ण प्रसंग आता है।
5. कुलिक नाग
कुलिक नाग का उल्लेख भी प्रमुख नागों में किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका संबंध ब्रह्मा से माना जाता है। नाग पंचमी पर इनकी पूजा भी विशेष महत्व रखती है।
6. कर्कोटक नाग
कर्कोटक नाग का उल्लेख विभिन्न पौराणिक कथाओं में मिलता है। इन्हें बुद्धिमान और शक्तिशाली नाग माना गया है। भगवान शिव से भी उनका धार्मिक संबंध बताया जाता है।
7. शंखपाल नाग
शंखपाल को आठ प्रमुख नागों में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख के समान पवित्र माने जाने वाले इस नाग की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।
8. धृतराष्ट्र नाग
धृतराष्ट्र भी प्रमुख नागों में गिने जाते हैं। पौराणिक परंपरा में उनका उल्लेख नाग वंश के महत्वपूर्ण नामों में मिलता है। नाग पंचमी पर आठ नागों के पूजन में इन्हें भी शामिल किया जाता है।
कालसर्प दोष से भी जुड़ी है मान्यता
नाग पंचमी की पूजा को लेकर एक प्रमुख धार्मिक मान्यता कालसर्प दोष से जुड़ी है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुंडली में कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति को जीवन में कई तरह की बाधाओं और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ सकता है।
मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवताओं की श्रद्धापूर्वक पूजा करने और भगवान शिव को जल अर्पित करने से कालसर्प दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
हालांकि, कालसर्प दोष और उससे जुड़े प्रभाव ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। नाग पंचमी पर पूजा-पाठ मुख्य रूप से श्रद्धा और परंपरा के आधार पर किया जाता है।









