संसद का मानसून सत्र (Monsoon Session) खत्म होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन के कामकाज का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस बार लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। रिजिजू ने इसके लिए विपक्ष के लगातार हंगामे को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद कई मौकों पर नारेबाजी करते रहे और कुछ सदस्य सदन से बाहर भी चले गए। इसके बावजूद एनडीए के ज्यादातर दलों और कुछ विपक्षी सांसदों ने बहस में हिस्सा लिया।
12 बिल पास, एक पर ही पूरी बहस
रिजिजू के मुताबिक, लोकसभा में मानसून सत्र के दौरान 12 विधेयक पारित किए गए। हालांकि, सिर्फ एक विधेयक पर पूरी तरह चर्चा हो सकी। इसके विपरीत राज्यसभा में सभी विधेयकों पर बहस हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार के नजरिए से विधायी कामकाज महत्वपूर्ण रहा, लेकिन सदन में सार्थक चर्चा के लिए मिलने वाले समय का पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो सका।
पेपर लीक पर कानून हुआ सख्त
लोकसभा में जिस विधेयक पर विस्तार से चर्चा हुई, वह लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 था। इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियों पर कानूनी शिकंजा मजबूत करना है।
संशोधन के तहत कुछ अपराधों में न्यूनतम पांच साल से अधिकतम 10 साल तक की सजा और ज्यादा जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा व्यवस्था में अनुचित तरीकों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
रिजिजू बोले- चर्चा से पीछे हटा विपक्ष
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने पहली बार विपक्ष को चर्चा से बचते देखा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस के लिए तैयार थी, लेकिन हंगामे के कारण कार्यवाही प्रभावित हुई।
रिजिजू ने कहा कि पेपर लीक और प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-बिक्री जैसी घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए कानून में सख्त प्रावधान करना जरूरी था।









