लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) कांग्रेस संगठन को नए सिरे से तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नई नियुक्तियों के लिए अब राजनीतिक वरिष्ठता के बजाय काम का रिकॉर्ड, जमीनी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को प्राथमिकता देने की कवायद शुरू हुई है।
इसी कड़ी में कांग्रेस ने नए राष्ट्रीय सचिवों के चयन के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू की है। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की मौजूदगी में अलग-अलग राज्यों से शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं का इंटरव्यू लिया जा रहा है। सोमवार को 30 नेताओं से बातचीत की गई, जबकि पूरी प्रक्रिया में करीब 120 नेताओं के इंटरव्यू होने हैं।
राष्ट्रीय सचिव पद के लिए नेताओं को 10-10 के समूह में बुलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी उम्मीदवारों से उनके पुराने संगठनात्मक काम, राजनीतिक अनुभव और प्रोफाइल को लेकर सवाल कर रहे हैं। शॉर्टलिस्ट किए गए नेताओं के कामकाज से जुड़ी रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व के पास पहले से मौजूद है।
सिफारिश के बजाय काम के रिकॉर्ड पर जोर
पार्टी की इस कवायद में सिफारिश या राजनीतिक वरिष्ठता की जगह जमीनी काम को अधिक महत्व देने का संदेश दिया जा रहा है। संगठन में नए और अपेक्षाकृत युवा चेहरों को जगह देने के साथ कांग्रेस मौजूदा राष्ट्रीय सचिवों में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है।
राष्ट्रीय सचिवों के चयन में उन नेताओं को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिन्होंने कांग्रेस के ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम में ऑब्जर्वर के तौर पर काम किया है। पार्टी का लक्ष्य अलग-अलग राज्यों और सामाजिक वर्गों से ऐसे नेताओं को आगे लाना है, जो संगठन के साथ लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं।
दो दशक पुराने ‘जनरेशन चेंज’ एजेंडे पर फिर जोर
राहुल गांधी के राजनीतिक सफर की शुरुआत से ही कांग्रेस में युवाओं को आगे लाना उनके प्रमुख संगठनात्मक एजेंडे में रहा है। यूथ कांग्रेस और NSUI में भी पहले इंटरव्यू आधारित चयन प्रक्रिया के जरिए प्रतिभा और संगठनात्मक क्षमता को महत्व देने की कोशिश की गई थी।
हालांकि, अतीत में पार्टी के पुराने नेतृत्व और अंदरूनी खींचतान के कारण इस तरह के प्रयोगों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। अब कांग्रेस में प्रदेश से लेकर जिला स्तर तक संगठनात्मक बदलाव के बीच राष्ट्रीय स्तर पर भी नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की तैयारी हो रही है।
राष्ट्रीय सचिवों की चयन प्रक्रिया को इसी व्यापक संगठनात्मक बदलाव की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश एक ऐसी टीम तैयार करने की है, जिसमें युवा ऊर्जा के साथ जमीनी अनुभव, राजनीतिक समझ और समाज के अलग-अलग वर्गों का प्रतिनिधित्व भी हो। अब यह देखना होगा कि इस चयन प्रक्रिया के बाद कांग्रेस का नया संगठनात्मक चेहरा किस तरह सामने आता है।









