उत्तराखंड की शांत और खूबसूरत वादियों में बसा नैनीताल जिले का ‘कैंची धाम’ (Kainchi Dham) दुनिया भर में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक बड़ा केंद्र माना जाता है। इस पावन धाम की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि सात समंदर पार तक फैली हुई है। टेक दिग्गज मार्क जुकरबर्ग, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स से लेकर क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा जैसी वैश्विक हस्तियों ने बाबा नीम करौली के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की है। इस साल 15 जून का दिन कैंची धाम के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है, क्योंकि इस बार धाम का स्थापना दिवस अपने साथ एक बेहद दुर्लभ और पवित्र संयोग लेकर आ रहा है।
स्थापना दिवस और 7वें बड़े मंगल का महापर्व
हर साल 15 जून को कैंची धाम (Kanichi Dham) में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है, क्योंकि इसी दिन साल 1964 में बाबा नीम करौली महाराज ने इस पावन आशियाने की नींव रखी थी। लेकिन इस वर्ष अधिकमास (मलमास) के विशेष नक्षत्रों के चलते एक अद्भुत धार्मिक संयोग बन रहा है। स्थापना दिवस के ठीक अगले दिन, यानी 16 जून को साल का ‘7वां बड़ा मंगल’ पड़ रहा है। बाबा नीम करौली (Neem Karoli) के अनुयायी उन्हें संकटमोचन भगवान हनुमान का साक्षात अवतार मानते हैं। ऐसे में कैंची धाम का स्थापना दिवस और बुढ़वा मंगल का यह लगातार दो दिवसीय दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए किसी महापर्व से कम नहीं है, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी तैयारियां चुस्त कर दी हैं।
फिरोजाबाद के अकबरपुर से कैंची धाम (Kainchi Dham) तक का सफर
बाबा नीम करौली का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक छोटे से गांव अकबरपुर में हुआ था। उनके माता-पिता ने उनका वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा रखा था। बचपन से ही साधारण बालक दिखने वाले लक्ष्मण नारायण का मन सांसारिक सुखों, खेल-कूद या मोह-माया में कभी नहीं लगा। वे घंटों एकांत में बैठकर साधना और ईश्वर भक्ति में लीन रहते थे। बहुत ही कम उम्र में उन्होंने गृहस्थ जीवन और सांसारिक बंधनों का त्याग कर दिया और सत्य व अध्यात्म की खोज में जंगलों और पहाड़ों की ओर निकल पड़े। कठिन तपस्या के बाद जब वे एक सिद्ध संत के रूप में उभरे, तो उनकी आभा से आकर्षित होकर लोग स्वतः ही उनकी ओर खींचे चले आने लगे।
बिना टिकट यात्रा और ‘नीम करौली’ नाम पड़ने का दिलचस्प किस्सा
लक्ष्मण नारायण शर्मा से ‘नीम करौली बाबा’ बनने के पीछे भारतीय रेलवे से जुड़ा एक बेहद चमत्कारी और दिलचस्प वाकया है, जो आज भी जनश्रुतियों में अमर है। लोक मान्यताओं के अनुसार, एक बार बाबा एक ट्रेन में सफर कर रहे थे, लेकिन उनके पास यात्रा का टिकट नहीं था। रास्ते में जब टिकट परीक्षक (TTE) ने उनसे टिकट मांगा, तो टिकट न होने पर रेलवे कर्मचारियों ने उन्हें अगले स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार दिया। वह एक छोटा सा स्टेशन था जिसका नाम था— ‘नीम करौली’।
जब थम गए ट्रेन के पहिए: बाबा बिना किसी प्रतिवाद के शांत भाव से ट्रेन से उतर गए और स्टेशन के पास ही अपनी धूनी रमाकर बैठ गए। लेकिन इसके ठीक बाद एक अजीब घटना घटी; गार्ड ने हरी झंडी दिखाई, लोको पायलट ने पूरा जोर लगाया, मगर ट्रेन अपनी जगह से एक इंच भी आगे नहीं हिली। तकनीकी टीम ने पूरी बारीकी से जांच की, इंजन में कोई खराबी नहीं थी, फिर भी ट्रेन टस से मस नहीं हो रही थी।
ट्रेन में सवार कुछ स्थानीय यात्री बाबा की आध्यात्मिक क्षमता से परिचित थे, उन्होंने अधिकारियों को पूरी बात समझाते हुए बाबा से माफी मांगने और उन्हें वापस ट्रेन में बिठाने का आग्रह किया। भारी असमंजस के बीच रेल अधिकारियों ने बाबा के पास जाकर अपनी भूल स्वीकार की और उन्हें ससम्मान वापस ट्रेन में आने का निवेदन किया। बाबा मुस्कुराते हुए जैसे ही दोबारा बोगी में सवार हुए, ट्रेन बिना किसी प्रयास के तुरंत चल पड़ी। इस हैरतअंगेज घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच उनका नाम प्रसिद्ध हो गया और लोग उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ के नाम से पुकारने लगे।
हनुमान भक्ति और कैंची धाम (Kainchi Dham) की महिमा
बाबा नीम करौली को भगवान राम के परम भक्त पवनपुत्र हनुमान का अनन्य उपासक माना जाता है। उनके द्वारा स्थापित कैंची धाम सहित देश-विदेश के तमाम आश्रमों में मारुति नंदन की विशेष प्रतिमाएं और पूजा-अर्चना का विधान है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि बाबा की असीम आध्यात्मिक शक्ति का मूल आधार उनकी निश्छल हनुमान भक्ति ही थी। यही वजह है कि हनुमान जी को समर्पित ‘बड़े मंगल’ के दिन कैंची धाम की महत्ता कई गुना बढ़ जाती है। भक्तों का मानना है कि १५ और १६ जून के इस दो दिवसीय विशेष संयोग के दौरान जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा के दर पर हाजिरी लगाएगा, उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे।









