सावन का पवित्र महीना अब धीरे-धीरे विदाई की ओर बढ़ रहा है। भगवान शिव को समर्पित सावन के बाद भाद्रपद मास (Bhado Month) की शुरुआत होगी। हिंदू पंचांग का यह छठा महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इसे आम बोलचाल में भादो भी कहा जाता है।
भाद्रपद मास में भगवान श्रीकृष्ण, गणेश जी और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। इसी महीने में जन्माष्टमी से लेकर गणेश चतुर्थी और राधाष्टमी तक कई बड़े पर्व आते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल भादो कब शुरू होगा और कब इसका समापन होगा।
29 अगस्त से लगेगा भाद्रपद
पंचांग के अनुसार, सावन का समापन 28 अगस्त 2026 को पूर्णिमा तिथि के साथ होगा। इसके अगले दिन यानी 29 अगस्त, शनिवार से भाद्रपद मास शुरू हो जाएगा।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि इस दिन सुबह 9:57 बजे तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी।
26 सितंबर तक रहेगा भादो
इस साल भाद्रपद मास का समापन 26 सितंबर 2026, शनिवार को होगा। इस दिन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि रात 10:18 बजे तक रहेगी। इसके बाद आश्विन मास की शुरुआत होगी।
यानी इस बार करीब एक महीने तक भादो का धार्मिक रंग देखने को मिलेगा।
जन्माष्टमी से गणेश चतुर्थी तक कई पर्व
भाद्रपद मास में कई प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें कजरी तीज, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, राधाष्टमी और अनंत चतुर्दशी प्रमुख हैं।
इन पर्वों के कारण पूरे महीने मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना का माहौल बना रहता है।
दान-पुण्य और संयम का महीना
भाद्रपद को चातुर्मास का दूसरा पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, खान-पान में संयम रखने और धार्मिक गतिविधियों में मन लगाने का विशेष महत्व है।
इस महीने पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं।
पितरों के स्मरण का भी समय
भाद्रपद पूर्णिमा के बाद पितृ पक्ष यानी महालय की शुरुआत होती है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण तथा दान-पुण्य करते हैं।
इसलिए भादो का महीना भगवान की भक्ति के साथ-साथ संयम, सेवा और पितरों के स्मरण का भी महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।








