• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

ऑक्सीजन चाहिए तो पौधों को बचाया

Writer D by Writer D
24/05/2021
in Main Slider, राष्ट्रीय, स्वास्थ्य
0
oxygen

oxygen

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

कोरोनाकॉल में भारत में चारों तरफ आॅक्सीजन की किल्लत देखी गई।  इसके लिए प्रकृति से छेड़छाड़ भी बहुत हद तक जिम्मेवार है। अगर पेड़ पौधे न हों तो धरती में आॅक्सीजन न हो और आॅक्सीजन न हो तो जीवन संभव न हो। इसलिए हमारे होने में प्रकृति का अमूल्य योगदान है। लाखों जीवों और जीव रूपों को हम नहीं जानते, लेकिन ये हमारे जीवित होने की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जब यह जैव विविधता मजबूत नहीं होती तो हम कई तरह की कुदरत की नाराजगी झेलते हैं। भयानक बाढ़, सूखा, तूफान इन सबके पीछे जैव विविधता में किसी वजह से भी आयी कमी जिम्मेदार होती है। पेड़ पौध, मिट्टी, हवा, समुद्र, नदियां, कीड़े मकौड़े। ये सब मिलकर एक खूबसूरत दुनिया बनाते हैं। अगर इनमें से कुछ को खत्म कर दिया जाए, तो खूबसूरत दुनिया छिन्न भिन्न हो जाती है। इसलिए वनों की सुरक्षा हमारी संस्कृति के लिए ही जरू री नहीं है, यह हमारे जीवित रहने की बुनियादी शर्त है। इसी तरह छोटे से छोटे कीड़े मकौड़ों से लेकर जंगलों और समुद्र में रहने वाले बड़े-बड़े विशालकाय जानवरों का भी जिंदा रहना जरूरी है, तभी धरती जीवंत और आकर्षक रहेगी। इस सच को याद दिलाने के लिए ही हर साल 22 मई को जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।

प्रकृति में जो जीव चक्र  है, उसमें कुछ छोटे जीव बड़े जीव प्रजातियों का भोजन बनते हैं ताकि बड़े जीव इन छोटे जीवों को नियंत्रित रखें और धरती में जीवन सुरक्षित और संतुलित रहे। धरती में जीवन की मौजूदगी में इस जैव विविधता का बड़ा योगदान है। इसलिए इसे बनाये रखना बहुत जरूरी है। अगर जीवन की विविधता नहीं बची तो फिर धरती में जीवन भी नहीं बचेगा। वैज्ञानिक इसीलिए चिंतित रहते हैं, क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ इंसान अपने फायदे के लिए प्रकृति को अपने ढंग से नियंत्रित करने की कोशिश में लगा रहता है। वह प्रत्यक्ष रूप से गैर जरूरी जीवों और वनस्पतियों को धरती से खत्म कर देना चाहता है और सिर्फ उन जीवों और वनस्पतियों को हर तरफ फैलाना चाहता है, जो उसके लिए फायदेमंद हैं। लेकिन यह नासमझी है। क्योंकि अगर प्रत्यक्ष रूप से हमारे काम न आने वाले जीवों और वनस्पतियों को हमने खत्म कर दिया, तो जो हमारे काम की जीव प्रजातियां और वनस्पतियां हैं, वो भी नष्ट हो जाएंगी। क्योंकि उनका जीवन हमारे काम न आने वाली जीव जातियों व वनस्पति पर टीका है। धरती में लगातार बायोडायवर्सिटी का क्षरण हो रहा है, इसके लिए हमारी उपभोक्तावादी प्रवृत्ति जिम्मेदार है। पिछली दो सदियों में इंसान की कारगुजारियों से पृथ्वी की वनस्पतियों और जीवन प्रजातियों पर तो कई तरह के खतरे आये हैं, समुद्र के अंदर की हजारों जीव प्रजातियों को भी या तो इंसानों ने खाकर खत्म कर दिया है या फिर अपनी ऐशपूर्ण जीवनपद्घति के चलते इंसान ने इनकी जिंद्गी को खतरे में डाल दिया है। हालांकि वैज्ञानिक पूरी तरह से इस बात को लेकर कन्फर्म नहीं है कि दुनिया में आखिर कितनी जीव प्रजातियां हैं। वैज्ञानिकों के अलग अलग दावों के एक साझे अनुमान के मुताबिक दुनिया में 10 करोड़ तक विभिन्न तरह की जीव प्रजातियां हैं। लेकिन अभी तक कुल 14,35,662 प्रजातियों की ही पहचान हो पायी है। अनगिनत प्रजातियां अभी इंसान की सोच समझ और जानकारी में नहीं है।

इंसान द्वारा प्रकृति की पहचानी गई जीव प्रजातियों में से करीब 7,51,000 जीव प्रजातियां कीटों की हैं, 2,48,000 पौधों की, 2,81,000 जंतुओं की, 68,000 कवकों की, 26,000 शैवालों की, 4,800 जीवाणुओं की तथा हजारों विषाणुओं की प्रजातियों को हम पहचान चुके हैं। यानी इंसान इन्हें चिन्हित कर चुका है। सबसे चिंता की बात यह है कि कुदरत की इस जैव विविधता की दुनिया से 27,000 विभिन्न तरह की प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर ऊष्णकटिबंधीय इलाकों के छोटे जीव हैं। अगर जैव विविधता के क्षरण की यही रफ्तार कायम रही तो विशेषज्ञों को चिंता है कि सन 2050 तक आते आते कहीं लाखों जीव खत्म न हो जाएं। इंसान सिर्फ जीव प्रजातियों को मार ही नहीं रहा, उसकी तमाम गतिविधियों से पर्यावरण का संतुलन कुछ इस तरह बिगड़ता है कि हजारों जीव प्रजातियों को जीवित रहना मुश्किल हो जाता है।

Tags: Oxygen
Previous Post

निर्धन का अधिकार ले गए मंत्री के भाई : लल्लू

Next Post

आज है सोम प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Writer D

Writer D

Related Posts

Cockroach Party Pakistan
Main Slider

पाकिस्तान में ‘कॉकरोच’ की एंट्री, युवाओं ने बनाई ये पार्टी

01/08/2026
Rain havoc in Uttarakhand
Main Slider

उत्तराखंड में नदियों का रौद्र रूप, ऋषिकेश-देवप्रयाग में अलकनंदा-गंगा का बढ़ा जलस्तर

01/08/2026
Several major rules changed from August 1st.
Business

आज से बदल गए कई बड़े नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा असर

01/08/2026
AN Pramod
नई दिल्ली

वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने संभाली भारतीय नौसेना के उप प्रमुख की कमान

01/08/2026
CM Vishnudev Sai met Nitin Nabin.
Main Slider

छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने की नितिन नबीन से मुलाकात

01/08/2026
Next Post
Sawan

आज है सोम प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

यह भी पढ़ें

Ajmer bomb blast accused Karim Tunda released

अजमेर बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपी करीम टुंडा रिहा, 2013 में हुआ था अरेस्ट

29/02/2024
Kalawa

जानें कलावा खोलने की सही विधि और नियम

08/01/2026
CM Dhami

रिवर्स पलायन कर चुके लोगों को मिलेगा प्लेटफॉर्म, महिलाओं की भागीदारी से राज्य बनेगा श्रेष्ठ: CM धामी

09/05/2025
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version