• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

तो साढ़े सात दशक बाद भी शीर्ष अदालतों में क्यों है ‘अंग्रेजों की भाषा’

Writer D by Writer D
17/07/2021
in Main Slider, उत्तराखंड, राजनीति, राष्ट्रीय
0
Chandrashekhar

Chandrashekhar

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

अंग्रेजों के राजद्रोह कानून को आजादी के 75 साल बाद भी जारी रखने की देश की शीर्ष अदालत की चिंतातुरता और प्रश्नाकुलता स्वाभाविक है, होनी भी चाहिए। शीर्षतम अदालत में कामकाज की आजादी को लेकर कुछ वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट के जजों का विरोध  ‘जिंदाबाद’ था, लेकिन शीर्ष अदालतों के कक्षों में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की अनुपस्थिति भी उतना ही बड़ा यक्ष प्रश्न है। मेरी अपील है कि संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन की आवाज भी उन्हीं कक्षों से संसद तक पहुंचे।

यह त्वरित टिप्पणी है किशोरावस्था से सर्वोच्च न्यायालय एवं 25 उच्च न्यायालयों में हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं (संविधान की अष्टम अनुसूची में उल्लेखित 22 भाषाएं जिनकी लिपि उपलब्ध है) में मुकदमों की कार्यवाही  संपादित किए जाने एवं फैसले भी पारित किए जाने हेतु संघर्षरत ‘हिंदी से न्याय’ इस देश व्यापी अभियान के नेतृत्व पुरुष चंद्रशेखर पं.भुवनेश्वर दयाल उपाध्याय की।

मैसूर के मेजर जनरल सेवानिवृत्त एस.जी. वोम्बटकेरे की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 जुलाई, 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि कि आजादी के 75 साल बाद भी अंग्रेजों के कानून की क्या जरूरत है? इस कानून का जारी रहना संविधान के कामकाज और व्यक्तियों की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है। देश के मुख्य न्यायाधीश एन.वी.रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस जनहित याचिका की सुनवाई अब दो हफ्ते बाद करेगी।

हिन्दी माध्यम से एलएलएम उत्तीर्ण करने वाले पहले भारतीय छात्र चंद्रशेखर उपाध्याय अपने एकल प्रयत्नों से इस अभियान को अंतिम द्वार तक ले आए हैं। मामला संसद के पटल तक पहुंच चुका है। मौजूदा सरकार अनुच्छेद 348 में संशोधन के मुद्दे से  अनजान नहीं है।

प्रधानमंत्री मोदी को चंद्रशेखर 2012 से अब तक सात पत्र लिख चुके हैं। फरवरी 2013 में उनकी मां श्रीमती पुष्पलता उपाध्याय ने मोदी को पत्र लिखा था। मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे। मोदी ने समूचे 7 वर्ष 1 माह 15 दिन में चंद्रशेखर को 7 मिनट तक का समय नहीं दिया है। चंद्रशेखर का ‘हिन्दी से न्याय’ देशव्यापी अभियान देश की सरहदों को पार करता हुआ विदेशों, यहां तक कि अंग्रेजों की धरती तक पहुंच गया है लेकिन हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के नाम पर सिंहासन तक पहुंचने वालों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी है।

Tags: CS Upadhyayhindi se nyayNational newsUttrakhand News
Previous Post

पीड़ित दिव्यांग महिला की बात सुनने डीएम बैठ गए सीढ़ी पर

Next Post

यमुना नदी में नहाते समय डूबे मध्य प्रदेश के किशोर का शव बरामद

Writer D

Writer D

Related Posts

onion-curd curry
Main Slider

अचानक आए मेहमानों के लिए बनाएं ये टेस्टी सब्जी, मिनटों में हो जाएगी तैयार

14/07/2026
Honey Face Pack
Main Slider

डल हो गए चेहरे पर लगाएं ये फेस पैक, खिल जाएगी स्किन

14/07/2026
Sandalwood Face Pack
Main Slider

टैनिंग से राहत देगा चंदन, जानें फेस पैक बनाने का तरीका

14/07/2026
Mayur Dixit
Main Slider

डीएम ने माई भारत योजनाओं को घर-घर पहुंचाने के दिए निर्देश

13/07/2026
Chhattisgarh gets five new government medical colleges
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ को मिले पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेज, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रीका जताया आभार

13/07/2026
Next Post
Drowned

यमुना नदी में नहाते समय डूबे मध्य प्रदेश के किशोर का शव बरामद

यह भी पढ़ें

डेनिल मेदवेदेव Denil Medvedev

ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचे डेनिल मेदवेदेव, आंद्रे रूबलेव को दी मात

17/02/2021
drone

गांवों के डिजीटल नक्शे बनाने का काम, दोगुनी हुई ड्रोन सर्वे टीमों की संख्या

12/12/2020
Former Indian batsman Gundappa Vishwanath predicted before WTC final

WTC final से पहले भारतीय पूर्व दिग्गज बल्लेबाज गुंडप्पा विश्वनाथ ने की भविष्वाणी

10/06/2021
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version