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भारत में कब है आशूरा? जानें मुहर्रम की 10वीं तारीख का ऐतिहासिक महत्व

Writer D by Writer D
08/08/2022
in धर्म, फैशन/शैली
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Muharram

Muharram

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मुस्लिम धर्म में रमजान के बाद दूसरा सबसे पवित्र माह मुहर्रम (Muharram) का होता है. मुहर्रम माह से ही इस्लामिक कैलेंडर का आगाज होता है. यह इस्लामिक कैलेंडर वर्ष का पहला महीना है. इस साल मुहर्रम का प्रारंभ 31 जुलाई से हुआ है. मुहर्रम का 10वां दिन या 10वीं तारीख यौम-ए-आशूरा (Ashura) के नाम से जानी जाती है. यह दिन मातम का होता है. इस दिन मुस्लिम समुदाय मातम मनाता है. आइए जानते हैं कि भारत में आशूरा कब है और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है?

भारत में कब है आशूरा ( Ashura) ?

भारत में मुहर्रम का प्रारंभ 31 जुलाई को हुआ था, इसलिए आशूरा 09 अगस्त दिन मंगलवार को है. पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी आशूरा 09 अगस्त को ही है. वहीं सऊदी अरब, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, बहरीन और अन्य अरब देशों में मुहर्रम का प्रारंभ 30 जुलाई से हुआ था, इसलिए वहां पर आशूरा 08 अगस्त दिन सोमवार को है.

आशूरा ( Ashura) का ऐतिहासिक महत्व

पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत मुहर्रम के 10वें दिन यानि आशूरा को हुई थी. करीब 1400 साल पहले इस्लाम की रक्षा के लिए हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और 72 साथियों के सा​थ शहादत दे दी थी. हजरत इमाम हुसैन और यजीद की सेना के बीच यह जंग इराक के शहर कर्बला में हुई थी.

शिया समुदाय निकालता है ताजिया

आशूरा के दिन शिया समुदाय के लोग ताजिया निकालते हैं और मातम मनाते हैं. इराक में हजरत इमाम हुसैन का मकबरा है. उसी तरह का ताजिया बनाया जाता है और जुलूस निकाला जाता है. रास्ते भर लोग मातम मनाते हैं और कहते हैं कि ‘या हुसैन, हम न हुए’.

उन ताजियों को कर्बला की जंग के शहीदों का प्रतीक माना जाता है. जुलूस का प्रारंभ इमामबाड़े से होता है और समापन कर्बला पर होता है. वहां पर सभी ताजिए दफन कर दिए जाते हैं. जुलूस में शामिल लोग काले कपड़े पहनते हैं.

ताजिया के जुलूस के समय बोलते हैं- ‘या हुसैन, हम न हुए’. इसका अर्थ है कि हजरत इमाम हुसैन हम सब गमजदा हैं. कर्बला की जंग में हम आपके साथ नहीं थे, वरना हम भी इस्लाम की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दे देते.

Tags: Moharrammoharram 2022
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