• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

मोहिनी एकादशी कब है, जानें इस दिन क्या करें

Writer D by Writer D
29/04/2025
in धर्म, फैशन/शैली
0
Mohini Ekadashi

Mohini Ekadashi

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

हिन्दू धर्म में मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा की जाती है। मोहिनी रूप भगवान विष्णु ने तब धारण किया था जब समुद्र मंथन के दौरान अमृत निकला था और उसे असुरों से बचाना था। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से मुक्त हो जाता है। मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) का व्रत करने से महान पुण्य प्राप्त होता है, जिसे हजार गायों के दान के बराबर माना जाता है। इस व्रत को करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के आकर्षण प्रभाव में वृद्धि होती है।

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 मई को सुबह 10 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 8 मई को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, मोहिनी एकादशी का पर्व 8 मई को ही मनाया जाएगा। मोहिनी एकादशी का पारण 9 मई को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6 बजकर 6 मिनट से सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।

मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) पर क्या करें

– मोहिनी एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
– भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें।
– चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी दल, धूप और दीप से भगवान विष्णु की पूजा करें।
– मोहिनी एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर उपवास रखें (फलाहार कर सकते हैं)
– भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। रात्रि में जागरण करें और भगवान विष्णु के भजन गाएं।
– अगले दिन द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें, फिर व्रत का पारण करें।
– मोहिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

क्यों मनाई जाती है मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) ?

जब देवताओं (देवों) और असुरों द्वारा समुद्र मंथन किया गया, तो उसमें से अमृत का कलश निकला। अमृत प्राप्त करने के लिए देवों और असुरों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। असुरों को अमर होने और ब्रह्मांड में अराजकता फैलाने से रोकने के लिए, भगवान विष्णु ने एक सुंदर और मनमोहक स्त्री का रूप धारण किया, जिसे मोहिनी कहा गया। अपने मोहिनी रूप में, भगवान विष्णु ने असुरों को अपनी सुंदरता से मोहित कर लिया। जब असुर मोहिनी के आकर्षण में खोए हुए थे, तब उन्होंने कुशलतापूर्वक देवताओं को अमृत वितरित कर दिया, जिससे देवताओं की विजय हुई और ब्रह्मांडीय संतुलन बहाल हुआ। मोहिनी एकादशी इस महत्वपूर्ण घटना की स्मृति में और भगवान विष्णु के मनमोहक मोहिनी रूप का सम्मान करने के लिए मनाई जाती है, जिन्होंने संसार को असुरों द्वारा संभावित विनाश से बचाया था।

कैसे शुरू हुई परंपरा?

मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) मनाने की परंपरा भगवान विष्णु के मोहिनी रूप धारण करने के बाद शुरू हुई। इस दिन के महत्व को धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में वर्णित कथाओं के माध्यम से और अधिक बल मिला। महाभारत में, भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को मोहिनी एकादशी के महत्व के बारे में बताया, और इसके पापों को धोने और महान पुण्य प्रदान करने की शक्ति पर प्रकाश डाला। एक अन्य किंवदंती के अनुसार, सीता की खोज के दौरान भगवान राम को ऋषि वशिष्ठ ने अपने दुख को कम करने और अपने पापों को शुद्ध करने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी थी।

मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi) से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा भद्रावती नगर के एक पापी राजकुमार धृष्टबुद्धि की है। अपने बुरे कर्मों के कारण उसे बहुत कष्ट भोगना पड़ा। एक दिन वह ऋषि कौण्डिन्य के आश्रम में पहुंचा और उनसे अपने पापों से मुक्ति का मार्ग पूछा। ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल की मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। धृष्टबुद्धि ने विधिपूर्वक व्रत किया, जिससे उसके सभी पाप नष्ट हो गए और अंत में उसे मोक्ष प्राप्त हुआ। तभी से मोहिनी एकादशी व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।

इन कथाओं और भगवान विष्णु के दिव्य कार्य ने मोहिनी एकादशी के महत्व को दृढ़ किया, जिससे यह उपवास, प्रार्थना और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए समर्पित एक पवित्र दिन के रूप में मनाया जाने लगा। ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत भक्ति के साथ करने से सांसारिक बंधनों से मुक्ति मिलती है और महान यज्ञों या हजारों गायों के दान के बराबर आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता है।

Tags: mohini ekadashi
Previous Post

30 साल बाद अक्षय तृतीया पर बना अद्भुत संयोग, शुभ योगों की है वर्षा

Next Post

कब लगेगा साल का दूसरा चंद्र और सूर्य ग्रहण? जानें सही तिथि

Writer D

Writer D

Related Posts

Dark Underarms
फैशन/शैली

इन उपायों से दूर करें अंडरआर्म्स का कालापन

20/09/2026
Sunscreen
फैशन/शैली

सनस्क्रीन लगाते वक्त न करें ये गलतियां, स्किन हो जाएगी डैमेज

20/09/2026
Skin Tanning
फैशन/शैली

चेहरे की टैनिंग से है परेशान, आजमाए ये फेस मास्क

20/09/2026
Gemstones
Main Slider

राशि अनुसार धारण करें रत्न, जानें कौनसा रहेगा आपके लिए भाग्यशाली

20/09/2026
Papaya
फैशन/शैली

ये फल आपकी खूबसूरती में कर देगा इजाफा, ऐसे करें इस्तेमाल

20/09/2026
Next Post
Chandra and Surya Grahan

कब लगेगा साल का दूसरा चंद्र और सूर्य ग्रहण? जानें सही तिथि

यह भी पढ़ें

petrol-diesel

पेट्रोल-डीजल के दाम में फिर हुई बढ़ोत्तरी, मुंबई में पेट्रोल 100 के करीब

25/05/2021
diwali

जानें क्यों लक्ष्मी पूजा में गन्ना है जरूरी, पढ़ें इससे जुड़ी कथा

13/11/2020

21 लाख रुपये की ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार

26/09/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version