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देवशयनी एकादशी पर करें इन मंत्रों का जाप, बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा

Writer D by Writer D
24/07/2026
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
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Kamika Ekadashi

Kamika Ekadashi

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हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) का व्रत 25 जुलाई को रखा जाएगा। इसी दिन से चातुर्मास का प्रारंभ हो जाएगा। क्योंकि भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। फिर भगवान कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन उठेंगे। देवशयनी एकादशी बहुत खास होती है, क्योंकि ये भगवान विष्णु के साथ-साथ देवताओं के शयनकाल का भी समय माना जाता है।

चातुर्मास के इन चार महीनों में विवाह समेत तमाम शुभ और मांगलिक काम रोक दिए जाते हैं। हालांकि, भगवान विष्णु के योगनिद्रा में चले जाने से देवशयनी एकादशी के व्रत और पूजा का महत्व कम नहीं होता। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूजा और व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती है और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। देवशयनी एकादशी के दिन पूजा के समय इन पांच मंत्रों का जाप भी जरूर करें। इस दिन मत्रों का जाप करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

विष्णु जी के मंत्र

ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi)  व्रत पारण मुहूर्त

देवशयनी एकादशी के व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 13 मिनट से सुबह 08 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगा।

चातुर्मास 2026

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु विश्राम के लिए दैत्यराज बलि के पाताल लोक में चले जाते हैं। पूरे चार महीनों तक वहीं पर रहते हैं। इस दौरान भगवान संसार के कार्यभार से मुक्त होते हैं। श्री हरि के शयनकाल के इन चार महीनों को ही चातुर्मास कहा जाता है। इन चार महीनों में श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास शामिल हैं।

Tags: Ekadashi
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