करीब 11 साल पुराने रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व पत्रकार तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal ) को मिली राहत खत्म कर दी। अदालत ने मापुसा सेशंस कोर्ट के बरी करने के आदेश को रद्द करते हुए उन्हें दोषी करार दिया। अब उनकी सजा तय करने के लिए अलग से सुनवाई होगी।
खंडपीठ ने गोवा सरकार की उस अपील को स्वीकार किया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और गोवा के एडवोकेट जनरल देविदास पंगम ने पैरवी की।
‘ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता की ही जांच की’
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों की निष्पक्ष जांच करने के बजाय पीड़िता के आचरण और निजी पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए। सरकार का कहना था कि मुकदमा आरोपी के खिलाफ चलने की जगह पीड़िता की विश्वसनीयता पर केंद्रित हो गया।
सरकार ने यह भी कहा कि अदालत ने उन महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नजरअंदाज किया, जिनमें शिकायत के बाद तरुण तेजपाल द्वारा भेजा गया माफी वाला ई-मेल भी शामिल था।
लिफ्ट में यौन उत्पीड़न का आरोप
मामला 2013 में गोवा में आयोजित ‘तहलका थिंक फेस्ट’ से जुड़ा है। आरोप के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने अपनी जूनियर महिला सहकर्मी के साथ यौन उत्पीड़न किया था। इसी शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद मामले में अगला चरण सजा निर्धारण का होगा।









