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वन अधिकारी सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी नहीं, प्रकृति के प्रहरी हैं: धामी

Writer D by Writer D
19/08/2026
in Main Slider, उत्तराखंड, राष्ट्रीय
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CM Dhami

CM Dhami

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Dhami) ने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं। वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और विकास के बीच संतुलन बनाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय वन सेवा (IFS) के परिवीक्षार्थियों से आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री बुधवार को देहरादून में भारतीय वन सेवा में चयनित परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी परिवीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा देश की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उत्तराखंड का 70 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र

धामी ने कहा कि उत्तराखंड का करीब 70 प्रतिशत भूभाग वनों से आच्छादित है। पर्वत, नदियां, वन और समृद्ध जैव विविधता राज्य की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में वनों का संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी भी है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच वन अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को वन संरक्षण के साथ वन क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।

13 हजार एकड़ वन भूमि कराई कब्जामुक्त

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत करीब 13 हजार एकड़ वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन किया गया है। चारधाम यात्रा मार्ग पर डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम लागू किया गया है, जिसका विस्तार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी किया जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण के साथ बुनियादी ढांचे पर जोर

धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास परियोजनाएं पर्यावरण की कीमत पर न हों। उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर करीब 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह आधुनिक बुनियादी ढांचे और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन का प्रभावी मॉडल है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष में जनहानि के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। बायोफेंसिंग, त्वरित प्रतिक्रिया दल और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

वन उपज के परिवहन को आसान बनाने के लिए राज्य में नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम लागू किया गया है। वन पंचायतों को सशक्त करने के लिए वन पंचायती नियमावली में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। वहीं, वनाग्नि से निपटने वाले फायर वॉचर्स के लिए जीवन बीमा और पिरुल एकत्रीकरण के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ में संतुलन जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा संतुलन स्थापित करना है, जिसमें प्रकृति और वन्यजीव सुरक्षित रहें और वनों पर निर्भर स्थानीय समुदायों की आजीविका व समृद्धि भी सुनिश्चित हो। उन्होंने भारतीय वन सेवा के युवा अधिकारियों से इसी संतुलित दृष्टिकोण को अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। ‘मिशन LiFE’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ा है।

धामी ने परिवीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे जहां भी सेवाएं दें, राष्ट्रहित, पर्यावरण संरक्षण और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

Tags: Uttarakhand News
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