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बिहार चुनाव : रामविलास पासवान के निधन से इन 5 जिलों में बिगाड़ सकता है जेडीयू का चुनावी खेल

Desk by Desk
10/10/2020
in Main Slider, क्राइम, नई दिल्ली, बिहार
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पटना। बिहार विधानसभा चुनाव पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने निधन से लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान को तो बड़ा झटका लगा है, लेकिन रामविलास पासवान के निधन उपजी सहानुभूति जेडीयू का चुनावी खेल बिगड़ सकता है।

बता दें कि बिहार विधानसभा में एससी और एसटी के लिए की कुल 40 सीटें सुरक्षित हैं। इन पर कभी लोजपा का दबदबा नहीं रहा है, लेकिन इस बार बिहार के सबसे बड़े दलित नेता रामविलास पासवान के निधन के बाद कयास लगाये जा रहे हैं कि चिराग पासवान को दलितों के साथ ही अन्य मतदाताओं के सहानूभूति वोट मिलेंगे।

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बिहार के 38 में से पांच ऐसे जिले हैं जहां चिराग को अधिक लाभ मिल सकता है। ये जिले हैं खगड़िया, समस्तीपुर, जमुई, वैशाली और नालंदा। खगड़िया पासवान का पैतृक जिला है। यहां के अलौली विधानसभा क्षेत्र से पासवान पहली बार विधायक चुने गये थे। इसके अलावा वैशाली, समस्तीपुर, जमुई और नालंदा ऐसे जिले हैं, जहां दलित वोटों की संख्या अधिक होने के कारण इस बार के चुनाव में चिराग को सहानुभूति लहर का फायदा मिलने की उम्मीद है। चिराग की पार्टी लोजपा ने जदयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं इसलिए इसका नुकसान भी जदयू को ही होगा।

एलजेपी नेता रामविलास पासवान के निधन से खेल तो सभी दलों का खराब होगा, लेकिन इसका ज्यादा असर जेडीयू पर पड़ेगा, क्योंकि कुछ दिन पहले ही लोजपा ने एनडीए से अपना नाता तोड़ते हुए कहा था कि लोजपा जेडीयू के खिलाफ हर सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगी। इस बीच केंद्रीय मंत्री और एलजेपी के संस्थापक रामविलास पासवान का निधन हो गया है।

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बिहार में अभी की तारीख में महादलित और दलित वोटरों की आबादी कुल 16 फीसदी के करीब है। 2010 के विधानसभा चुनाव से पहले तक रामविलास पासवान इस जाति के सबसे बड़े नेता बताते रहे हैं। दलित बहुल सीटों पर उनका असर भी दिखता था लेकिन 2005 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी ने नीतीश का साथ नहीं दिया था। इससे खार खाए नीतीश कुमार ने दलित वोटों में सेंधमारी के लिए बड़ा खेल कर दिया था। 22 में से 21 दलित जातियों को उन्होंने महादलित घोषित कर दिया था,लेकिन इसमें पासवान जाति को शामिल नहीं किया था।

नीतीश कुमार के इस खेल से उस वक्त महादलितों की आबादी 10 फीसदी हो गई थी और पासवान जाति के वोटरों की संख्या 4.5 फीसदी रह गई थी। 2009 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार के इस मास्टरस्ट्रोक का असर पासवान पर दिखा था। 2009 के लोकसभा चुनाव में वह खुद चुनाव हार गए थे। 2014 में पासवान एनडीए में आ गए। नीतीश कुमार उस समय अलग हो गए थे। 2015 में पासवान एनडीए गठबंधन के साथ मिल कर चुनाव लड़े लेकिन उनकी पार्टी बिहार विधानसभा में कोई कमाल नहीं कर पाई। बाद में नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ कर एनडीए में आ गए, तो गिले-शिकवे भूल कर 2018 में पासावन जाति को महादलित वर्ग में शामिल कर दिया। अब चिराग यह बात अपने वोटरों को बतायेंगे और अपने पिता के साथ हुए अपमान की कहानी भी अपने वोटरों को सुनायेंगे। वहीं, राजनीति के जानकार कहते हैं इसका लाभ चिराग को चुनाव में मिलेगा।

Tags: Benefitbihar assembly elections 2020Chirag paswanDiedJDUram vilas paswanचिराग पासवानजदयूनिधनफायदाबिहार विधानसभा चुनाव 2020रामविलास पासवान
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