• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
Advertisement
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

संस्कृत ग्रामों में सालभर नियमित रूप से आयोजित हों संस्कृत आधारित गतिविधियां – मुख्यमंत्री

Writer D by Writer D
07/10/2026
in उत्तराखंड, राष्ट्रीय
0
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर राज्य सरकार ने प्रयास तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि आदर्श संस्कृत ग्रामों में केवल विशेष अवसरों पर ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष नियमित रूप से संस्कृत संभाषण और संस्कृत आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए बच्चों को संस्कृत भाषा के अध्ययन के साथ-साथ वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों की जानकारी भी दी जानी चाहिए। इसके लिए बच्चों की आयु और रुचि के अनुरूप सरल एवं प्रभावी माध्यम विकसित करने के निर्देश दिए गए।

संस्कृत से भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ेंगे बच्चे

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार और जीवन मूल्यों की जानकारी मिलना भी आवश्यक है। भारत की मूल भावना सदैव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ रही है और भारतीय ज्ञान परंपरा ने विश्व कल्याण, सद्भाव तथा मानवता का संदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।

चारधाम सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों पर संस्कृत को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम, हर की पैड़ी, जागेश्वर धाम, आदि कैलाश, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, धारी देवी, गर्जिया देवी मंदिर और वीरभद्र ऋषिकेश सहित राज्य के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी पहल की जाए।

इन स्थलों पर संस्कृत में प्रेरक वाक्य, श्लोक और उनके सरल अर्थ प्रदर्शित करने की व्यवस्था पर भी कार्य करने को कहा गया, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने के अवसर बढ़ाए जा सकें।

उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है संस्कृत

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है। इसलिए राज्य में संस्कृत शिक्षा और इसके प्रचार-प्रसार को और गति दी जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े प्रभावी कार्यों के लिए धनराशि की कमी नहीं होने दी जाएगी।

आगामी कुंभ को लेकर हरिद्वार के लिए बनेगी विशेष कार्ययोजना

मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ के दृष्टिगत हरिद्वार में संस्कृत के क्षेत्र में किए जा सकने वाले ठोस कार्यों की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए अभिनव पहल की जानी चाहिए।

13 जनपदों में शुरू हो चुके हैं आदर्श संस्कृत ग्राम

सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने बैठक में राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों और विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 13 जनपदों में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम का शुभारंभ किया जा चुका है। इन ग्रामों में संस्कृत को दैनिक बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

संस्कृत शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति तथा संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।

संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी

बैठक में बताया गया कि राज्य में संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन तथा आधुनिक तकनीक में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

बैठक में सचिव रणवीर सिंह चौहान, संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, अपर सचिव मनुज गोयल, कवीन्द्र सिंह, संयुक्त सचिव राजेंद्र सिंह पतियाल सहित संस्कृत शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

Tags: Uttarakhand News
Previous Post

CM योगी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता ने काशी कोतवाल और बाबा विश्वनाथ का किया दर्शन-पूजन

Next Post

उत्तरकाशी में बनेगा विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर, सीएम धामी ने की घोषणा

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

उत्तरकाशी में बनेगा विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर, सीएम धामी ने की घोषणा

07/10/2026
उत्तराखंड

आधुनिक तकनीक से समृद्ध होंगे उत्तराखंड के 2 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक, ग्लोबल मार्केट तक पहुंचेगा दूध

07/10/2026
हरयाणा

सिंगापुर में उद्योगपतियों संग CM सैनी की बैठक, हरियाणा के विकास और निवेश पर चर्चा

07/10/2026
हरयाणा

सिंगापुर से हरियाणा के लिए 5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव, बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

07/10/2026
हरयाणा

सिंगापुर के अनुभव से हरियाणा के विकास को मिलेगी नई रफ्तार: CM सैनी

07/10/2026
Next Post

उत्तरकाशी में बनेगा विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर, सीएम धामी ने की घोषणा

यह भी पढ़ें

Laptop

लैपटॉप की करनी है सफाई, तो फॉलो करें ये टिप्स

21/09/2024
anushka sharma

प्रेग्नेंसी के बाद अनुष्का अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में होंगी शामिल

16/09/2020
cm yogi

कोरोना के नियंत्रण एवं उपचार की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाए : योगी

20/09/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version