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गोरखपुर नाथ-सिद्ध अनुयायियों के लिए अनन्य श्रद्धा का केन्द्र: राष्ट्रपति

Writer D by Writer D
28/08/2021
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, गोरखपुर, राजनीति
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भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने कहा कि गोरखपुर नाथ-सिद्ध अनुयायियों के लिए अनन्य श्रद्धा का केन्द्र है। गोरखपुर के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, संत कबीर, गुरु गोरखनाथ, गुरु दिग्विजयनाथ तथा गुरु अवेद्यनाथ जैसे संतो की पावन तपस्थली है। यह भूमि बाबा राघवदास, हनुमान प्रसाद पोद्दार, रामप्रसाद बिस्मिल, प्रेमचन्द, फिराक गोरखपुरी एवं विद्या निवास मिश्र की स्मृतियों से सुरभित है।

राष्ट्रपति आज जनपद गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अन्तर्गत संचालित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण करने के उपरान्त इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिद्ध योगियों की सर्वोच्च पीठ गोरखपुर में आकर उन्हें हर्ष की अनुभूति हो रही है। 03 वर्ष से भी कम समय में उन्हें यहां एक अन्य महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थान का लोकार्पण का अवसर मिला है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पिछली गोरखपुर यात्रा में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि गोरखपुर को ‘सिटी ऑफ नॉलेज’ के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने प्रसन्नता जतायी कि गोरक्षपीठ और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना करके इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। शिक्षा के प्रसार के माध्यम से सामाजिक उत्थान के लक्ष्य को लेकर वर्ष 1932 में स्थापित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद उत्तर भारत में विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगभग 50 शैक्षिक संस्थानों का संचालन कर रहा है। इसी क्रम में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण भी हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि गोरक्षपीठ सदियांे से भारत के सामाजिक, धार्मिक जागरूकता में अपनी विशिष्ट भूमिका निभाती रही है। भारत के स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान इस पीठ ने राजनैतिक पुनर्जागरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। आज के समय में भी गोरक्षपीठ जनजागरण, जनसेवा, शिक्षा व चिकित्सा सेवा का केन्द्र बनी हुई है। महायोगी गोरखनाथ ने योग के माध्यम से जनसाधारण को सशक्त बनाने का अतुलनीय कार्य किया है। गुरू गोरखनाथ जी एवं उनकी साधना पद्धति का संयम एवं सदाचार से सम्बन्धित व्यावहारिक रूप लम्बे समय से सम्मानीय बना हुआ है। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के बाद गोरखनाथ भारत के सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं।

राष्ट्रपति ने शिक्षा के महत्व के सम्बन्ध में स्वामी विवेकानन्द जी का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण, शिक्षार्थियों में नैतिकता, तार्किकता, करुणा और संवेदनशीलता विकसित करने तथा रोजगार के लिए सक्षम बनाने पर बल दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक उद्देश्य हमारी शैक्षणिक संस्थाओं की पाठ्यचर्या और शिक्षा विधि में सुधार करना और छात्रों में अपने मौलिक दायित्वों एवं संवैधानिक मूल्यों, देश के साथ जुड़ाव तथा बदलते देश में नागरिक की भूमिका एवं उत्तदायित्वों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय  अपने ध्येय को अवश्य प्राप्त करेगा। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा संचालित संस्थाओं में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक ज्ञान, विज्ञान की शिक्षा देने के साथ उनके समग्र व्यक्तित्व के विकास पर बल दिया जा रहा है। उनमें भारतीय संस्कृति के प्रति निष्ठा, राष्ट्र के लिए त्याग एवं समर्पण की भावना और सामाजिक सहभागिता विकसित करने पर पूरा ध्यान दिया जाता है। आज लोकार्पित किए जा रहे महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में योग, आयुर्वेद, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा भी दी जाएगी। समय की आवश्यकता को देखते हुए रोजगार प्रदान करने वाले पाठ्यक्रमों का संचालन भी किया जाएगा।

 

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय धर्म, संस्कृति व समाज के उद्धार के लिए साधना की पवित्रता व संयमपूर्ण जीवन पर जोर देने वाले महायोगी गुरू गोरखनाथ के नाम पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है। गोरखपुर का इतिहास जितना गौरवपूर्ण रहा है, वर्तमान भी उतना ही प्रेरक और उल्लेखनीय है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ ही शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अलख जगाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक अनेक शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थाएं स्थापित कीं। राज्यपाल ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय और आयुष विश्वविद्यालय के बन जाने से जनपद गोरखपुर एजुकेशन हब के रूप में जाना जाएगा। अच्छी शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार देना नहीं होता, बल्कि दृढ़ निश्चयी एवं देश हेतु समर्पित नागरिक तैयार करना होता है। हमारे पास इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति है। अब हमारे विद्यार्थी कौशल की कमी के कारण न रुकेंगे और न ही भाषा की सीमा में बंधेंगे। नई शिक्षा नीति भारतीयता को समर्पित है, जो आत्मनिर्भर भारत बनाने के सपने को साकार करने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 1932 में ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना कर पूर्वांचल के शैक्षिक व आर्थिक रूप से पिछड़े हुए क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने का कार्य प्रारम्भ किया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में महिला शिक्षा के लिए पहला महाविद्यालय स्थापित करने के साथ ही, गोरखनाथ मन्दिर ट्रस्ट ने दो महाविद्यालयों का निर्माण कर गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के कार्य को आगे बढ़ाया। ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज ने गोरक्षपीठ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जागरण की परम्परा के साथ ही, शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में लोक कल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद लोक कल्याण के अभियान का केन्द्र बिन्दु बना। वर्तमान में लगभग 4 दर्जन शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। राष्ट्रपति जी ने वर्ष 2018 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी समारोह तक गोरखपुर को ‘सिटी ऑफ कॉलेज’ बनाने का संकल्प गोरखपुरवासियों को दिया था। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के द्वारा नवसृजित महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय राष्ट्रपति जी की उस उद्घोषणा का एक चरण है। आज का दिन गोरखपुर एवं पूर्वांचलवासियों के लिए विशिष्ट है, क्यांेंकि आज महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का उद्घाटन और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया गया है। यह गोरखपुर को ‘सिटी ऑफ नॉलेज’ के रूप में विकसित करने की कल्पना को साकार करने की दिशा में किए जाने वाले प्रयास का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति देने के लिए आभार जताते हुए कहा कि इस नीति में न केवल शासन के स्तर पर, बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से उन धर्मार्थ संस्थाओं की भूमिकाओं को भी महत्व दिया गया है, जो व्यावसायिकता से कोसों दूर रहते हुए सेवा भाव के साथ शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर सकती हैं। गोरखनाथ मन्दिर ट्रस्ट द्वारा नई शिक्षा नीति की सम्भावनाओं को साकार करने के अभियान का हिस्सा बनकर कार्य किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद पर केन्द्रित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के भौतिक विकास में योगदान करने वाले तीन इंजीनियर्स नीरज गौतम, सत्येन्द्र चौधरी एवं जसप्रीत लाम्बा को सम्मानित किया।

इस अवसर पर देश की प्रथम महिला सविता कोविंद, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर यू0पी0 सिंह, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर जनरल अतुज बाजपेई, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस0 गर्ग सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Tags: AYUSH Universitygorakhpur news
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