चंडीगढ़। गुरुग्राम और नूंह में सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के समानांतर निजी कंपनियों को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के प्रस्ताव का हरियाणा सरकार विरोध करती रहेगी। विधानसभा में सोमवार को कालांवाली के कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला के सवाल पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो सरकार इस मामले में ऊपरी अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी। मामला हरियाणा बिजली विनियामक आयोग के समक्ष विचाराधीन है।
आयोग ने केंद्र सरकार के कानून के तहत मिली शक्तियों के तहत राज्य सरकार से इस प्रस्ताव पर जवाब मांगा था। विज ने बताया कि सरकार ने आयोग के समक्ष हर बिंदु पर आपत्ति दर्ज कराई है। मामले में खुली सुनवाई भी हुई, जिसमें विभिन्न हितधारकों ने अपना पक्ष रखा। इसके बाद आयोग ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की। समिति ने अपनी रिपोर्ट में बिजली वितरण किए जाने की सिफारिश की है। विज के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने इसके प्रत्येक बिंदु पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए आयोग को जवाब भेज दिया है।
विज ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को है। सरकार चाहती है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि इससे जुड़े सभी पक्ष रिपोर्ट के निष्कर्षों पर अपनी राय रख सकें। सरकार पहले ही समानांतर लाइसेंस के प्रस्ताव का विरोध कर चुकी है। पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सदन में मौजूद सीएम पर ही सवाल दागते हुए कहा कि सरकार सदन में ऐलान करे कि प्राइवेट हाथों में बिजली आपूर्ति नहीं दी जाएगी।








