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DRDO की बड़ी कामयाबी, भारत का पहला स्वदेशी टर्बोजेट इंजन तैयार

Writer D by Writer D
06/08/2026
in नई दिल्ली, राष्ट्रीय
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India's first indigenous 350 kg turbojet engine ready.

India's first indigenous 350 kg turbojet engine ready.

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भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) द्वारा डिजाइन किए गए 350 किलोग्राम थ्रस्ट श्रेणी के पहले स्वदेशी एक्सपेंडेबल टर्बोजेट इंजन की पहली उत्पादन इकाई सफलतापूर्वक सौंप दी गई है। इसका निर्माण निजी कंपनी आजाद इंजीनियरिंग ने किया है।

इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास इस तरह के कॉम्पैक्ट सैन्य टर्बोजेट इंजन को स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित करने की क्षमता है।

क्रूज मिसाइल और ड्रोन को मिलेगी नई ताकत

यह इंजन मुख्य रूप से क्रूज मिसाइलों, जेट-संचालित लोइटरिंग म्यूनिशन, हाई-स्पीड टारगेट ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) के लिए विकसित किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य के लंबी दूरी के सटीक हमलों में भारतीय सेना की क्षमता को और मजबूत करेगी।

विदेशी निर्भरता होगी कम

अब तक भारत इस श्रेणी के छोटे जेट इंजनों के लिए काफी हद तक विदेशी तकनीक पर निर्भर था। स्वदेशी इंजन के विकसित होने से रक्षा परियोजनाओं में आयात पर निर्भरता घटेगी और भविष्य के हथियारों के विकास में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

फाइटर जेट इंजन से अलग है तकनीक

यह इंजन फाइटर जेट इंजन की तरह लंबे समय तक उपयोग के लिए नहीं बनाया गया है। इसे एक बार इस्तेमाल होने वाले सैन्य प्लेटफॉर्म के लिए डिजाइन किया गया है। मिशन पूरा होने के बाद यह इंजन हथियार के साथ ही नष्ट हो जाता है। इसलिए इसके डिजाइन में कम लागत, उच्च विश्वसनीयता और कॉम्पैक्ट आकार को प्राथमिकता दी गई है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में अधिक शक्तिशाली स्वदेशी एयरो इंजन विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।

Tags: National news
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