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…कई मौतों के बाद शुरू हुआ मजदूर दिवस, जानें भारत में कब मनाया गया

Writer D by Writer D
01/05/2024
in Main Slider, शिक्षा
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Labor Day

Labor Day

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दुनिया भर में आज मजदूर दिवस (Labor Day) मनाया जा रहा है। इसे मई दिवस या फिर इंटरनेशनल लेबर डे भी कहा जाता है। इसे एक मई को ही मनाने के पीछे की वजह भी खास है। दरअसल, साल 1886 में कई देशों समेत अमेरिका में मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई हिंसक हो गई थी। शिकागो शहर में हजारों मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर बम फेंके गए, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोलीबारी की। इसमें चार मजदूरों की मौत हो गई और सौ घायल हुए थे।

इसके बाद दुनिया भर की श्रमिक और समाजवादी पार्टियों के संगठन द्वितीय अंतरराष्ट्रीय ने साल 1889 में पेरिस सम्मेलन के लिए एक मई को ही चुना। इसी में इस दिन को मजदूरों को समर्पित करने का फैसला लिया गया था।

सुबह से शाम तक मजदूरों से लिया जाता था काम

वास्तव में पश्चिमी देशों में जब औद्योगिकरण का दौर शुरू हुआ तो और मजदूरों से सूर्य उदय होने से लेकर सूर्यास्त तक काम कराया जाने लगा। उनसे 15-15 घंटे से भी ज्यादा समय तक काम लिया जा रहा था। इससे लगातार असंतोष पैदा हो रहा था। इसी के कारण अक्तूबर 1884 में कनाडा और अमेरिका की ट्रेड यूनियनों के संगठन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनाइज्ड ट्रेड्स एंड लेबर यूनियन आगे आई। उसने तय किया कि 1 मई 1886 के बाद मजदूर रोज 8 घंटे से अधिक काम नहीं करेंगे। आखिरकार वह तारीख भी आ गई यानी 1 मई 1886 और उस दिन अमेरिका के अलग-अलग शहरों के लाखों मजदूर हड़ताल पर चले गए।

शिकागो की हड़ताल हिंसक झड़प में बदल गई थी

अमेरिका का शिकागो शहर इन विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में था। वहां दो दिनों तक शांतिप्रिय तरीके से हड़ताल चलती रही। एक मई से शुरू हुई हजारों मजदूरों की हड़ताल तीन मई की शाम को अचानक हिंसक हो गई। प्रदर्शनकारियों में से किसी ने पुलिस पर हमला कर दिया और उस पर बम फेंके। मैकॉर्मिक हार्वेस्टिंग मशीन कंपनी के बाहर भड़की इस हिंसा के जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। इसमें चार मजदूरों की जान चली गई। यही नहीं, अगले दिन भी पुलिस और मजदूरों में हिंसक झड़प हुई। इसमें सात पुलिसवालों के साथ कुल 12 लोगों की मौत हो गई।

कई देशों में चलता रहा मजदूरों का आंदोलन

इसके बावजूद अपनी मांगों को लेकर मजदूर 1889 से 1890 के बीच अलग-अलग देशों में प्रदर्शन करते रहे। एक मई 1890 को ब्रिटेन के हाइड पार्क में तो तीन लाख मजदूर सड़क पर उतर आए। इनकी भी मांग वही थी कि मजदूरों से 8 घंटे काम लिया जाए। फिर समय के साथ यह दिन श्रमिकों के अधिकारों की तरफ ध्यान आकर्षित कराने का एक मौका बनता चला गया और आंदोलन चलता रहा।

पेरिस कॉन्फ्रेंस में एक मई को मजदूरों को समर्पित करने का फैसला

फिर साल 1889 में पेरिस में इंटरनेशनल सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया तो उसी में तय किया गया कि एक मई को मजदूरों को समर्पित कर दिया जाए। इसके बाद धीरे-धीरे पूरी दुनिया में एक मई को मजदूर दिवस (Labor Day) या फिर कामगार दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

Labour Day: भूख से मर रहे दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए जिम्मेदार कौन?

इस आंदोलन का ही नतीजा था कि आज दुनिया भर में कर्मचारियों के लिए काम के अधिकतम आठ घंटे निर्धारित हैं। यही नहीं, सप्ताह में एक दिन की छुट्टी की शुरुआत भी शिकागो आंदोलन की ही देन है। इसको देखते हुए विश्व के कई देशों में तो एक मई को राष्ट्रीय अवकाश रखा जाता है।

भारत में पहली बार 1923 में मनाया गया था मई दिवस (Labor Day) 

भारत में मजदूर दिवस (Labor Day)  की शुरुआत की बात करें, तो साल 1923 में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने मद्रास (अब चेन्नई) ने इसका आगाज किया था। वामपंथी और सोशलिस्ट पार्टियों की अगुवाई में मद्रास में एक मई 1923 को पहली बार लाल रंग के झंडे का इस्तेमाल किया गया, जिससे मजदूरों के संघर्ष और एकजुटता को दर्शाया जा सके। उसी साल से भारत में भी एक मई को मजदूर दिवस मनाया जाने लगा और यहां भी कई राज्यों में एक मई को सार्वजनिक छुट्टी रहती है।

Tags: 1st May Labor DayInternational Labor Daylabor dayLabor Day history
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