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बसपा विधायक उमाशंकर सिंह को राखी बांधती थीं मायावती

Writer D by Writer D
06/08/2026
in Main Slider, उत्तर प्रदेश, बलिया
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Mayawati-Umashankar

Mayawati-Umashankar

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बलिया। उमाशंकर सिंह (Umashankar Singh) मायावती (Mayawati) के बेहद भरोसेमंद थे। बसपा सुप्रीमो ने सोशल मीडिया पर उनके लिए पोस्ट लिख इसे दर्शाया भी है। सार्वजनिक रूप से मायावती किसी से विशेष जुड़ाव प्रदर्शित नहीं करती हैं। बावजूद इसके उमाशंकर सिंह के लिए उन्होंने बार-बार अपना स्नेह प्रदर्शित किया है। उनकी बेटी की शादी में जाना हो या, उमाशंकर सिंह को राखी बांधना हो, उन्होंने कोई गुरेज नहीं किया।

गंभीर बीमारी के बावजूद वे बसपा के इकलौते विधायक के रूप में विधानमंडल की बैठकों में सम्मिलित होते रहे। अपने धारदार तर्कों से सदन में एक अलग पहचान बनाए रखी। पक्ष और विपक्ष सभी के बीच उनकी लोकप्रियता थी।

उनके चुनावी राजनीति की बात करें तो पहली बार उमाशंकर सिंह ने रसड़ा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और सपा के सनातन पांडेय को करीब 52,825 हजार मतों से हराया। तब समाजवादी पार्टी की लहर थी।

इसके बाद 2017 के चुनाव में जब भाजपा की लहर चल रही थी, तब भी बसपा के उमाशंकर सिंह ने भाजपा प्रत्याशी रामइकबाल सिंह को 33,887 हजार मतों से हराया। हालांकि 2022 के चुनाव में उमाशंकर को कड़ी टक्कर का सामना करना और भाजपा की आंधी में जहां बसपा पूरे प्रदेश में साफ हो गयी, वहीं, उन्होंने सुभासपा प्रत्याशी महेंद्र चौहान को 6583 मतों से पराजित किया। जिले में उनका कद इतना बड़ा है कि कम मार्जिन से चुनाव जीतना लोगों को कचोट गया।

बता दें कि उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम दिल्ली के निकट गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया था। वे पिछले कुछ समय से कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे थे। उनका उपचार अमेरिका में चल रहा था। अचानक तबियत बिगड़ने पर उन्हे फोर्टिस में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बलिया सहित पूर्वांचल के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गुरुवार देरशाम उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव खनवर आने की उम्मीद है। उनके निधन की सूचना मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और उनके समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। गुरुवार को जिले भर में उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के बीच शोक का माहौल है। सबकी आंखें नम हैं।

छात्र राजनीति से शुरू किया सार्वजनिक जीवन

उमाशंकर सिंह ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्रसंघ राजनीति से की थी। वर्ष 1990-91 में बलिया के प्रतिष्ठित सतीश चंद्र कॉलेज के छात्रसंघ के महामंत्री निर्वाचित हुए थे।छात्र राजनीति से आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई और साल 2000 में वे बलिया में अपने गृह क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य चुने गए, जिससे स्थानीय राजनीति में उनका कद काफी बढ़ गया। इसी के साथ ठेकेदारी में उनका दायरा बढ़ता गया। उनके द्वारा खड़ी की गई कंस्ट्रक्शन कंपनी छात्रशक्ति की गिनती प्रदेश की बड़ी सड़क निर्माण कंपनी बन गई। इसी दौरान वे बसपा सुप्रीमो मायावती के संपर्क में आए। मायावती ने उमाशंकर सिंह को बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट जो अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित थी, से वर्ष 2012 में परिसीमन बदलने के बाद सामान्य होने पर विधानसभा चुनाव में उतारा। जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार (2012, 2017 और 2022) विधायक निर्वाचित हुए। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा का सफाया हो गया। बावजूद इसे उमाशंकर सिंह अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।

हजारों बेटियों की करायी शादी

उमाशंकर सिंह अपने चुनाव क्षेत्र में मजबूत जनाधार और सक्रिय जनसंपर्क के कारण एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे। उमाशंकर सिंह अपनी उदारता और समाजसेवा के लिए भी प्रसिद्ध थे। उन्होंने कोरोना काल से पहले लगातार कई वर्षों तक सैकड़ों गरीब बेटियों की शादियां धूमधाम से करायी। कहा जाता है कि दरवाजे पर आया कोई भी जरूरतमंद बिना उनसे सहायता लिए वापस नहीं लौटता था। इसी के कारण लोग उन्हें “दानवीर” के नाम से भी जानते थे।

Tags: baliamayawatiUmashankar Singhup news
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