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पंजाब कांग्रेस में बैठक से पहले चन्नी के तेवर, बोले- तेल देखेंगे और तेल की धार

Writer D by Writer D
11/07/2026
in पंजाब, राष्ट्रीय
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Charanjit Singh Channi

Charanjit Singh Channi

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चंडीगढ़/जालंधर। पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी गहरा अंदरूनी घमासान अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी आलाकमान की ओर से मध्यस्थता करने पहुंचे नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और बागी धड़े का नेतृत्व कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Channi) के बीच आखिरकार शनिवार को एक अहम बैठक शुरू हो गई है। यह बैठक चन्नी गुट के दिग्गज नेता और विधायक राणा गुरजीत सिंह के चंडीगढ़ स्थित निजी आवास पर हो रही है। बैठक में शामिल होने के लिए घर से निकलते वक्त पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी ने मीडिया के सामने एक बेहद सस्पेंस भरा और तंजिया बयान देते हुए कहा कि “पहले तेल देखेंगे और फिर तेल की धार, उसके बाद ही अपना अगला राजनीतिक फैसला लेंगे।” उनके इस कड़े बयान ने बैठक के संभावित नतीजों और पार्टी के भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

राणा गुरजीत के आवास पर चन्नी गुट का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

राणा गुरजीत सिंह के आवास पर आयोजित इस बैठक को चन्नी खेमे के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। बैठक में भाग लेने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, संगत सिंह गिलजियां, भारत भूषण आशू, विधायक वरिंदर सिंह पाड़ा, अरुण चौधरी, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और बरनाला से विधायक कुलदीप सिंह काका ढिल्लों जैसे कई पूर्व मंत्री व दिग्गज नेता पहुंच चुके हैं। इससे पहले शुक्रवार को प्रदेश प्रभारी द्वारा बुलाए गए आधिकारिक कार्यक्रमों से चन्नी खेमे के इन तमाम वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और विधायकों ने पूरी तरह दूरी बनाए रखी थी, जिसके बाद संकट टालने के लिए खुद प्रभारी भूपेश बघेल ने चन्नी को फोन कर उनके साथ चाय पर अकेले मुलाकात करने की इच्छा जताई थी, जिस पर चन्नी इस सामूहिक बैठक के लिए सहमत हुए।

राजा वड़िंग की अनुपस्थिति पर रंधावा और परगट का बयान

पार्टी में गुटबाजी की खाई उस समय और चौड़ी नजर आई जब इस महत्वपूर्ण बैठक से प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पूरी तरह किनारा कर लिया। इस पर तंज कसते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि जब राजा वड़िंग खुद प्रदेश अध्यक्ष हैं, तो उन्हें अलग से बुलाने की या किसी न्योते की क्या जरूरत है, वे खुद ही सीधे मीटिंग में आ सकते थे। इसके उलट, प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए दो टूक कहा कि चूंकि उन्हें इस निजी आवास पर आयोजित बैठक का कोई आधिकारिक न्योता (आमंत्रण) नहीं मिला है, इसलिए वे वहां नहीं जाएंगे। वहीं, वरिष्ठ नेता और विधायक परगट सिंह ने मामले को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि यह केवल नेताओं के बीच ‘विचारों में भिन्नता’ का लोकतांत्रिक सवाल है, इसे किसी भी सूरत में बगावत का नाम नहीं दिया जाना चाहिए; उन्होंने उम्मीद जताई कि जब सभी वरिष्ठ नेता एक साथ बैठेंगे, तो निश्चित तौर पर पार्टी हित में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

चन्नी को सीएम चेहरा बनाने की लामबंदी और बघेल का दो टूक जवाब

उधर, चन्नी समर्थकों ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का आधिकारिक चेहरा घोषित करने के लिए हाईकमान पर चौतरफा दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके लिए दिल्ली में लामबंदी भी तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रहे दिवंगत बूटा सिंह के परिवार ने भी खुलकर चन्नी के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की है। बूटा सिंह के परिवार ने हाईकमान से लिखित मांग की है कि चन्नी पंजाब में कांग्रेस का सबसे बड़ा और स्थापित दलित चेहरा हैं, इसलिए आगामी विधानसभा चुनाव हर हाल में उनके ही चेहरे और नेतृत्व में लड़ा जाना चाहिए।

हालांकि, इस बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने बैठक से ठीक पहले मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस हाईकमान का रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। बघेल ने बिना किसी लाग-लपेट के दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि:

  • कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में किसी को भी मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करेगी।

  • वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को उनके पद से बिल्कुल नहीं बदला जाएगा।

बघेल के इस सख्त और स्पष्ट रुख के बाद आज शनिवार को जारी बैठक के अंतिम नतीजों को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों में भारी संशय पैदा हो गया है, क्योंकि बागी गुट की दोनों मुख्य मांगें इन्हीं दोनों मुद्दों के इर्द-गिर्द टिकी हुई हैं।

अनुशासनहीनता पर सख्त रुख, नवजोत कौर सिद्धू के बाद मदन लाल जलालपुर पर तलवार

बागी गुट के तेवरों को देखते हुए प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल ने एक कड़ा और सीधा संदेश जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी भी नेता ने चाहे वह किसी भी बड़े या ऊंचे पद पर क्यों न बैठा हो, अनुशासन की लक्ष्मण रेखा लांघी या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होकर अनुशासनहीनता दिखाई, तो उसे तुरंत पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उन्होंने इसी कड़ी कार्रवाई का हवाला देते हुए याद दिलाया कि हाल ही में इसी कारण नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के संबंध में बघेल ने बताया कि उनका लिखित जवाब अभी आना बाकी है; यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ भी निश्चित रूप से कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, इस अंदरूनी कलह के दौरान चन्नी गुट के कई नेताओं ने आवेश में आकर सार्वजनिक मंचों से प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और यहाँ तक कि पार्टी हाईकमान के खिलाफ तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिसे अब आलाकमान बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

Tags: amarinder singh raja warringBhupesh BaghelChandigarh-Punjab News in Hindicharanjit channiLatest Chandigarh-Punjab News in HindiPunjab congress rift
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