मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए कॉलिंग से जुड़ा एक नया फीचर चर्चा में है। इसका नाम कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) है। इसका उद्देश्य अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान आसान बनाना और साइबर ठगी पर रोक लगाने में मदद करना है।
इस सुविधा के जरिए फोन पर कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम दिखाई दे सकता है। यह नाम आम तौर पर उस नाम पर आधारित होगा, जिसके तहत सिम कार्ड जारी किया गया है। हालांकि, सिम कार्ड का पंजीकृत नाम और फोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का नाम अलग-अलग हो सकता है।
कैसे दिखाई देगा कॉल करने वाले का नाम?
उदाहरण के लिए मान लीजिए कि रमेश के नाम पर सिम कार्ड खरीदा गया है, लेकिन उसका इस्तेमाल उनकी पत्नी जानकी करती हैं। अगर जानकी किसी ऐसे व्यक्ति को फोन करती हैं जिसने उनका नंबर अपने मोबाइल में सेव नहीं किया है तो सामने वाले के फोन पर रमेश का नाम दिखाई दे सकता है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सिम कार्ड रमेश के नाम पर पंजीकृत है। इसलिए स्क्रीन पर दिखने वाले नाम को कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान का अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
साइबर ठगी रोकने में कैसे मिलेगी मदद?
अनजान नंबरों से आने वाली कॉल के जरिए लोगों को ठगने के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार जालसाज खुद को बैंक कर्मचारी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों से ओटीपी और बैंक संबंधी जानकारी मांगते हैं। CNAP सुविधा से कॉल करने वाले का नाम सामने आने पर यूजर्स को फैसला लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, केवल नाम देखकर किसी कॉल को सुरक्षित मान लेना सही नहीं होगा।
क्या हर फोन में मिलेगा यह फीचर?
दूरसंचार विभाग के 13 अक्टूबर 2026 के निर्देश के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियों को 1 नवंबर 2026 से 4G और उससे नई तकनीक वाले नेटवर्क पर CNAP सेवा शुरू करनी है। यह सुविधा अलग से अनुरोध किए बिना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
2G और 3G नेटवर्क पर इसे लागू करने का फैसला अलग से विचार के बाद किया जाएगा। इसका मतलब है कि यह बदलाव केवल फोन के मॉडल पर निर्भर नहीं करेगा बल्कि संबंधित नेटवर्क और टेलीकॉम कंपनी की सेवा पर भी निर्भर करेगा।