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‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’

Desk by Desk
03/02/2021
in Main Slider, ख़ास खबर, नई दिल्ली, राजनीति, राष्ट्रीय
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‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’ gulam navi ajad pm modi

‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’

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सियाराम पांडेय ‘शांत’

नगर पालिका के कचड़ा उठाने वाले वाहनों पर आजकल एक गीत रोज बजता है। गाड़ी वाला आया, घर से कचारा निकाल। कुछ इसी तर्ज पर कांग्रेस के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में एक गीत गाया है- ‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’। पगड़ी संभालने की नसीहत उन्होंने सरकार को दी है या किसानों को, यह तो नहीं पता लेकिन उनके इस गीत ने सदन का तापमान जरूर बढ़ा दिया है। उन्होंने अंग्रेजों के दौर के किसान आंदोलनों की सफलता का तो जिक्र किया ही है, 1988 में कांग्रेस प्रायोजित आंदोलन का ही जिक्र किया है। उन्होंने जय-जवान-जय किसान का नारा तो दिया है लेकिन किसानों को देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया है।

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कांग्रेस की इस अवधारणा , इस परिभाषा को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन यह भी सोचा जाना चाहिए कि देश में किसानों की असल तादाद क्या है और दिल्ली से सटी गाजीपुर, टीकरी और सिंघु सीमा पर कितने किसान आंदोलित थे या अब हैं? अंग्रेजों ने भी कृषि कानूनों को वापस किया था, यह कहकर वह मोदी सरकार की तुलना एक तरह से अंग्रेजों से करना चाहती है। सवाल यह है कि कांग्रेस जब विरोध में होती है तभी उसे किसानों की समस्या क्यों नजर आती है? अगर उसने अपने कार्यकाल में किसानों के उत्थान की बात सोची होती। सटीक कृषि नीति बनाई होती। किसानों को व्यापारियों की तरह अपना उत्पाद कहीं भी बेचने और उसका मूल्य खुद तय करने का अधिकार दिया होता तो आज किसानों की हालत इतनी दयनीय नहीं होती।

इस देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में किसानों की भूमिका अहम है ,लेकिन किसान आंदोलन से इस देश को केवल दो माह में कितना नुकसान हुआ है, मंथन तो इस पर भी होना चाहिए। कांग्रेस सरकार को नसीहत दे रही है कि वह किसानों से नहीं, चीन और पाकिस्तान से लड़े। चीन से लड़कर कांग्रेस ने इस देश को क्या दिया? जो देश के पास था, उसे चीन को सौंप जरूर दिया? क्या कांग्रेस इसी तरह का युद्ध चाहती है? ताकि वह सरकार को दिन -रात कोस सके। उसकी आलोचना कर सके। क्या कांग्रेस को ऐसा नहीं लग रहा कि सरकार कोरोना वायरस से लड़ नहीं रही है?

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चीन-पाकिस्तान या कोरोना वायरस से लड़ने में बाधा कौन बन रहा है, उसे इस बात का भी विचार करना चाहिए। विचार करने पर सच सामने आ जाता है। शशि थरूर के विवादित बयानों से कांग्रेस कई बार परेशान होती रही है और यह भी मानती रही है कि मणिशंकर अय्यर और शशि थरूर के बयान कांग्रेस को नुकसान और भाजपा को लाभ पहुंचाते हैं लेकिन जिस तरह इस बार उनके बयान को आपत्तिजनक मानते हुए उन पर राष्ट्र्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है, उससे कांग्रेस का तिलमिलाना स्वाभाविक है। उसे पूछा है कि क्या शशि थरूर देशद्रोही हो सकते हैं ?जो व्यक्ति देश का पूर्व विदेश राज्य मंत्री रह चुका हो तथा विश्व में देश का नेतृत्व कर चुका हो, जिसे लोगों ने लोकसभा के लिए चुना हो, वह व्यक्ति देशद्रोही कैसे हो सकता है।

आतंकवादी भी बड़ी-बड़ी उपाधियां लिए होते हैं। देशद्रोही होना या न होना परिस्थितिजन्य होता है। कांग्रेस को इस बात को समझना चाहिए और विचार करना चाहिए कि वह जिस तरह का आचरण कर रही है , क्या उससे देश के हित होता भी है या नहीं? और अगर उससे देश को नुकसान होता है तो उसके साथ किस तरह का सुलूक हो, यह कांग्रेस को खुद तय करना चाहिए। क्या कोई देशभक्त सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा सकता है? जिस कृषि सुधार की वकालत उसने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कर रखी हो, क्या उसी कानून को किसान विरोधी ठहरा सकता है। यह सच किसी से छिपा नहीं है कि फसलों के खेतों से ग्राहकों तक पहुंचने के दौरान बड़ी राशि बिचौलियों  के हाथों में चली जाती है। नए कानूनों से ऐसी स्थिति में कमी आएगी और किसानों को अपनी फसलों की बेहतर कीमत मिल सकेगी। क्या किसी को आंदोलन के लिए ललकारना और हिंसा को न्यायोचित ठहराना किसी देशभक्त का काम है?

जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी 95 प्रतिशत किसानों ने किसान मंडी का गेट नहीं देखा है। उनका अनाज या बिचैलिये खरीदते हैं या मिल मालिकों के संचालक और उनके एजेंट। मंडियों के भ्रष्टाचार किसी से छिपे नहीं हैं। कांग्रेस ने खुद अपने चुनावी घोषणापत्र में मंडियों को हटाने और अनुबंध की खेती को प्रोत्साहित करने की बात कही थी। आज उसे केंद्र सरकार द्वारा किए गए कृषि सुधार कानून रास नहीं आ रहे हैं तो इसके पीछे क्या वजह है, उसे इस देश को बताना चाहिए। क्या कुछ मुट्ठी भरी लोगों को देश की परेशानी बढ़ाने, उनका रास्ता रोकने का अधिकार दे दिया जाना चाहिए। क्या सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं करनी चाहिए। केंद्र सरकार ने पूरी सदाशयता का परिचय दिया है। उसने किसानों को 11 बार वार्ता की मेज पर आमंत्रित किया। ऐसे में कोई यह कैसे कह सकता है कि सरकार किसानों से बात ही नहीं कर रही है। वह उनकी समस्याओं को लेकर बहुत गंभीर नहीं है।

केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग संसद के दोनों सदनों में हो रही है। दो दिनों से पूरा विपक्ष इस बात पर आमादा है कि सरकार इन कानूनों को वापस ले ले लेकिन इन कानूनों को क्यों वापस लिया जाना चाहिए और क्यों इस बनाए रखना चाहिए, इस पर चर्चा जरूरी है लेकिन जिस तरह विपक्ष हंगामे कर रहा है और सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है, उससे तो लगता नहीं कि कोई समाधान निकलने वाला है। विपक्ष का तर्क यह हो सकता है कि सरकार किसानों से बात नहीं कर रही है और सरकार का तर्क है कि वह बात तो कर रही है लेकिन किसान मानने का नाम नहीं ले रहे हैं।

जिस तरह की जिद किसान नेता कर रहे हैं, उससे कम जिद कांग्रेस भी नहीं कर रही है। उसे समझना होगा कि किसानों को वोट का विषय, जाति का विषय बनाकर वह देश के लिए सिरदर्द पैदा कर रही है। देश का 95 प्रतिशत किसान अपने घरों में है। खेतों में काम कर रहा है। उसके पास दिल्ली जाने के लिए वक्त नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को बताना चाहिए कि वे सभी किसानों के साथ हैं या कुछ प्रतिशत किसानों और बिचैलियों के साथ। जनता बखूबी- देख-समझ रही है, उसी की सोच-समझ को कमतर आंकना किसी भी दल के लिए बुद्धिमानी तो नहीं ही होगी।

Tags: ‘पगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल’gulam navi ajadgulam navi ajad pm modipm modiTurban Handle Jattaगुलाम नबी आजादपगड़ी संभाल जट्टा पगड़ी संभाल
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