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राजस्थान निकाय चुनाव ने 2028 का मूड बताया, BJP सबसे बड़ी पार्टी लेकिन कांग्रेस भी करीब

Writer D by Writer D
15/09/2026
in राजस्थान, राष्ट्रीय
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जयपुर: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम सिर्फ मेयर और चेयरमैन की कुर्सी का फैसला नहीं हैं। इन्हें 2028 के विधानसभा चुनाव का ‘फर्स्ट सेमीफाइनल’ और राज्य के शहरी सियासी मूड के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वार्डों के आंकड़ों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन कांग्रेस भी उससे ज्यादा दूर नहीं है। वहीं निर्दलीयों के मजबूत प्रदर्शन ने दोनों बड़े दलों की चिंता बढ़ा दी है।

राज्य के 10,245 वार्डों में भाजपा ने 4,179 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,613 वार्ड मिले। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी दमदार प्रदर्शन करते हुए 2,273 वार्ड अपने नाम किए। इसके अलावा आरएलपी ने 63, आम आदमी पार्टी ने 42, सीपीआई (एम) ने 38, बसपा ने 19 और भारत आदिवासी पार्टी ने 8 वार्ड जीते।

BJP को 1% का फायदा, कांग्रेस का वोट 5% घटा

वोट शेयर की तस्वीर भाजपा के लिए राहत और कांग्रेस के लिए चिंता, दोनों दिखाती है। 2026 के निकाय चुनाव में भाजपा को 36.11 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 35.14 फीसदी रहा। दोनों दलों के बीच अंतर एक फीसदी से भी कम है। निर्दलीयों को 27.75 फीसदी वोट मिले।

2021 के निकाय चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 35.11 फीसदी था, जबकि कांग्रेस को 40.30 फीसदी वोट मिले थे। इस लिहाज से भाजपा को करीब एक फीसदी का फायदा हुआ, जबकि कांग्रेस के वोट शेयर में 5.16 फीसदी की गिरावट आई। निर्दलीयों और नोटा के वोट शेयर में भी बढ़ोतरी हुई है।

यानी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी है, लेकिन शहरी इलाकों में कांग्रेस अभी भी मुकाबले से बाहर नहीं है। दोनों के बीच वोटों का मामूली अंतर 2028 की संभावित कांटे की लड़ाई का संकेत दे रहा है।

10 नगर निगमों में भी बंटी तस्वीर

राजस्थान के 10 नगर निगमों में भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को बीकानेर में बहुमत मिला, जबकि अजमेर और पाली में वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। जोधपुर, भरतपुर और अलवर में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

47 नगर परिषदों में भाजपा ने 21 में बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 17 नगर परिषदों में जीत मिली। नौ नगर परिषदों में निर्दलीय पार्षद सबसे मजबूत स्थिति में रहे।

252 नगर पालिकाओं में भाजपा ने 149 में बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 95 नगर पालिकाओं में बढ़त मिली। आठ नगर पालिकाओं में निर्दलीय सबसे आगे रहे।

145 निकायों में निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर

309 निकायों में से 145 निकाय ऐसे हैं, जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। यहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यही आंकड़ा 2028 के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए बड़ा संदेश है।

निर्दलीयों के मजबूत प्रदर्शन से यह भी संकेत मिला है कि स्थानीय स्तर पर टिकट वितरण और बगावत बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में भी अगर असंतुष्ट नेता निर्दलीय मैदान में उतरते हैं तो भाजपा और कांग्रेस दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस के लिए राहत, लेकिन AAP-CPM ने बढ़ाई चिंता

कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि उसने कई महत्वपूर्ण निकायों में मजबूत प्रदर्शन किया है। खासतौर पर कुछ इलाकों में पार्टी की वापसी ने विपक्ष के रूप में उसकी मौजूदगी को बनाए रखा है।

लेकिन कांग्रेस के लिए चिंता यह भी है कि कुछ जगहों पर AAP और CPM ने अपनी जमीन मजबूत की है। बारां में AAP और नोखा में CPM की जीत को कांग्रेस के लिए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि विपक्षी वोट पूरी तरह उसके साथ नहीं हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि स्थानीय चुनावों में आम तौर पर सत्ताधारी दल को फायदा मिलता है, लेकिन इस बार भाजपा पूरी तरह बढ़त बनाने में सफल नहीं रही।

BJP के लिए भी खतरे की घंटी

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसका लोकसभा और निकाय चुनाव के बीच गिरा वोट शेयर है। 2024 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान में भाजपा को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे, जबकि निकाय चुनाव में उसका वोट शेयर करीब 36 फीसदी रहा।

राज्य के 10 नगर निगमों में भाजपा सिर्फ चार में स्पष्ट बहुमत हासिल कर सकी। इसके अलावा कांग्रेस की कुछ अहम इलाकों में वापसी और वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्रों में उसके प्रदर्शन ने भी भाजपा के सामने सवाल खड़े किए हैं।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ के प्रभाव वाले पाली नगर परिषद में कांग्रेस का मजबूत प्रदर्शन भी पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

2028 की जंग के लिए अभी से संकेत

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने करीब 41 फीसदी वोट शेयर के साथ 115 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को 39.58 फीसदी वोट के साथ 70 सीटें मिली थीं। 2026 के निकाय चुनाव इन आंकड़ों से अलग तस्वीर दिखाते हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव तक अभी दो साल से ज्यादा का समय है।

फिलहाल निकाय चुनावों ने भाजपा को शहरों में अपनी पकड़ बनाए रखने की राहत दी है, तो कांग्रेस को भी यह संदेश मिला है कि वह मुकाबले में बनी हुई है। सबसे बड़ा संकेत निर्दलीयों और छोटे दलों के प्रदर्शन से आया है।

ऐसे में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने टिकट वितरण, संगठन और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने की चुनौती होगी। निकाय चुनाव ने मुकाबले की दिशा जरूर दिखा दी है, लेकिन असली सियासी तस्वीर अगले दो साल की रणनीति और राजनीतिक घटनाक्रम तय करेंगे।

Tags: rajasthan civic electionrajasthan news
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