अयोध्या। राम मंदिर (Ram Mandir) के बहुचर्चित चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक जांच से एक बड़ा खुलासा हुआ है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच में मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी या कर्मचारी को क्लीनचिट नहीं दी है। लापरवाही, लचर मंदिर प्रबंधन और निगरानी तंत्र (Supervision System) के पूरी तरह फेल होने के पुख्ता सुबूतों के आधार पर जांच दल ने ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारियों को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। इस फेहरिस्त में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम भी शामिल है। वहीं, ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर लगे 40 प्रतिशत कमीशन और जमीन की खरीद-फरोख्त में वित्तीय हेरफेर के गंभीर आरोपों की जांच अभी भी तेजी से जारी है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सभी की अंतिम भूमिका स्पष्ट होगी और उसी के अनुरूप सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट 23 जून 2026 को ही उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी थी, जिसमें मामले को लेकर कई सख्त सिफारिशें की गई थीं। इन्हीं सिफारिशों का संज्ञान लेते हुए शासन के निर्देश पर 25 जून को नामजद एफआईआर दर्ज की गई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने अपनी इस प्रारंभिक रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि जिस सुनियोजित तरीके से गणना के दौरान करोड़ों रुपये का चढ़ावा चोरी होता रहा, वह सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन की भारी नाकामी को दर्शाता है। चूंकि प्रबंधन और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी इन्हीं वरिष्ठ पदाधिकारियों के कंधों पर थी, इसलिए इन्हें इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार माना गया है। हालांकि, एसआईटी की यह रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसके चलते अभी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
वर्तमान में चढ़ावा चोरी केस की कमान सीओ (CO) अयोध्या संभाल रहे हैं और उनके नेतृत्व में एक विशेष टीम इस हाई-प्रोफाइल मामले की विवेचना में जुटी है। जांच टीम पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों को खंगालने के साथ-साथ नोटों की गिनती की प्रक्रिया में शामिल रहे एक-एक कर्मचारी की भूमिका की सूक्ष्मता से जांच कर रही है। इसमें संदिग्ध पदाधिकारियों की संलिप्तता के कोण को भी परखा जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, सदस्य अनिल मिश्रा पर लगे 40 फीसदी कमीशन लेने के आरोपों और चंपत राय पर लगे जमीन खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर एसआईटी तेजी से साक्ष्य जुटा रही है। मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं, और जांच का दायरा बढ़ने से आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।









