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शतक को दोहरे या तिहरे शतक में बदलना नहीं जानते थे सचिन तेंदुलकर : कपिल देव

 

नई दिल्ली। भारत के विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव ने कहा कि क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर शतक बनाना जानते थे, लेकिन शतक को दोहरे शतक या तिहरे शतक में बदलना नहीं जानते थे।

कपिल ने पूर्व भारतीय बल्लेबाज और महिला टीम के मौजूदा कोच डब्ल्यू वी रमन के साथ पोडकास्ट ‘इनसाइड आउट’ में कहा कि सचिन के पास अपार प्रतिभा थी। जो उन्होंने किसी और में नहीं देखी। वह उस दौर में पैदा हुए थे जहां वह जानते थे कि शतक कैसे लगाना है? लेकिन वह कभी निर्मम बल्लेबाज नहीं बन पाए। सचिन के पास क्रिकेट से जुड़ा सब कुछ था। सचिन शतक बनाना जानते थे लेकिन उस शतक को दोहरे शतक और तिहरे शतक में कैसे बदलें, यह उन्हें नहीं आता था।

भारत के पहले विश्वकप विजेता टीम के कप्तान कपिल ने कहा कि सचिन के पास कम से कम पांच तिहरा शतक लगाने और 10 दोहरा शतक लगाने की क्षमता थी, क्योंकि वह किसी भी तरह के गेंदबाज के हर ओवर में चौका या छक्का जड़ सकते थे।

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सचिन ने अपने करियर में विश्व रिकॉर्ड टेस्ट 51 शतक बनाये जिसमें छह दोहरे शतक शामिल थे और उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 248 रन था जो उन्होंने बंगलादेश के खिलाफ दिसम्बर 2004 में बनाया था। सचिन के नाम 100 अंतर्राष्ट्रीय शतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड है।

कपिल ने कहा कि सचिन मुंबई क्रिकेट की मानसिकता में फंस गये। जिसमें एक बार शतक जड़ने के बाद लोग दोबारा शून्य से शुरू करने लगते हैं और यहीं पर आपको वीरेंद्र सहवाग जैसा निर्मम बनना पड़ता है। सचिन को अपना पहला दोहरा शतक लगाने में 10 वर्षों का वक्त लगा था।

सहवाग ने अपने करियर में कुल 23 शतक बनाये जिसमें दो तिहरे शतक और चार दोहरे शतक शामिल थे। सहवाग एक बार 293 रन पर आउट हुए थे वरना वह टेस्ट क्रिकेट में तीन तिहरे शतक बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज बन जाते। सहवाग की एक अन्य बड़ी पारी 254 रन की थी।

भारत की तरफ से सबसे पहले 400 टेस्ट विकेट लेने वाले पूर्व तेज गेंदबाज कपिल ने कहा कि मैं सहवाग से कहता था कि आप सचिन का अनुसरण करो। सहवाग के पास इतने शाट्स थे कि अगर वह विकेट पर आधे घंटे विकेट पर टिक जाए तो सैकड़ा जड़ देगा। वहीं मैं सचिन से कहता था कि उन्हें सहवाग की बल्लेबाजी देखनी चाहिए जो एक बार शतक जड़ने के बाद हर ओवर में दो नहीं तो कम से कम एक बाउंड्री लगाते हैं। जिससे अगले 20 ओवर में वह अपने दोहरे शतक तक पहुंच जाते।

कपिल ने कहा कि यही सचिन और सहवाग के बीच बड़ा फर्क था। कई बार आपके आसपास ऐसे लोग नहीं होते जो आपको कुछ बता सकें और कई बार आपको अपनी क्षमता का अंदाजा नहीं होता। सचिन की क्षमता की कोई तुलना नहीं की जा सकती लेकिन शतक पूरा करने के बाद वह सिंगल लेकट स्ट्राइक से हट जाया करते थे।

कपिल ने कहा कि सचिन मुंबई क्रिकेट की मानसिकता में फंस गये। जिसमें एक बार शतक जड़ने के बाद लोग दोबारा शून्य से शुरू करने लगते हैं और यहीं पर आपको वीरेंद्र सहवाग जैसा निर्मम बनना पड़ता है। सचिन को अपना पहला दोहरा शतक लगाने में 10 वर्षों का वक्त लगा था।

सहवाग ने अपने करियर में कुल 23 शतक बनाये जिसमें दो तिहरे शतक और चार दोहरे शतक शामिल थे। सहवाग एक बार 293 रन पर आउट हुए थे वरना वह टेस्ट क्रिकेट में तीन तिहरे शतक बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज बन जाते। सहवाग की एक अन्य बड़ी पारी 254 रन की थी।

भारत की तरफ से सबसे पहले 400 टेस्ट विकेट लेने वाले पूर्व तेज गेंदबाज कपिल ने कहा, “मैं सहवाग से कहता था कि आप सचिन का अनुसरण करो। सहवाग के पास इतने शाट्स थे कि अगर वह विकेट पर आधे घंटे विकेट पर टिक जाए तो सैकड़ा जड़ देगा।

वहीं मैं सचिन से कहता था कि उन्हें सहवाग की बल्लेबाजी देखनी चाहिए जो एक बार शतक जड़ने के बाद हर ओवर में दो नहीं तो कम से कम एक बाउंड्री लगाते हैं। जिससे अगले 20 ओवर में वह अपने दोहरे शतक तक पहुंच जाते।

कपिल ने कहा कि यही सचिन और सहवाग के बीच बड़ा फर्क था। कई बार आपके आसपास ऐसे लोग नहीं होते जो आपको कुछ बता सकें और कई बार आपको अपनी क्षमता का अंदाजा नहीं होता। सचिन की क्षमता की कोई तुलना नहीं की जा सकती, लेकिन शतक पूरा करने के बाद वह सिंगल लेकट स्ट्राइक से हट जाया करते थे।

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