नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अंतरिम तौर पर CEC को निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पीठ ने कहा कि उसे उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था कानून के मुताबिक काम कर रही होगी।
SIR और फॉर्म-6 पर उठे सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के कुछ अन्य फैसले दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़े कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया है।
‘पहले चुनाव आयोग का जवाब आने दें’
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने CEC को निलंबित करने और बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों के जरिए आयोग का कामकाज चलाने की मांग रखी। उन्होंने CEC को मिले कानूनी संरक्षण और चुनाव आयोग में फैसलों की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि याचिकाकर्ता एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर अपनी दलील रख रहे हैं और अदालत केवल उसके आधार पर अंतरिम आदेश नहीं दे सकती। कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग का जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं ने उठाया सामूहिक फैसलों का मुद्दा
ये याचिकाएं सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की हैं। याचिकाओं में यह जांचने की मांग की गई है कि क्या CEC ने ऐसे अधिकारों का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल किया, जो कानून के तहत पूरे चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
अदालत ने फिलहाल निलंबन की मांग पर अंतरिम राहत नहीं दी है। अब मामले में चुनाव आयोग के जवाब के बाद आगे की सुनवाई होगी।









