• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं प्रयागराज के तीर्थपुरोहित प्रयागवाल

Writer D by Writer D
18/12/2024
in उत्तर प्रदेश, धर्म, प्रयागराज
0
Maha Kumbh
14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

महाकुम्भनगर। तीर्थराज प्रयागराज का नाम आते ही हमारी स्मृति में त्रिवेणी संगम और महाकुम्भ (Maha Kumbh) का नाम आता है। लेकिन प्रयागराज के संगम तट और महाकुम्भ की पंरपरा से अविच्छिन्न रूप से जुड़े हुये हैं यहां के तीर्थपुरोहित। प्रयागराज के तीर्थपुरोहित जिन्हें प्रयागवाल या स्थानीय बोली में पंडा भी कहा जाता है। मोक्षदायक तीर्थराज प्रयाग में मृत्यु से मुक्ति का मार्ग, यहां के तीर्थपुरोहित प्रयागवाल ही दिखाते हैं। सनातन परंपरा और पौराणिक मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद पितरों की मुक्ति संगम क्षेत्र में अस्थि पूजन और पिण्ड दान के बाद ही होती है। सनातन परंपरा प्रयागराज के संगम तट पर पूजन-अर्चन का अधिकार यहां के तीर्थपुरोहित प्रयागवालों को ही प्रदान करती है। प्राचीन काल से संगम तट पर पूजन करवाने और माघ तथा महाकुम्भ (Maha Kumbh) मेले में श्रद्धालुओं को कल्पवास करवाने का कार्य प्रयागवाल तीर्थपुरोहित ही करते आ रहे हैं।

संगम क्षेत्र में पिण्ड दान और अस्थि पूजन करवाने के अधिकारी हैं तीर्थ पुरोहित प्रयागवाल

प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर स्नान-दान और महाकुम्भ (Maha Kumbh) के आयोजन का इतिहास बहुत प्राचीन है। प्रयागराज को सनातन परंपरा में सभी तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थराज कहा गया है। प्रयागराज को पौराणिक मान्यता अनुसार मोक्षदायनी सप्तपुरियों का राजा माना गया है। प्रयागराज में अस्थिदान और पिण्डदान पूजन का विशेष महात्म हमारे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है। मृतक पूर्वजों के बिना अस्थि पूजन और पिण्डदान के पितरों को मुक्ति नहीं मिलती। प्रजापत्य व्यवस्था के अनुरूप प्रयागराज के संगम क्षेत्र में अस्थि पूजन और पिण्डदान करवाने का अधिकार प्रयागवाल तीर्थपुरोहितों का ही है।

तीर्थपुरोहितों की परंपरा के बारे में बताते हुए संगम क्षेत्र के तीर्थपुरोहित राजेश्वर गुरु बताते हैं कि वर्षों से चली आ रही परंपरा और आपसी सहमति के आधार पर तीर्थ पुरोहितों के घाट और क्षेत्रवार यजमान भी बंटे हुए हैं। अपने क्षेत्र के यजमानों के पितरों का अस्थि पूजन, पिण्ड दान उनके तीर्थपुरोहित ही करवाते हैं।

पहले प्रयाग फिर काशी और अंतिम तौर पर गया में पिण्डदान का पूजन होता है। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने भी लंका से लौटकर अपने पिता महाराज दशरथ का पिण्डदान गया में किया था। यहां यजमान वर्षभर विशेषतौर पर पितृ पक्ष में अपने पितरों की मुक्ति के लिए तर्पण और पूजन करने आते हैं।

झण्डा और निशान से होती है संगम क्षेत्र में तीर्थ पुरोहितों की पहचान

तीर्थपुरोहित राजेश्वर गुरु बताते हैं कि सभी तीर्थपुरोहित अपने यजमानों का वंशवार लेखा-जोखा अपनी बही में लिख कर रखते हैं। तीर्थपुरोहितों की इन बही खातों में हमारी कई पीढ़ी के पूर्वजों का विवरण दर्ज होता है। उन्होंने बताया कि पहचान की सुविधा के लिए तीर्थपुरोहित अलग-अलग झण्डा और निशान पीढ़ी दर पीढ़ी से अपनाते चले आ रहे हैं। उनके यजमान इन झण्डों और निशानों से ही उन्हें पहचानते हैं। कोई दो तुमड़ी वाले पंडा हैं तो कोई टेढ़ी नीम वाले, कोई कटार वाले पंड़ा हैं तो कोई सेहरी वाले पंड़ा। तीर्थपुरोहितों के ये झण्डें संगम आने वाले श्रद्धालुओं को दूर से ही दिखने लगते हैं।

गंगा किनारे 1000 से अधिक गांवों में हो रही प्राकृतिक खेती

प्रयागराज के तीर्थपुरोहित प्रयागवाल गंगा पूजन, स्नान-दान, गऊदान, वेणीदान, पिण्डदान, अस्थि पूजन, मुण्डन तथा कल्पवास आदि सभी तरह के पूजा-पाठ करवाते हैं। उन्होंने बताया कि वर्षों से चली आ रही सनातन पंरपरा के अनुरूप संगम क्षेत्र में माघ मेले, कुम्भ और महाकुम्भ में श्रद्धालुओं को कल्पवास करवाने का कार्य तीर्थपुरोहित प्रयागवाल ही करते आ रहे हैं। संगम क्षेत्र में टेंट आदि की व्यवस्था करके अपने यजमानों के कल्पवास के व्रत और संकल्प को पूरा करवाते हैं।

Tags: maha kumbhMaha Kumbh 2025maha kumbh calling
Previous Post

गंगा किनारे 1000 से अधिक गांवों में हो रही प्राकृतिक खेती

Next Post

‘मैं उस पार्टी से हूं जो…’, आंबेडकर को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

Writer D

Writer D

Related Posts

Tulsi
Main Slider

घर से दूर हो जाएगी पैसों की तंगी, ले आएं ये पौधे

16/07/2026
Paush Amavasya
Main Slider

इसके बिना अधूरी मानी जाती है पूजा, जानें नियम

16/07/2026
Rudraksha ki mala
Main Slider

रुद्राक्ष धारण करने से मिलती सभी कष्टों से मुक्ति, जानें माला पहनने के नियम

16/07/2026
flowers
धर्म

आपके रिश्तों में बढ़ गया मनमुटाव, इन चीजों को घर से कर दें बाहर

16/07/2026
Nandini Yojana changed the life of Shakuntala Devi
उत्तर प्रदेश

मोदी-योगी सरकार की नंदनी योजना बनी वरदान, प्रयागराज की शकुंतला देवी हुईं आत्मनिर्भर

15/07/2026
Next Post
Amit Shah

'मैं उस पार्टी से हूं जो...', आंबेडकर को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

यह भी पढ़ें

joe biden

तालिबान को बाइडेन की चेतावनी, कहा- अमेरिकी सैनिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं

21/08/2021
होटल में आतंकी हमला

सोमालिया : मोगादिशु के होटल में आतंकी हमला, 8 की मौत, 28 अन्य घायल

17/08/2020

28 अगस्त राशिफल : जानिए कैसा बीतेगा आपका आज का दिन

28/08/2020
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version