• About us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Child Safety Policy
  • Contact
24 Ghante Latest Hindi News
Advertisement
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म
No Result
View All Result

इस मंदिर में माता को चढ़ाए जाते थे अंग्रेजों के कटे सिर, बाबू बंधू सिंह से जुड़ी है कहानी

Writer D by Writer D
31/03/2025
in Main Slider, धर्म, फैशन/शैली
0
Tarkulha Devi Temple

Tarkulha Devi Temple

14
SHARES
176
VIEWS
Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

गोरखपुर सिटी से 15-17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तरकुलहा देवी मंदिर (Tarkulha Devi Temple) एक प्रसिद्ध मंदिर है। यहां पर दूर दराज से लोग मां तरकुलहा का दर्शन करने के लिए आते हैं। चैत्र नवरात्र में यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां का दर्शन करने के लिए आते हैं। तरकुलहा देवी मंदिर (Tarkulha Devi Temple) का इतिहास बाबू बंधू सिंह नामक स्वतंत्रता सेनानी से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि बाबू बंधू सिंह ने यहां तरकुल के पेड़ के नीचे पिंड स्थापित कर देवी की उपासना की थी।

बाबू बंधू सिंह का भारत के स्वतंत्रता में काफी सहयोग रहा है। अंग्रेजों के खिलाफ उन्होंने गोरिल्ला युद्ध में भाग लिया था। डुमरी रियासत के बाबू बंधू सिंह तरकुलहा देवी को अपनी इष्ट देवी मानते थे। वह गोरिल्ला युद्ध में काफी माहिर थे। उन्होंने इस युद्ध से अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिया था।

सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले इस इलाके में जंगल हुआ करता था। यहां से गर्रा नदी होकर गुजरती थी। और यहीं नदी तट पर तरकुलक पेड़ के नीचे बाबू बंधू सिंह पिंडी स्थापित कर देवी की उपासना किया करते थे। जब भी कोई अंग्रेज उस जंगल से गुजरता तो बाबू बंधू सिंह उसे मार कर उसका सिर देवी मां के चरणों में समर्पित कर देते थे। पहले अंग्रेजों को यह लगा कि उनके सिपाही जंगल में जाकर लापता हो जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें यह जानकारी हो गई कि उनके सिपाही बंधू सिंह का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद अंग्रेज उनकी तलाश शुरू कर दी, लेकिन वो अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे। बाद में एक व्यापारी के मुखबिरी से वह उनके हाथ लग गए।

सातवीं बार मिली फांसी

अंग्रेज सरकार ने बंधू सिंह को फांसी की सजा दी। बंधू सिंह को छह बार अंग्रेजों ने फांसी दी और वह कामयाब नहीं हुए सातवीं बार बंधू सिंह को अलीपुर चौराहे पर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई। बताया जाता है कि सातवीं बार उन्होंने मां का ध्यान करते हुए उन्हें फांसी हो जाने का आग्रह किया। इसके बाद उन्हें फांसी हुई।

यह भी माना जाता हैं कि जब बाबू बंधू सिंह को अंग्रेजों ने फांसी दी तो तरकुल के पेड़ का ऊपरी हिस्सा टूट गया और खून के फव्वारे निकलने लगे। इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने उस स्थान पर देवी मां की पूजा करनी शुरू कर दी और बाद में मंदिर का निर्माण करवाया।

चैत्र रामनवमी का मेला लगता है

चैत्र रामनवमी से एक माह का मेला तरकुलहा माता मंदिर (Tarkulha Devi Temple) पर लगता है। दूर दराज से लोग यहां मां का दर्शन करने आते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए मंदिर समिति द्वारा विशेष व्यवस्था की जाती है। प्रशासन द्वारा पुलिस की यहां अच्छी व्यवस्था की जाती है, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई परेशानी न हो। मंदिर के पुजारी ने बताया कि मां तरकुलहा माता की मान्यता तरकुल के पेड़ से है। यहां काफी दूर दराज से लोग आते हैं। श्रद्धालु यहां फल फूल नारियल चढ़ाते हैं। इससे खुश होकर मां उनकी सारी मुरादें पूरी करती हैं।

Tags: Tarkulha Devi Temple
Previous Post

अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत कब है?, जानें शुभ मुहूर्त एवं महत्व

Next Post

अप्रैल में चैत्र पूर्णिमा किस दिन है? जानें इसका महत्व

Writer D

Writer D

Related Posts

Main Slider

‘पदक लाओ, पद पाओ’ के तहत खिलाड़ियों की सीधी भर्ती: मुख्यमंत्री

16/10/2026
Main Slider

योगी सरकार में आरटीई के अंतर्गत बच्चों की शिक्षा के लिए ₹698.27 करोड़ आवंटित

15/10/2026
Main Slider

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से की मुलाकात

15/10/2026
Main Slider

उत्तराखंड के हर जिले में बनेगा कंप्यूटर आधारित परीक्षा केंद्र, मुख्य सचिव ने निर्माण कार्यों में देरी पर जताई नाराजगी

15/10/2026
Main Slider

कसारी-मसारी अब ‘श्रीकृष्णपुरी’ नाम से विकसित होगा: मुख्यमंत्री योगी

15/10/2026
Next Post
Magha Purnima

अप्रैल में चैत्र पूर्णिमा किस दिन है? जानें इसका महत्व

यह भी पढ़ें

योगी ने प्रदेशवासियों को दी होली की बधाई, की यह अपील

16/03/2022
cm yogi

अवध शिल्पग्राम में नकवी व योगी आज करेंगे हुनर हाट का शुभारम्भ

23/01/2021
Arvind Kejriwal

मुफ्त बिजली और पानी… दिल्ली में किराएदारों के लिए केजरीवाल का बड़ा ऐलान

18/01/2025
Facebook Twitter Youtube

© 2017 24घंटेऑनलाइन

  • होम
  • राष्ट्रीय
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
    • हिमाचल प्रदेश
  • राजनीति
  • अंतर्राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म

© 2017 24घंटेऑनलाइन

Go to mobile version