उन्नाव रेप केस की पीड़िता ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी देकर पूर्व MLA कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Sengar) के खिलाफ और सबूत पेश करने की अपील की, जिस केस में सेंगर को दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी। पीड़िता की अर्जी जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए आई थी। कोर्ट ने कहा कि अपील की सुनवाई आखिरी स्टेज में है।
सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से पेश हुए वकील महमूद प्राचा ने कहा कि पीड़िता आगे सबूत रिकॉर्ड करने और स्कूल रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी जन्मतिथि समेत और डॉक्यूमेंट पेश करने की मांग करती है। अर्जी पर गौर करते हुए, कोर्ट ने पाया कि एप्लीकेशन के साथ कोई डॉक्यूमेंट्स अटैच नहीं थे और इसलिए, उसने पीड़िता को 31 जनवरी तक ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स फाइल करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कुलदीप सेंगर (Kuldeep Sengar) के साथ-साथ सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को भी 2 हफ़्ते के अंदर एप्लीकेशन का जवाब फाइल करने का निर्देश दिया। सीनियर एडवोकेट एन हरिहरन कुलदीप सेंगर की तरफ से पेश हुए।
दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सेंगर (Kuldeep Sengar) की सज़ा सस्पेंड कर 23 दिसंबर, 2025 को ज़मानत दे दी थी। हालांकि, कुछ दिनों बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर, 2025 को ऑर्डर पर रोक लगा दी थी। पीड़िता ने साल 2020 की कुलदीप सेंगर की अपील में सबूत पेश करने के लिए नई अर्जी दी है। इसमें सेंगर की सज़ा और उम्रकैद की सज़ा के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
कुलदीप सेंगर की सज़ा सस्पेंड करते हुए, कोर्ट ने मुख्य रूप से यह माना था कि उसके खिलाफ POCSO एक्ट के सेक्शन 5(c) के तहत अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने माना कि, पहली नज़र में, यह अपराध एक्ट के सेक्शन 5 के तहत गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के तौर पर क्वालिफ़ाई नहीं करता।
कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि अपील करने वाले, सेंगर को POCSO एक्ट के सेक्शन 5(c) या इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 376(2)(b) के लिए पब्लिक सर्वेंट की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता। ट्रायल कोर्ट ने पहले सेंगर को गंभीर पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट के लिए इस आधार पर दोषी ठहराया था कि वह पब्लिक सर्वेंट की परिभाषा में आता है।
सीबीआई कोर्ट ठहरा चुकी है दोषी
कुलदीप सेंगर (Kuldeep Sengar) को 2019 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से रेप के लिए स्पेशल CBI कोर्ट ने दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। कुलदीप सेंगर 2020 में पीड़िता के पिता की गैर-इरादतन हत्या से जुड़े एक अलग मामले में 10 साल की सज़ा भी काट रहा है।
पीड़िता और उसके परिवार ने पूर्व विधायक और उसके साथियों पर लगातार परेशान करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI ने पीड़िता के परिवार के सदस्यों पर हमलों सहित कई संबंधित मामलों की भी जांच की थी।









