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उद्योग-व्यापार के लिए यूपी बना ड्रीम डेस्टिनेशन

Writer D by Writer D
28/01/2026
in उत्तर प्रदेश, राजनीति, लखनऊ
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UP has become a dream destination for industry-business.

UP has become a dream destination for industry-business.

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किए गए व्यापक सुधारों का असर केवल नीतिगत दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के साथ ही सरकारी मशीनरी की कार्यशैली में भी परिवर्तन आया है। जहां पहले फाइलों की गति सुस्त रहती थी, वहीं अब समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित है। योगी सरकार के नियामक सुधारों ने वर्षों से चली आ रही जटिलताओं को तोड़ते हुए प्रदेश की कार्यशैली में आमूलचूल परिवर्तन किया है। 577 प्रावधानों को अपराधमुक्त करने सहित बड़ी संख्या में अनुपालनों में कटौती, 948 पुराने कानूनों के खात्मे और ट्रेड लाइसेंस जैसी बाध्यताओं को समाप्त कर उत्तर प्रदेश अब उद्योग-व्यापार (Industry-Business) के लिए ‘ड्रीम डेस्टिनेशन’ है।

नियामक सुधारों के बाद निवेश प्रस्तावों में उल्लेखनीय तेजी आई है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ा और निर्णय लेने की समयसीमा तय होने से अनिश्चितता कम हुई। पहले जिन परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने में वर्षों लग जाते थे, वे अब तय समय के भीतर क्रियान्वित हो रही हैं। इससे न केवल पूंजी निवेश बढ़ा, रोजगार सृजन को भी गति मिली। उद्यमी एसके आहूजा का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जिस प्रकार से उद्योग-व्यापार (Industry-Business) के क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया गया, वह देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है। अब देश और दुनिया भर के निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर देखने लगे हैं। निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अपने कदम बढ़ा रहा है।

 आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि इन सुधारों के चलते एमएसएमई सेक्टर को विशेष मजबूती मिली है। प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई हैं। जल्द ही यह संख्या एक करोड़ को पार कर जाएगी। छोटे व मध्यम उद्यमों के लिए नियमों की सरलता ने उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। पंजीकरण प्रक्रियाओं में आसानी और दंडात्मक प्रावधानों में कमी से छोटे कारोबारी अब बिना भय के अपने व्यवसाय का विस्तार कर पा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ा है और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिली है।

श्रम कानूनों में किए गए बदलावों का असर औद्योगिक माहौल में शांति के रूप में देखने को मिल रहा है। कारावास जैसे कठोर प्रावधान हटने से नियोक्ता व श्रमिकों के बीच संवाद का वातावरण बना। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन दीपक मैनी का कहना है कि अन्य राज्यों के उद्योग (Industry) जगत भी संबंधित सरकारों से उत्तर प्रदेश जैसा प्रावधान करने की मांग उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में विवादों के समाधान के लिए सुधारात्मक व मध्यस्थता आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे उद्योगों में कामकाज का वातावरण बेहतर हुआ और उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ा है।

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में डिजिटल गवर्नेंस के विस्तार ने निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया है। विभिन्न पोर्टलों व डैशबोर्ड के माध्यम से अब परियोजनाओं की प्रगति पर सीधे नजर रखी जा रही है। वरिष्ठ स्तर पर नियमित समीक्षा से विभागों की जवाबदेही तय हो रही है। तकनीक के उपयोग से शासन व्यवस्था में पारदर्शिता व भरोसा, दोनों बढ़े हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। नियामक सरलीकरण, डिजिटल प्लेटफॉर्म व डिक्रिमिनलाइजेशन का संयोजन निवेशकों को स्थिर व भरोसेमंद माहौल देता है। यही वजह है कि घरेलू निवेशकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि भी प्रदेश में बढ़ी है।

 योगी सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले चरण में सुधारों को और प्राथमिकता दी जाएगी। नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करते हुए जहां जरूरत होगी, वहां अतिरिक्त बदलाव किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश केवल निवेश आकर्षित करने वाला प्रदेश ही नहीं, बल्कि टिकाऊ विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला मॉडल राज्य बना है। प्रशासनिक सुधारों की इस श्रृंखला को सरकार विकास की निरंतर प्रक्रिया मान रही है, जिसका अंतिम लक्ष्य प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाना है।

Tags: Yogi News
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