सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए जितना पवित्र माना जाता है, उतना ही भगवान विष्णु की आराधना के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है। इस बार सावन की कामिका एकादशी (Kamika Ekadashi) कई शुभ योगों के साथ आ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन द्विपुष्कर योग, मृगशिरा नक्षत्र और हर्षण योग का दुर्लभ संयोग बनेगा। मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, जप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
कब रखा जाएगा कामिका एकादशी व्रत?
पंचांग के अनुसार सावन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 8 अगस्त 2026 को दोपहर 1:59 बजे शुरू होगी और 9 अगस्त को सुबह 11:04 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 10 अगस्त को सुबह 5:47 बजे से 8:00 बजे के बीच करना शुभ माना गया है।
इस बार क्यों है खास?
इस वर्ष कामिका एकादशी पर सुबह के बाद द्विपुष्कर योग का निर्माण होगा। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में किए गए शुभ कार्य, पूजा-पाठ और दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। सावन मास होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है। श्रद्धालु श्रीहरि की आराधना के साथ रुद्राभिषेक और शिव पूजन भी करते हैं।
क्या है कामिका एकादशी की कथा?
पद्म पुराण के अनुसार एक समय एक व्यक्ति अपने पापकर्मों से परेशान होकर महर्षि अंगिरा की शरण में पहुंचा। ऋषि ने उसे कामिका एकादशी का व्रत रखने का उपदेश दिया। उसने श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया, जिससे उसके सभी पाप नष्ट हो गए और अंत में उसे विष्णुलोक की प्राप्ति हुई। इसी कारण कामिका एकादशी को पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी कहा जाता है।
ऐसे करें पूजा
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। श्रीहरि को तुलसी दल, पीले पुष्प, पंचामृत, फल और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और एकादशी व्रत कथा का श्रवण करना शुभ माना गया है।
सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
क्या है धार्मिक महत्व?
सनातन परंपरा में कामिका एकादशी को मनोकामना पूर्ण करने वाली और पापों का नाश करने वाली एकादशी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही सत्यनारायण कथा, पार्थिव शिवलिंग पूजन और रुद्राभिषेक करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।







